अमेरिका की फेडरल कोर्ट में दायर हुए एक क्लास-एक्शन मुकदमे(नई विंडो) में आरोप लगाया गया है कि WhatsApp का शुरु-से-अंत तक एन्क्रिप्शन (E2EE) का वादा भ्रामक है। शिकायत में दावा किया गया है कि Meta के कर्मचारी इंटरनल सिस्टम के ज़रिए WhatsApp संदेशों की सामग्री तक एक्सेस कर सकते हैं, इसके बावजूद कि बार-बार ये आश्वासन दिया गया कि “not even WhatsApp(नई विंडो)” भी उपयोगकर्ताओं के संदेश नहीं पढ़ सकता।

पूरा मुकदमा यहां पढ़ें:

23 जनवरी को कैलिफोर्निया के नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट में दायर किया गया ये मुकदमा बड़े-बड़े आरोप लगाता है।

शिकायत के मुताबिक, बेनाम व्हिसलब्लोअर्स का आरोप है कि Meta का स्टाफ एक इंटरनल टास्किंग सिस्टम के ज़रिए WhatsApp संदेशों तक एक्सेस का अनुरोध कर सकता है। शिकायत के मुताबिक, मंज़ूरी मिलने के बाद संदेशों को लगभग रीयल टाइम में और पिछले रिकॉर्ड से, बिना किसी अतिरिक्त डीक्रिप्शन स्टेप के देखा जा सकता है।

मुकदमे में दलील दी गई है कि ये कथित एक्सेस WhatsApp के सार्वजनिक बयानों, मार्केटिंग सामग्री और विधायकों को दी गई गवाही के विपरीत है, जिनमें ये कहा गया था कि संदेशों की सामग्री सिर्फ भेजने वाले और प्राप्तकर्ता ही एक्सेस कर सकते हैं।

Meta इन दावों से अस्वीकार करता है। Bloomberg को दिए गए एक बयान में,(नई विंडो) Meta के प्रवक्ता Andy Stone ने कहा: “लोगों के WhatsApp संदेश एन्क्रिप्ट नहीं किए गए हैं, इस तरह का कोई भी दावा पूरी तरह झूठा और बेतुका है। WhatsApp एक दशक से Signal प्रोटोकॉल के ज़रिए शुरु-से-अंत तक एन्क्रिप्ट किया जा रहा है। ये मुकदमा एक घटिया काल्पनिक किस्सा है।”

आरोपों और साबित तथ्यों में फर्क करना ज़रूरी है। शिकायत में कोई तकनीकी सबूत शामिल नहीं है जो किसी क्रिप्टोग्राफिक बैकडोर को दिखाए या किसी और तरीके से साबित करे कि WhatsApp के एन्क्रिप्शन के साथ छेड़छाड़ की गई है। इस स्टेज पे दावे अब भी साबित नहीं हुए हैं।

पिछली रिपोर्टिंग में दिखाया गया है कि WhatsApp उन संदेशों तक एक्सेस कर सकता है जिन्हें उपयोगकर्ता मैन्युअल रूप से दुरुपयोग के लिए रिपोर्ट करते हैं, और ये भी कि वो बड़ी मात्रा में मेटाडाटा इकट्ठा करता है(नई विंडो)। हालांकि, वो रिपोर्टिंग संदेशों की सामग्री तक नियमित या सार्वभौमिक एक्सेस के दावों की पुष्टि नहीं करती।

फिर भी, ये केस एक जाना-पहचाना और असहज सवाल उठाता है: जब एक प्लैटफॉर्म closed-source होता है और किसी एक कंपनी के कंट्रोल में होता है, तो क्या उपयोगकर्ता आखिर में ऐसे आश्वासनों पे भरोसा कर सकते हैं जिनकी वो अपने स्तर पे सत्यापन नहीं कर सकते?

शुरु-से-अंत तक एन्क्रिप्शन एक तकनीकी गारंटी है कि संदेशों की सामग्री सिर्फ भेजने वाले और इच्छित प्राप्तकर्ता ही पढ़ सकते हैं, क्योंकि संदेश डीक्रिप्ट करने के लिए ज़रूरी कीज़ सिर्फ उपयोगकर्ताओं के डिवाइस पे मौजूद रहती हैं और किसी और कभी उन तक एक्सेस नहीं होती।

जैसे-जैसे ये केस आगे बढ़ेगा, ये निजता के एक बुनियादी सिद्धांत को और मज़बूत करेगा: एन्क्रिप्शन सत्यापन योग्य होना चाहिए, भरोसे का मामला नहीं।