एक नया मुक़दमा(नई विंडो) WhatsApp की सुरक्षा को फिर से चर्चा में ले आया है। ऐप के पूर्व सुरक्षा प्रमुख अताउल्लाह बेग का आरोप है कि Meta ने गंभीर कमियों को नज़रअंदाज़ किया, जिनकी वजह से सैकड़ों कर्मचारी संवेदनशील उपयोगकर्ता डाटा तक एक्सेस कर सकते हैं, और बड़े पैमाने पर हो रहे खाता हैक को रोकने में नाकाम रहा। Meta ने इन दावों को अस्वीकार किया है, लेकिन WhatsApp के 3 अरब उपयोगकर्ताओं(नई विंडो) के लिए सवाल वही है: क्या WhatsApp सचमुच इस्तेमाल करने के लिए सुरक्षित है?

क्या WhatsApp निजी चैट के लिए सुरक्षित है?

मुक़दमे के दावों के बावजूद, WhatsApp का शुरु-से-अंत तक एन्क्रिप्शन (E2EE) बरक़रार है। कुछ भी ऐसा नहीं है जो बताए कि WhatsApp का एन्क्रिप्शन प्रोटोकॉल टूटा है या Meta आपकी बातचीत की सामग्री पढ़ सकता है। इसका मतलब है कि आपके मैसेज, फ़ोटो और वॉयस कॉल अब भी बाहरी एक्सेस से सुरक्षित हैं, जिसमें Meta खुद भी शामिल है।

हालांकि, WhatsApp आपका मेटाडाटा (आप किससे बात कर रहे हैं, कब, वगैरह) पढ़ सकता है और इस बात के हिसाब से कि आप कहां रहते हैं, वो डाटा Meta के साथ शेयर करता है। इसलिए इसकी सुरक्षा इस बात पे टिकी है कि आप कितनी जानकारी निजी रखना चाहते हैं।

WhatsApp की निजता को लेकर Meta पर मुक़दमा क्यों चल रहा है?

अताउल्लाह बेग, जिन्होंने 2021 से 2025 के बीच WhatsApp की सुरक्षा टीम संभाली, कहते हैं कि ऐप Meta के दावों जितना निजी है ही नहीं। अपने मुक़दमे में उनका आरोप है कि लगभग 1,500 कर्मचारियों के पास संवेदनशील उपयोगकर्ता जानकारी, जिसमें स्थान, प्रोफ़ाइल फ़ोटो, ग्रुप मेंबरशिप और कॉन्टैक्ट लिस्ट शामिल है, तक एक्सेस है।

अगर ये दावे सच हैं, तो इनसे शुरु-से-अंत तक एन्क्रिप्शन पर WhatsApp का रुख(नई विंडो) साफ़ हो जाता है: आपके संदेश निजी हैं, लेकिन आपका स्थान, प्रोफ़ाइल फ़ोटो, ग्रुप मेंबरशिप और कॉन्टैक्ट लिस्ट तो सबके लिए खुली हैं। इस तरह की बेलगाम एक्सेस इनसाइडर ख़तरों और डाटा लीक का रास्ता खोलती है, जिनमें संवेदनशील जानकारी चुराई जा कर डार्क वेब पे बेची जा सकती है।

पूर्व सुरक्षा प्रमुख का तर्क है कि इतनी एक्सेस किसी बाध्यकारी अमेरिकी सरकारी आदेश का उल्लंघन भी कर सकती है, जिसके तहत Cambridge Analytica घोटाले के बाद Meta (तब Facebook) को 2020 में $5 अरब का रिकॉर्ड जुर्माना(नई विंडो) भरना पड़ा था।

वो ये भी आरोप लगाते हैं कि कंपनी ने रोज़ होने वाले 1,00,000 से ज़्यादा खाता हाईजैक को नज़रअंदाज़ किया और उनके सुझाए समाधानों को ठुकरा दिया। मुक़दमे के मुताबिक़, जब बेग ने Mark Zuckerberg समेत वरिष्ठ नेतृत्व के सामने ये चिंताएं रखीं, तो Meta ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया।

Meta ने बेग के दावों को अस्वीकार किया है और उनकी छंटनी को ख़राब प्रदर्शन पर मंसूब बताया है। इन आरोपों ने राजनीतिक ध्यान भी खींचा है, सीनेटर Zuckerberg से(नई विंडो) WhatsApp की सुरक्षा प्रथाओं के बारे में जवाब मांग रहे हैं।

बेग का मुक़दमा तब आया है, जब Meta के छह मौजूदा और पूर्व कर्मचारियों के एक ग्रुप(नई विंडो) ने कुछ दिन पहले ही दावा किया था कि कंपनी ने अपने वर्चुअल रियलिटी प्लेटफ़ॉर्म पे ग्रूमिंग, उत्पीड़न और हिंसा के शिकार हो रहे बच्चों के सबूतों को छुपाया। Meta ने वो दावे भी अस्वीकार किए हैं।

WhatsApp की सुरक्षा और निजता के जोखिम क्या हैं?

उपयोगकर्ता डाटा को लेकर WhatsApp की कार्रवाई चर्चा में होने के बीच, ये रहे वो सुरक्षा और निजता जोखिम जिनका आपको इस ऐप का इस्तेमाल करते वक़्त सामना हो सकता है:

मालवेयर और स्पायवेयर

दुर्भावनापूर्ण ऐप या लिंक आपके फ़ोन पे स्पायवेयर इंस्टॉल कर सकते हैं, जिससे हमलावर संदेश या कोड बीच में रोक सकते हैं। एक उदाहरण है PixPirate(नई विंडो), एक Android मालवेयर जो पहली बार ब्राज़ील में देखा गया, जहां उसने देश के इंस्टेंट पेमेंट सिस्टम Pix को निशाना बनाया। तब से उसे भारत, मैक्सिको और इटली में देखा गया है। इसका मक़सद बैंकिंग प्रमाण चुराना, दो-फैक्टर सत्यापन (2FA) कोड बीच में पकड़ना, पीड़ित के खाते से बिना अनुमति Pix ट्रांसफ़र शुरू करना और उसे अनइंस्टॉल करने या Google Play Protect को अक्षम करने की कोशिशों को रोकना है।

हमलावरों ने PixPirate को फैलाने के लिए WhatsApp का इस्तेमाल किया है। अगर मालवेयर को डिवाइस पर WhatsApp नहीं मिलता(नई विंडो), तो वो उसे डाउनलोड करता है ताकि कॉन्टैक्ट्स को और ज़्यादा दुर्भावनापूर्ण लिंक भेज सके।

ज़ीरो-क्लिक एक्सप्लॉइट

2025 में शोधकर्ताओं को एक ज़ीरो-क्लिक अटैक मिला, जिससे हैकर्स बिना कुछ क्लिक किए WhatsApp के ज़रिए iPhone और Mac में घुस सकते थे(नई विंडो)। इस एक्सप्लॉइट में दो कमियों को जोड़ा गया था: एक macOS और iOS के इमेज प्रोसेस करने के तरीक़े में, और दूसरी WhatsApp की डिवाइस लिंकिंग खासियत में।

साइबर अपराधी Apple उपयोगकर्ताओं को WhatsApp संदेशों के ज़रिए स्पायवेयर भेज सकते थे और उनके डिवाइस से संदेशों समेत डाटा चुरा सकते थे। Meta ने कहा कि 200 से कम उपयोगकर्ता प्रभावित हुए, और Apple और WhatsApp दोनों ने तब से इन कमज़ोरियों को पैच कर दिया है।

इसी साल एक अलग ज़ीरो-क्लिक कमज़ोरी ने Samsung डिवाइसों को प्रभावित किया (CVE-2025-21042(नई विंडो))। हमलावर एक दुर्भावनापूर्ण इमेज फ़ाइल भेज कर Galaxy फ़ोन के साथ छेड़छाड़ कर सकते थे, और इसके लिए किसी इंटरैक्शन की ज़रूरत नहीं थी। ये एक्सप्लॉइट टारगेटेड स्पायवेयर अभियानों में इस्तेमाल होता रहा, जब तक Samsung ने अपने अप्रैल 2025 के सुरक्षा अपडेट में इस समस्या को पैच नहीं किया।

SIM स्वैपिंग और सत्यापन कोड घोटाले

हमलावर आपके मोबाइल ऑपरेटर को बहला-फुसला कर आपका फ़ोन नंबर अपने काबू की नई SIM कार्ड पे ट्रांसफ़र करवा सकते हैं। फिर वो आपको बहला कर वो छह अंकों का कोड बाहर निकाल सकते हैं, जो WhatsApp नया डिवाइस सेट करते वक़्त एसएमएस से भेजता है। अगर आप वो कोड दे दें, तो बुरे इरादों वाले लोग आपका खाता हाईजैक कर सकते हैं, आपको बाहर कर सकते हैं, आपकी पहचान चुरा सकते हैं और आपकी प्रोफ़ाइल का इस्तेमाल कर के आपके कॉन्टैक्ट्स को ठग सकते हैं। लंदन के Southwark की पुलिस ने 2021 में ऐसे हमलों की भारी बढ़ोतरी(नई विंडो) की रिपोर्ट की थी, और लोगों को चेताया था कि अपने WhatsApp कोड कभी शेयर न करें।

उजागर हुआ मेटाडाटा

चैट शुरु-से-अंत तक एन्क्रिप्ट हो सकती हैं, लेकिन WhatsApp (और इसकी मुख्य कंपनी Meta) अब भी मेटाडाटा इकट्ठा करता है, जैसे आप किससे बात करते हैं, कितनी बार, आपकी डिवाइस की जानकारी और स्थान। मेटाडाटा का इस्तेमाल सीधे तौर पर आपकी पहचान के लिए नहीं किया जा सकता, लेकिन उसे दूसरी जानकारी के साथ मिला कर आपकी दोबारा पहचान(नई विंडो) की जा सकती है। और क्योंकि Meta अमेरिका में स्थित है, वो आपके बारे में जानी हर चीज़ बिना बताए अमेरिकी सरकार के साथ शेयर कर सकता है।

WhatsApp के 3.5 अरब फ़ोन नंबरों का बड़े पैमाने पर उजागर होना

2025 में स्वतंत्र ऑस्ट्रियाई शोधकर्ताओं के एक ग्रुप ने WhatsApp में एक निजता कमज़ोरी खोजी(नई विंडो), जिसने उन्हें आसानी से दोहराए जा सकने वाले फ़ोन एन्यूमरेशन तरीक़े से 3.5 अरब फ़ोन नंबर निकालने दिए, साथ में प्रोफ़ाइल फ़ोटो, डिवाइस की जानकारी, टाइमस्टैम्प, “about” टेक्स्ट और बिज़नेस जानकारी। वही कमज़ोरी पहली बार 2017 में रिपोर्ट हुई थी, लेकिन Meta ने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया। ज़रूरी बात ये है कि इस ख़ास तरीक़े का इस्तेमाल करते हुए किसी पुष्ट WhatsApp डाटा लीक की सार्वजनिक रूप से रिपोर्ट नहीं हुई है।

हालांकि आपका फ़ोन नंबर और मेटाडाटा आपकी सीधे पहचान नहीं करते, उन्हें दूसरे डाटा से मिला कर पता लगाया जा सकता है कि आप कौन हैं। हो सकता है आप सोशल प्लेटफ़ॉर्म पर एक ही प्रोफ़ाइल फ़ोटो इस्तेमाल करते हों, या आप पहले के डाटा लीक का हिस्सा रहे हों जिनमें आपके ईमेल, यूज़रनेम या स्थान उजागर हुए थे, जिन सबको आपके WhatsApp मेटाडाटा से जोड़ा जा सकता है।

शोधकर्ताओं ने WhatsApp के शुरु-से-अंत तक एन्क्रिप्शन के लिए इस्तेमाल होने वाली सार्वजनिक चाबियां भी हासिल कीं और गंभीर समस्याएं पाईं, जिनमें एन्क्रिप्शन चाबियों का अलग-अलग खातों में सैकड़ों बार दोबारा इस्तेमाल और वन-टाइम प्री-कीज़ का बार-बार दिखना शामिल है, हालांकि उन्हें हर सत्र के लिए नई बनाया जाना तय है।

ये सुरक्षा समस्याएं बताती हैं कि टूटे हुए एन्क्रिप्शन वाले ग़ैर-आधिकारिक या धोखेबाज़ WhatsApp क्लाइंट इस्तेमाल किए गए। अगर आप ये संशोधित ऐप इस्तेमाल करते हैं, तो आपके संदेश इंटरसेप्शन, डीक्रिप्शन या खाता नक़ल के प्रति कमज़ोर हो सकते हैं।

Meta ने कहा कि उसने एन्यूमरेशन की समस्या ठीक कर दी है, उजागर हुए डाटा की संवेदनशीलता को कम बताया, और सार्वजनिक-चाबी वाली समस्याओं या इस बात पर कोई बात नहीं की कि उसे इस बड़ी कमी के बारे में लगभग एक दशक पहले ही चेतावनी दी जा चुकी थी।

सभी Meta प्लेटफ़ॉर्म पर टारगेटेड विज्ञापन

WhatsApp कहता है कि वो विज्ञापनों के लिए संदेशों की सामग्री इस्तेमाल नहीं करता(नई विंडो), लेकिन वो दूसरा डाटा ज़रूर इस्तेमाल करता है, जैसे खाता जानकारी (देश कोड, उम्र), डिवाइस जानकारी (भाषा, स्थान) और Status और Channels में गतिविधि (आप क्या देखते हैं, फ़ॉलो करते हैं या क्लिक करते हैं)। चूंकि WhatsApp Meta का हिस्सा है, ये डाटा Facebook और Instagram पर शेयर किया जा सकता है, हालांकि GDPR की बदौलत ये डाटा शेयरिंग यूरोप में सीमित है।

तब से, जब WhatsApp ने 2021 में अपनी निजता नीति बदली, वो आपके व्यापारों के साथ हुए भुगतान और लेन-देन का डाटा भी Meta (तब Facebook) के साथ शेयर करता रहा है। अगर आप WhatsApp को Meta के Accounts Center से कनेक्ट करते हैं, तो आपकी विज्ञापन पसंद एकजुट हो जाती हैं, यानी WhatsApp में की गई हरकतें कहीं और दिखने वाले विज्ञापनों पर असर डाल सकती हैं। और Meta AI से चलने वाली नई खासियतों के साथ, प्लेटफ़ॉर्मों के बीच डाटा शेयरिंग से और भी चिंताएं पैदा होती हैं।

Meta AI प्रशिक्षण

Meta AI WhatsApp, Facebook और Instagram में अंदर डाला गया है, जिससे इस बात को लेकर चिंताएं बढ़ती हैं कि डाटा को कैसे प्रोसेस किया जाता है, AI प्रशिक्षण के लिए इस्तेमाल किया जाता है, और इन प्लेटफ़ॉर्मों के बीच शेयर किया जाता है।

WhatsApp पे Meta कहता है कि Meta AI आपकी निजी, शुरु-से-अंत तक एन्क्रिप्ट चैट तक एक्सेस नहीं करता। हालांकि, आपके Meta AI को दिए गए प्रॉम्प्ट और सुझाव स्टोर किए जा सकते हैं और उसके मॉडल बेहतर करने के लिए इस्तेमाल हो सकते हैं। WhatsApp एक बातचीत-सारांश खासियत भी देता है, जो “प्राइवेट प्रोसेसिंग”(नई विंडो) पर टिकी है, जिसके बारे में Meta का दावा है कि वो कंपनी या किसी और के सारांश पढ़ने से रोकती है।

इन भरोसों के बावजूद, ये चिंता बनी रहती है कि लोगों के अपने डाटा पर असल में कितना काबू है। मसलन, Facebook उपयोगकर्ताओं ने बताया कि Meta AI ने ऐसी सेटिंग सक्षम कर दी थी जिससे वो उनकी सहमति के बिना उनके कैमरा रोल से बिना प्रकाशित फ़ोटो स्कैन कर सकता था

WhatsApp पे सुरक्षित कैसे रहें

WhatsApp इस्तेमाल करते वक़्त अपनी निजता और सुरक्षा बेहतर करने के लिए आप ये कर सकते हैं:

  • अपना शुरु-से-अंत तक एन्क्रिप्शन सही तरह काम करे, इसके लिए हमेशा App Store या Google Play से आधिकारिक WhatsApp ऐप इस्तेमाल करें।
  • अपने फ़ोन पे सुरक्षा सूचनाएं चालू करें ताकि जब कोई कॉन्टैक्ट WhatsApp दोबारा इंस्टॉल करे, फ़ोन बदले, या कोई लिंक किया डिवाइस जोड़े या हटाए, तो आपको अलर्ट मिले।
  • एक पासकी बनाएं ताकि आप अपने चेहरे, फिंगरप्रिंट या स्क्रीन लॉक से WhatsApp में लॉगइन कर सकें। इससे कोई और आपका एसएमएस कोड हासिल कर ले तब भी लॉगइन नहीं कर पाता।
  • अपना खाता सत्यापित करने या रिकवर करने के लिए एक ईमेल पता जोड़ें, अगर आप बाहर कर दिए जाएं। पक्का करें कि आपका ईमेल खुद मज़बूत पासवर्ड और दो-फैक्टर सत्यापन से सुरक्षित हो।
  • अपनी चैट को iCloud या Google Drive में सुरक्षित रखने के लिए शुरु-से-अंत तक एन्क्रिप्ट बैकअप सक्षम करें, ताकि Apple, Google या Meta भी उन्हें न पढ़ सके। WhatsApp आपको क्लाउड स्टोरेज प्रोवाइडर चुनने नहीं देता। वरना आपको चैट बैकअप पूरी तरह बंद कर देने चाहिए।
  • अपना छह अंकों का सत्यापन कोड किसी के साथ कभी शेयर न करें। WhatsApp और Meta उसे कभी नहीं मांगेंगे।
  • अपने मोबाइल ऑपरेटर से कहें कि वो आपका नंबर दूसरी SIM कार्ड पे जाने से पहले एक PIN या पासफ्रेज़ मांगे। इससे SIM स्वैपिंग काफ़ी मुश्किल हो जाती है।
  • WhatsApp सिर्फ़ Google Play या App Store से डाउनलोड करें और उसे, अपने मोबाइल और डेस्कटॉप ऑपरेटिंग सिस्टम समेत, नए वर्ज़न पर अपडेट रखें।
  • लिंक पर क्लिक न करें या अनजान या शक वाले WhatsApp कॉन्टैक्ट्स से ऐप इंस्टॉल न करें। अगर आपको किसी कॉन्टैक्ट पर शक हो, तो किसी दूसरे तरीक़े से उससे संपर्क कर के उसकी पहचान की पुष्टि करें।
  • अपनी (नई विंडो)WhatsApp निजता सेटिंग(नई विंडो) सख़्त करें, ये सीमित कर के कि कौन आपको ग्रुप में जोड़ सकता है और आपकी प्रोफ़ाइल पिक्चर, आख़िरी बार ऑनलाइन और ऑनलाइन स्टेटस, about सेक्शन और प्रोफ़ाइल पे लिंक देख सकता है।
  • आप WhatsApp पे Meta AI को पूरी तरह बंद नहीं कर सकते, लेकिन आप क़दम उठा सकते हैं ताकि वो आपकी गतिविधि से ज़्यादा न सीखे, और आपके संदेश AI प्रशिक्षण डाटा में न जाएं।

ज़्यादा निजी इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप चुनें

हालांकि आप अपनी सुरक्षा बेहतर करने और दूसरे WhatsApp उपयोगकर्ताओं को कम दिखाने के क़दम उठा सकते हैं, इससे ये हक़ीक़त नहीं बदलती कि Meta अब भी कमाई के लिए मेटाडाटा जैसी उपयोगकर्ता जानकारी इकट्ठा करने पे निर्भर है। अगर हाल के व्हिसलब्लोअर दावे सही हैं, तो वो एक्सेस कंपनी के क़बूल करने से भी ज़्यादा बड़ी हो सकती है। Meta के निजता उल्लंघनों के इतिहास को देखते हुए कुछ शक करना जायज़ है।

अगर आपको इस स्तर के काबू की चिंता है, तो WhatsApp के एक ज़्यादा निजी विकल्प पर ग़ौर करें, जो काफ़ी कम डाटा इकट्ठा करता है और किसी बड़ी टेक कंपनी से नहीं जुड़ा है जिस पर रेगुलेटरों ने उसके pay-or-consent विज्ञापन मॉडल के लिए जुर्माना लगाया हो।