VPN(नई विंडो) पासथ्रू राऊटर की एक खासियत है, जो VPN ट्रैफिक को आपके फायरवॉल और Network Address Translation (NAT)(नई विंडो) से गुजरने देती है। ये खुद VPN कनेक्शन नहीं बनाती, बल्कि ये सुनिश्चित करती है कि आपका राऊटर आपके नेटवर्क के किसी डिवाइस को बाहरी VPN से कनेक्ट होने से ब्लॉक न करे।

ज़्यादातर बिज़नेस के लिए, इसे कॉन्फ़िगर करने या इसके बारे में सोचने की ज़रूरत नहीं होती। Proton VPN जैसे विश्वसनीय VPN डिफॉल्ट रूप से NAT के साथ काम करने के लिए बनाए गए हैं, इसलिए राऊटर बिना किसी खास नियम के ट्रैफिक को अपने आप हैंडल कर लेते हैं।

VPN पासथ्रू क्यों होता है?

VPN पासथ्रू पुराने VPN प्रोटोकॉल और नए नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच की संगति समस्याओं को हल करता है। ज़्यादातर नेटवर्क NAT का इस्तेमाल करते हैं ताकि कई डिवाइस एक ही पब्लिक IP पता शेयर कर सकें। हालांकि ये सामान्य ट्रैफिक के लिए काम करता है, कुछ पुराने VPN को NAT को ध्यान में रखकर डिज़ाइन नहीं किया गया था।

चूंकि पुराने VPN प्रोटोकॉल हमेशा स्टैंडर्ड पोर्ट या ऐसी संरचनाएं इस्तेमाल नहीं करते जिन्हें NAT समझ सके, राऊटर ये ट्रैक नहीं कर पाता कि डाटा किसका है, और कनेक्शन असफल हो जाता है। VPN पासथ्रू एक वर्कअराउंड की तरह काम करता है, जो राऊटर को इस तरह के ट्रैफिक को पहचानने और सही तरीके से रूट करने में मदद करता है।

VPN पासथ्रू कैसे काम करता है?

VPN पासथ्रू राऊटर में बनी उन तकनीकों का सेट होता है, जो खास VPN प्रोटोकॉल की सहायता करती हैं। सक्षम होने पर, राऊटर:

  • खास प्रोटोकॉल या पोर्ट के इस्तेमाल से VPN ट्रैफिक की पहचान करता है
  • खास हैंडलिंग नियम लागू करता है ताकि एन्क्रिप्ट किए गए पैकेट ड्रॉप न हों
  • कनेक्शन को NAT से सही तरीके से गुजरने देता है

VPN पासथ्रू के बिना, राऊटर ट्रैफिक को ब्लॉक कर सकता है या गलत रूट कर सकता है, जिससे VPN का कनेक्ट होना रुक जाता है।

VPN पासथ्रू के प्रकार

अलग-अलग VPN डाटा को अलग-अलग तरीकों से हैंडल करते हैं, इसलिए पासथ्रू का कोई एक प्रकार नहीं होता। अगर आप पुराने सिस्टम के साथ काम कर रहे हैं, तो इस्तेमाल किए गए प्रोटोकॉल के हिसाब से आपको VPN पासथ्रू के अलग-अलग प्रकार दिख सकते हैं।

PPTP पासथ्रू

पॉइंट-टू-पॉइंट टनलिंग प्रोटोकॉल (PPTP) सबसे पुराने VPN प्रकारों में से एक है। ये डाटा भेजने और पाने के लिए जेनेरिक रूटिंग एनकैप्सुलेशन (GRE) नाम के प्रोटोकॉल का इस्तेमाल करता है। हालांकि, ट्रैफिक को डायरेक्ट करने के लिए NAT को पोर्ट नंबर चाहिए, और GRE पोर्ट इस्तेमाल नहीं करता, जिससे टकराव पैदा होता है और कनेक्शन ड्रॉप हो जाता है।

PPTP पासथ्रू डाटा में एक Call ID जोड़कर ये समस्या हल करता है। राऊटर इस ID को पोर्ट नंबर की तरह मानता है, जिससे ट्रैफिक फायरवॉल से सही तरीके से गुजर पाता है।

L2TP पासथ्रू

लेयर 2 टनलिंग प्रोटोकॉल (L2TP) PPTP की तरह ही काम करता है। NAT की रुकावट से निकलने के लिए, L2TP पासथ्रू डाटा पैकेट को एक सेशन ID देता है। ये ID पोर्ट नंबर का विकल्प काम करती है, जिससे राऊटर ट्रैफिक की पहचान करके उसे सही डिवाइस तक रूट कर पाता है।

IPSec पासथ्रू

IPSec (Internet Protocol Security) राऊटर से गुजरने के लिए NAT Traversal (NAT-T) नाम की तकनीक का इस्तेमाल करता है। ये एन्क्रिप्ट किए गए IPSec डाटा को एक स्टैंडर्ड UDP पैकेट में लपेटता है।

चूंकि राऊटर पहले से जानते हैं कि UDP पैकेट को कैसे हैंडल करना है, IPSec पासथ्रू एक खास पोर्ट (UDP 4500) के इस्तेमाल से कनेक्शन बना सकता है। इससे राऊटर कनेक्शन को सही तरीके से मैप और रूट कर पाता है, और एन्क्रिप्ट किया गया डाटा सुरक्षित तथा बिना छेड़छाड़ रहता है।

VPN और VPN पासथ्रू में क्या अंतर है?

VPN एक सेवा है, जो आपके डाटा की सुरक्षा करती है। ये आपका इंटरनेट ट्रैफिक एन्क्रिप्ट करती है और आपके कनेक्शन को एक सुरक्षित, रिमोट सर्वर से रूट करके आपका IP पता छिपाती है।

VPN पासथ्रू आपके राऊटर की एक खासियत है। ये न आपका डाटा एन्क्रिप्ट करता है, न आपका IP पता छिपाता है(नई विंडो), और न ही खुद कोई सुरक्षा देता है। इसका एकमात्र काम VPN ट्रैफिक को पहचानना और उसे राऊटर के फायरवॉल से गुजरने देना है।

अगर आप कोई अच्छा VPN इस्तेमाल कर रहे हैं, तो आम तौर पर आपको पासथ्रू सेटिंग की बिल्कुल भी चिंता करने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि राऊटर इसे अपने आप हैंडल कर लेगा।

VPN पासथ्रू बनाम VPN राऊटर

इन दोनों में अक्सर उलझन होती है, लेकिन दोनों के मकसद बहुत अलग-अलग हैं:

  • VPN राऊटर खुद से उन सभी डिवाइस के लिए ट्रैफिक को एन्क्रिप्ट और रूट करता है, जो उससे कनेक्ट हैं। 
  • VPN पासथ्रू आपके नेटवर्क के किसी एक डिवाइस को बाहरी VPN से कनेक्ट होने देता है।

क्या VPN को पासथ्रू की ज़रूरत होती है?

ज़्यादातर मामलों में, जवाब है नहीं। VPN प्रोटोकॉल NAT को अपने आप हैंडल करने के लिए बनाए गए हैं। WireGuard(नई विंडो), OpenVPN(नई विंडो) और IKEv2(नई विंडो) जैसे प्रोटोकॉल इस तरह डिज़ाइन किए गए हैं कि राऊटर बिना किसी मैनुअल सेटअप या खास नियमों के कनेक्शन ट्रैक कर सकें और डाटा सही डिवाइस तक भेज सकें।

Proton VPN सिर्फ सुरक्षित प्रोटोकॉल पर निर्भर करता है, इसलिए ये डिफॉल्ट रूप से स्टैंडर्ड राऊटर संरचनाओं के साथ कंपैटिबल है।

  • कोई मैनुअल संरचना नहीं: कनेक्ट होने के लिए आपको अपने राऊटर के फर्मवेयर की कोई एडवांस सेटिंग बदलने की ज़रूरत नहीं है।
  • ऑटोमैटिक कंपैटिबिलिटी: Proton VPN लगभग सभी घरेलू और ऑफिस नेटवर्किंग उपकरणों के साथ बिना किसी अतिरिक्त सेटअप के काम करता है।
  • बेहतर सुरक्षा: पुराने पासथ्रू तरीकों से बचकर, आप PPTP जैसे लेगेसी प्रोटोकॉल से जुड़ी सुरक्षा कमजोरियों से भी बच जाते हैं।

जब तक आप बेहद पुराना हार्डवेयर या बेहद पाबंदी लगाने वाला कॉर्पोरेट फायरवॉल इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, आप पासथ्रू सेटिंग में कभी बदलाव किए बिना Proton VPN से कनेक्ट कर सकते हैं।

क्या आपको VPN पासथ्रू की ज़रूरत है?

आपको VPN पासथ्रू के बारे में तभी सोचने की ज़रूरत पड़ सकती है, अगर:

  • आप PPTP या L2TP जैसे लेगेसी VPN प्रोटोकॉल इस्तेमाल कर रहे हैं
  • आप पुराने नेटवर्किंग उपकरणों पर निर्भर हैं
  • आप पुराने सॉफ्टवेयर वाले स्पेशलाइज़्ड या इंडस्ट्रियल सिस्टम संभालते हैं

वरना, Proton VPN जैसे VPN क्लाइंट ये संगति डिफॉल्ट रूप से हैंडल कर लेते हैं।

क्या VPN पासथ्रू में सुरक्षा जोखिम होते हैं?

ज़्यादातर सुरक्षा चिंताओं की वजह ये है कि VPN पासथ्रू पुराने, कम सुरक्षित प्रोटोकॉल को स्टैंडर्ड राऊटर सुरक्षा को पार करने में मदद के लिए डिज़ाइन किया गया है।

  • कमजोर प्रोटोकॉल पर निर्भरता: VPN पासथ्रू सबसे ज़्यादा PPTP जैसे लेगेसी प्रोटोकॉल के लिए इस्तेमाल होता है, जिन्हें अब सुरक्षित नहीं माना जाता और जिनका साइबर अटैक के ज़रिए आसानी से फायदा उठाया जा सकता है।
  • फायरवॉल के ब्लाइंड स्पॉट: आपका फायरवॉल कनेक्शन में आने-जाने वाले डाटा की जांच न कर पाए। अगर VPN प्रोटोकॉल खुद कमजोर है, तो इससे दुर्भावनापूर्ण ट्रैफिक के लिए ऐसा रास्ता बनता है, जिससे वे पकड़े जाए बिना आपके नेटवर्क में दाखिल हो सकते हैं।
  • बढ़ा हुआ अटैक सरफेस: VPN पासथ्रू सक्षम करने के लिए अक्सर आपके राऊटर पे कुछ खास कम्युनिकेशन पोर्ट खोलने पड़ते हैं। हर खुला पोर्ट एक संभावित एंट्री पॉइंट है, जिसे हमलावर स्कैन कर सकते हैं और उसका फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं।

सुरक्षित VPN पासथ्रू सेटअप के लिए बेहतरीन प्रथाएं

ज़्यादातर बिज़नेस और लोगों के लिए, सबसे अच्छी सुरक्षा रणनीति ये है कि VPN पासथ्रू की ज़रूरत ही पड़ने न दें। अगर आपको इसे इस्तेमाल करना ही है, तो अपना नेटवर्क सुरक्षित रखने के लिए ये कदम अपनाएं:

  • अपडेटेड प्रोटोकॉल को तरजीह दें: ऐसे VPN इस्तेमाल करें जो WireGuard या OpenVPN की सहायता करते हैं, जो Proton VPN के लिए स्टैंडर्ड हैं। ये राऊटर और NAT के साथ बिना VPN पासथ्रू के काम करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
  • जो इस्तेमाल नहीं करते, उसे अक्षम करें: अगर आपके राऊटर पे VPN पासथ्रू डिफॉल्ट रूप से सक्षम है, लेकिन आप Proton VPN जैसी सेवा इस्तेमाल करते हैं, तो उसे बंद कर दें। राऊटर पे चालू खासियतों की संख्या घटाने से आपका अटैक सरफेस छोटा हो जाता है।
  • हार्डवेयर को अपडेट रखें: सुनिश्चित करें कि आपका राऊटर फर्मवेयर अपडेटेड हो। निर्माता अक्सर ऐसे अपडेट जारी करते हैं जो राऊटर के एन्क्रिप्ट किए गए ट्रैफिक और पोर्ट मैनेजमेंट को हैंडल करने से जुड़ी कमजोरियों को ठीक करते हैं।
  • आखिर में, VPN पासथ्रू को लेगेसी सिस्टम के लिए आखिरी विकल्प समझें। अगर आपका इंफ्रास्ट्रक्चर इजाजत देता है, तो किसी आधुनिक VPN सेटअप पे शिफ्ट होना इन जोखिमों को खत्म करने का सबसे प्रभावी तरीका है।

अंततः, VPN पासथ्रू को लेगेसी सिस्टम के लिए आख़िरी विकल्प की तरह देखना चाहिए। अगर आपका इंफ्रास्ट्रक्चर इजाज़त देता है, तो किसी मॉडर्न VPN सेटअप पे शिफ्ट होना इन जोखिमों को खत्म करने का सबसे असरदार तरीका है।

निष्कर्ष

VPN पासथ्रू पुराने VPN प्रोटोकॉल और नए नेटवर्क के बीच संगति समस्या का हल है। आज ये ज़्यादातर मामलों में ज़रूरी नहीं रह गया है।

ज़्यादातर VPN प्रोटोकॉल, जैसे कि Proton VPN द्वारा इस्तेमाल किए गए, NAT के साथ बेहतरीन तरीके से काम करने के लिए बनाए गए हैं। इसी वजह से VPN पासथ्रू ऐसी चीज़ है, जिसे कॉन्फ़िगर करने की ज़रूरत ज़्यादातर बिज़नेस को कभी नहीं पड़ेगी। अगर आप अब भी पासथ्रू पर निर्भर हैं, तो ये इस बात का संकेत हो सकता है कि आपके VPN सेटअप या नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर को अपडेट करने की ज़रूरत है।