साइबर अपराधी नए-नए तरीकों से संगठनों में घुसपैठ करके डाटा बाहर निकालते हैं और उसे डार्क वेब पे बेचते हैं, जिस वजह से डाटा लीक लगातार बढ़ते जा रहे हैं। बड़ी कंपनियों को निशाना बनाने वाली घटनाएं अक्सर सुर्खियां बटोरती हैं, लेकिन कई लीक छुपा लिए जाते हैं या जिन पे किसी का ध्यान ही नहीं जाता, जिससे साइबर हमलों के असली पैमाने को समझना मुश्किल हो जाता है।
इस छिपे हुए पहलू पे रोशनी डालने में मदद के लिए हमने अक्टूबर 2025 में Data Breach Observatory लॉन्च किया, एक सार्वजनिक टूल जो डार्क वेब पे मिले लीक को ट्रैक करता है और दिखाता है कि चुराया गया डाटा कहां घूम रहा है।
कई स्टडी जो प्रभावित कंपनियों की स्वैच्छिक घोषणाओं पे निर्भर करती हैं, उनके उलट Observatory उन डेटासेट का विश्लेषण करता है जो वहां दिखते हैं जहां साइबर अपराधी असल में चुराई गई जानकारी बेचते हैं। इससे ऐसे लीक सामने आने में मदद मिलती है जो वरना छिपे रह जाते।
आज हम Data Breach Observatory का अपडेट प्रकाशित कर रहे हैं, जिसमें कई नए पहचाने गए लीक सामने आते हैं और उद्योगों व संगठनों में पैटर्न उजागर होते हैं।
Observatory में नवीनतम लीक देखें
ताज़ा डाटा क्या दिखाता है
2025 की शुरुआत से Proton के Data Breach Observatory ने 512 लीक पहचाने हैं, जिनमें 902 मिलियन से ज़्यादा रिकॉर्ड उजागर हुए हैं।
Observatory में रिपोर्ट किए गए लीक को गहराई से देखने पे उद्योगों और संगठनों में साफ ट्रेंड दिखते हैं।
रिटेल सबसे ज़्यादा निशाने पे रहा सेक्टर बना हुआ है, जो लीक का शिकार हुई कंपनियों में 25% है, उसके बाद टेक्नोलॉजी (12%) और मीडिया/मनोरंजन (11%) है।
एक और ज़रूरी बात ये है कि छोटे संगठनों को सिर्फ बार-बार लीक का सामना नहीं करना पड़ता, बल्कि सबसे बड़ी और सबसे नुकसानदेह घटनाओं में भी इन्हें असमानुपातिक रूप से निशाना बनाया जाता है, जिनमें अक्सर संवेदनशील पर्सनल और सत्यापन डाटा शामिल होता है।
छोटे बिज़नेस सबसे ज़्यादा बार और सबसे ज़्यादा निशाने पे
छोटे और मध्यम आकार के बिज़नेस (SMBs), यानी 1 से 249 कर्मचारियों वाले संगठन, डाटा लीक के सबसे आम शिकार बने हुए हैं। जनवरी 2025 से ट्रैक किए गए लीक में इनकी हिस्सेदारी 63% है, जिनमें 352 मिलियन से ज़्यादा लीक हुए रिकॉर्ड शामिल हैं।
लेकिन SMBs सिर्फ़ ज़्यादा बार लीक का शिकार नहीं होते। इन्हें सबसे नुकसानदेह घटनाओं का सामना करने का ज़्यादा खतरा भी रहता है। गंभीर श्रेणी में आने वाले लीक, यानी जिनमें सत्यापन डाटा, पर्सनल आइडेंटिफ़ायर या फाइनेंशियल जानकारी जैसी अत्यधिक संवेदनशील जानकारी उजागर होती है, छोटे संगठनों को असमानुपातिक रूप से प्रभावित करते हैं। हाई-रिस्क डाटा वाले लीक में SMBs की हिस्सेदारी 61% है, और अकेले छोटे बिज़नेस (1 से 49 कर्मचारी) इन गंभीर घटनाओं में 48% हैं।
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बड़े पैमाने के लीक में भी यही पैटर्न दिखता है। 1,00,000 से ज़्यादा रिकॉर्ड उजागर करने वाली घटनाओं में SMBs की हिस्सेदारी 60% है, और छोटे बिज़नेस इन बड़े लीक में 42% हैं।
कुल मिलाकर, ये नतीजे दिखाते हैं कि छोटे संगठन न सिर्फ साइबर हमलों के सबसे ज़्यादा शिकार होते हैं, बल्कि सबसे गंभीर लीक का सामना करने की सबसे ज़्यादा संभावना भी इन्हीं की होती है।
“विशिंग” कैंपेन का बढ़ना
इस अपडेट से सामने आया एक और ट्रेंड है वॉइस फिशिंग कैंपेन का पैमाना(नई विंडो), जिसमें साइबर क्रिमिनल ग्रुप ShinyHunters द्वारा 2026 की शुरुआत में किया गया एक कैंपेन भी शामिल है।
विशिंग अभियान ने कई बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों को निशाना बनाया और कई बड़े लीक का कारण बना, जिनमें Bumble, Match Group और SoundCloud से जुड़ी घटनाएं शामिल हैं। कुल मिलाकर, इन हमलों से करोड़ों रिकॉर्ड उजागर हुए, जिससे पता चलता है कि समन्वित फिशिंग अभियान कितनी जल्दी बड़े पैमाने के डेटा लीक में बदल सकते हैं।
संपर्क जानकारी और पासवर्ड सबसे ज़्यादा उजागर होने वाले डाटा में हैं
लीक हुए डेटासेट के विश्लेषण से पता चलता है कि कुछ तरह की जानकारी लीक में काफी ज़्यादा दिखती है।
नाम और ईमेल पता लगभग 10 में से 9 लीक में दिखते हैं, जिससे ये सबसे आम तौर पे उजागर होने वाले डाटा पॉइंट बन जाते हैं। फोन नंबर और फिजिकल पता जैसी संपर्क जानकारी 75% लीक में दिखती है, जबकि पासवर्ड 47% में उजागर होते हैं।
42% घटनाओं में हमलावरों को किसी शख्स का नाम और फिजिकल पता दोनों मिले, ये कॉम्बिनेशन पहचान की चोरी और टारगेटेड घोटालों के लिए खास तौर पे काम के हो सकते हैं।
सरकारी आईडी, हेल्थ रिकॉर्ड, और दूसरे पर्सनल आइडेंटिफ़ायर जैसा अत्यधिक संवेदनशील पर्सनल डाटा 37% लीक में दिखता है, जबकि फाइनेंशियल जानकारी करीब 5% घटनाओं में उजागर होती है।
डार्क वेब के लीक सामने लाना क्यों ज़रूरी है
सिर्फ़ 2026 में ही दर्जनों लीक से करीब 100 मिलियन रिकॉर्ड पहले ही उजागर हो चुके हैं। बड़ी कंपनियां अक्सर सुर्खियों में रहती हैं, लेकिन डाटा दिखाता है कि सबसे ज़्यादा प्रभावित SMBs होते हैं, जो कम रिपोर्ट होने वाली घटनाओं को ज़्यादा दिखाने और संगठनों को अपने जोखिम बेहतर समझने में मदद करने की अहमियत रेखांकित करता है।
Data Breach Observatory से आप डार्क वेब पे मिले लीक देख सकते हैं और उद्योगों, कंपनी के साइज़, और डाटा के टाइप के हिसाब से पैटर्न का विश्लेषण कर सकते हैं। आप लीक को इनके हिसाब से खोज सकते हैं:
- लीक की तारीख
- लीक का साइज़ (उजागर हुए रिकॉर्ड की संख्या)
- समझौता किए गए डाटा का टाइप और संवेदनशीलता
- कंपनी का नाम, देश, और उद्योग
- संगठन का साइज़
Data Breach Observatory एक्सप्लोर करें
अपने व्यवसाय को डाटा लीक से बचाएं
किसी भी साइज़ के संगठनों के लिए डाटा लीक के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। बिज़नेस के लिए डाटा लीक की औसत कीमत फाइनेंशियल नुकसान और रेगुलेटरी जुर्माने के रूप में $4.88 मिलियन है। छोटे संगठनों के लिए फाइनेंशियल असर कई लाख डॉलर तक पहुंच सकता है, जो कई कंपनियों को बंद होने के खतरे में डाल सकता है।
लीक को रोकना अक्सर ये समझने से शुरू होता है कि हमलावर कैसे काम करते हैं। कई साइबर हमले कर्मचारियों को फिशिंग, प्रीटेक्स्टिंग, और स्पीयर फिशिंग जैसी तकनीकों से निशाना बनाते हैं, जिनमें हमलावर सहकर्मी, एग्जीक्यूटिव या सर्विस प्रोवाइडर की नकल करके लोगों को लॉगइन प्रमाण या संवेदनशील जानकारी बताने के लिए बहकाते हैं। इसके बाद वो क्रेडेंशियल स्टफिंग हमलों का इस्तेमाल करके इन प्रमाणों को कई खातों पे आज़मा सकते हैं। सप्लाई चेन हमले साइबर अपराधियों को थर्ड पार्टी सप्लायर और वेंडर के ज़रिए बिज़नेस को निशाना बनाने देते हैं।
बुनियादी सिक्योरिटी प्रैक्टिस मजबूत करने से ये जोखिम काफी कम हो सकते हैं। संगठनों को ये सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी खातों पे दो-फैक्टर सत्यापन सक्षम हो, मजबूत पासवर्ड नीतियां लागू हों, और कर्मचारियों को अपने प्रमाण बचाने के लिए ज़रूरी टूल और ट्रेनिंग दी जाए।
मजबूत सिक्योरिटी प्रैक्टिस को उभरते खतरों की बेहतर जानकारी के साथ मिलाकर संगठन डाटा लीक के बढ़ते जोखिम से खुद को बेहतर बचा सकते हैं।






