प्रॉक्सी कोई भी ऐसा सर्वर है जो आपके डिवाइस और किसी बड़े नेटवर्क, जैसे इंटरनेट, के बीच होता है। वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क(नई विंडो) (VPN) सर्वर एक खास तरह का प्रॉक्सी है, लेकिन प्रॉक्सी की और भी कई किस्में मौजूद हैं। गलत (और इसलिए भ्रमित करने वाला) होने के बावजूद, अक्सर VPN की तुलना प्रॉक्सी से की जाती है.

VPN कैसे काम करता है, इसके बारे में और जानें(नई विंडो)

इस लेख में हम देखते हैं कि प्रॉक्सी क्या है और उपलब्ध अलग-अलग तरह के प्रॉक्सी का ओवरव्यू देते हैं। हम प्रॉक्सी बनाम VPN के बीच के अंतर भी देखेंगे।

प्रॉक्सी क्या है?

प्रॉक्सी एक सर्वर है जो आपके डिवाइस और इंटरनेट के बीच होता है। इसका मतलब है कि आपका इंटरनेट ट्रैफिक प्रॉक्सी सर्वर से गुजरता है और उसके IP पते(नई विंडो) और फिजिकल स्थान का इस्तेमाल करके इंटरनेट में दर्ज होता है। इसलिए, हर प्रॉक्सी:

  • इंटरनेट पे आपकी विज़िट की गई वेबसाइटों (और गेम सर्वर, BitTorrent पीयर्स, ईमेल सर्वर जैसे दूसरे इंटरनेट रिसोर्स) से आपका असली IP पता छिपा दें
  • आपकी असली भौगोलिक स्थान को “स्पूफ” करने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं

आपके कंप्यूटर और प्रॉक्सी सर्वर के बीच का कनेक्शन हमेशा एन्क्रिप्शन से सुरक्षित नहीं होता, लेकिन अक्सर होता है। अगर कनेक्शन एन्क्रिप्ट किया गया है:

  • आपका इंटरनेट सेवा प्रदाता(नई विंडो) (ISP) ये नहीं देख सकता कि आप इंटरनेट पे क्या करते हैं। ये सिर्फ ये देख सकता है कि आपने किसी प्रॉक्सी सर्वर से कनेक्ट किया है।
  • ये आपके इंटरनेट ट्रैफिक की सामग्री (उदाहरण के लिए, वो फ़ाइलें जिन्हें आप डाउनलोड कर रहे हैं) भी नहीं देख सकता।

सबसे ज़रूरी बात, चूंकि आपका ट्रैफिक प्रॉक्सी सर्वर से गुजरता है और उसे वो एन्क्रिप्ट और डीक्रिप्ट करता है, जो भी प्रॉक्सी सर्वर चलाता है, वो आपकी इंटरनेट गतिविधि पर नज़र रख सकता है। इसीलिए इंटरनेट का एक्सेस करने के लिए सिर्फ किसी भरोसेमंद VPN(नई विंडो) का इस्तेमाल करना बेहद ज़रूरी है।

तकनीकी तौर पे, ये एक फॉरवर्ड प्रॉक्सी के बारे में बताता है जो आपके कंप्यूटर और इंटरनेट के बीच होता है। वहीं दूसरी तरफ, रिवर्स प्रॉक्सी इंटरनेट और सर्वरों के एक छोटे ग्रुप के बीच गेटवे का काम करता है। रिवर्स प्रॉक्सी का क्लासिक उदाहरण है ऑफिस इंट्रानेट, जिसे बाहर से सिर्फ एक (रिवर्स प्रॉक्सी) सर्वर के ज़रिए एक्सेस किया जा सकता है।

इस लेख में आगे चर्चा की गई सारी प्रॉक्सी फॉरवर्ड प्रॉक्सी हैं।

प्रॉक्सी सर्वर और VPN में अंतर

अगर आप समझते हैं कि VPN कैसे काम करते हैं, तो ये सब बेहद जाना-पहचाना लग सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि VPN सर्वर एन्क्रिप्ट किए गए फॉरवर्ड प्रॉक्सी की एक किस्म है। VPN और ज़्यादातर दूसरी तरह के एन्क्रिप्टेड प्रॉक्सी सेटअप के बीच मुख्य अंतर ये हैं:

  • VPN आपका पूरा इंटरनेट कनेक्शन सुरक्षित रखता है, जबकि ज़्यादातर प्रॉक्सी को हर ऐप के हिसाब से कॉन्फ़िगर करना पड़ता है (उदाहरण के लिए, आपका ब्राउज़र या BitTorrent(नई विंडो) क्लाइंट)।
  • VPN बेहद सुरक्षित VPN प्रोटोकॉल(नई विंडो) इस्तेमाल करते हैं, जैसे OpenVPN और WireGuard®, जो आपके डाटा के लिए अतिरिक्त सुरक्षा की परतें देते हैं, न कि सिर्फ वो साधारण HTTPS जो ज़्यादातर प्रॉक्सी कनेक्शन सुरक्षित करने के लिए इस्तेमाल होता है।
  • VPN प्रोवाइडर व्यावसायिक संस्थाएं हैं, जिनकी अक्सर जनता की ओर से खूब जांच-परख होती है। Proton जैसी VPN कंपनियां अपने कम्युनिटी के लिए बड़ा और बेहद सुरक्षित नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने और एडवांस सुविधाऐं विकसित करने में खूब वक्त और पैसा खर्च करती हैं।

VPN कैसे काम करते हैं, इसके बारे में और जानें(नई विंडो)

जैसा कि आगे बताया गया है, व्यावसायिक (गैर-VPN) प्रॉक्सी सेवाएं मौजूद हैं, लेकिन साधारण HTTP और SOCKS प्रॉक्सी सेटअप पर VPN तकनीक के फायदों की वजह से ये सेक्टर VPN इंडस्ट्री के मुकाबले बहुत कम विकसित है (और इसलिए जांच के लिए भी बहुत कम खुला है)।

प्रॉक्सी के प्रकार

प्रॉक्सी सर्वर कई अलग-अलग तरह के होते हैं। जब लोग बिना किसी अतिरिक्त संदर्भ के सिर्फ प्रॉक्सी या प्रॉक्सी सर्वर कहते हैं, तो उनका मतलब आम तौर पे SOCKS या HTTP प्रॉक्सी होता है।

SOCKS प्रॉक्सी

SOCKS एक लो-लेवल इंटरनेट प्रोटोकॉल है जो इंटरनेट ट्रैफिक की व्याख्या नहीं करता। यानी ये सिर्फ सारा ट्रैफिक आगे बढ़ा देता है, बिना समझने की कोशिश किए कि वो क्या है। इसीलिए ये सभी तरह का इंटरनेट ट्रैफिक फॉरवर्ड करने के लिए काम का है, जिसमें ऐसे प्रोटोकॉल इस्तेमाल करने वाला ट्रैफिक भी शामिल है, जैसे:

  • फ़ाइल ट्रांसफ़र प्रोटोकॉल (FTP)
  • POP3 और SMTP (ईमेल भेजने और पाने के लिए इस्तेमाल होते हैं)
  • इंटरनेट रिले चैट (IRC)
  • BitTorrent

खासकर BitTorrent ट्रैफिक को प्रॉक्सी करने की क्षमता SOCKS प्रॉक्सी इस्तेमाल करने का एक लोकप्रिय कारण है, और कभी-कभी इन्हें “टोरेंट प्रॉक्सी” भी कहा जाता है। टोरेंटिंग के दौरान अक्सर खपत होने वाली ज़्यादा बैंडविड्थ के साथ, पब्लिक SOCKS प्रॉक्सी पर अक्सर सर्वर लोड ज़्यादा हो सकता है।

HTTPS के लिए सहायता SOCKS प्रोटोकॉल में बिल्ट-इन है, और इसका अक्सर इस्तेमाल SOCKS प्रॉक्सी सर्वर से कनेक्शन सुरक्षित करने के लिए होता है।

SOCKS4 अब भी प्रॉक्सी सर्वर पर इस्तेमाल होने वाला SOCKS का सबसे आम वर्ज़न है, लेकिन SOCKS5 सबसे नया वर्ज़न है। ये प्रॉक्सी ऑपरेटर को उपयोगकर्ताओं की पहचान सत्यापित करने के विभिन्न तरीके देता है, जिससे उन्हें ये कंट्रोल मिलता है कि सर्वर कौन इस्तेमाल करे। उदाहरण के लिए, कमर्शियल प्रॉक्सी सर्वर SOCKS5 का इस्तेमाल ये सुनिश्चित करने के लिए कर सकते हैं कि सिर्फ पैसे देने वाले ग्राहक ही उनके सर्वर से कनेक्ट कर सकें। हालांकि, SOCKS4 प्रॉक्सी के मुकाबले SOCKS5 प्रॉक्सी इस्तेमाल करने वालों के लिए फायदे बेहद कम हैं।

HTTP प्रॉक्सी

हाइपरटेक्स्ट ट्रांसफ़र प्रोटोकॉल (HTTP) वर्ल्ड वाइड वेब पे वेबसाइटों और दूसरे रिसोर्स को जोड़ता है। HTTP प्रोटोकॉल इस्तेमाल करने वाले बेहद विस्तृत रेंज के ऐप्स और प्रोग्राम HTTP प्रॉक्सी को सहायता देते हैं, खासकर ब्राउज़र।

HTTP प्रोटोकॉल पर निर्भरता HTTP प्रॉक्सी को कुछ हद तक सीमित करती है, लेकिन इससे ये ज़्यादा ऊंचे लेवल पे भी काम कर पाती हैं। यानी ये वेब ट्रैफिक को समझती और व्याख्या करती हैं, जो ऐसी चीज़ों के लिए काम आता है, जैसे:

  • वेब कंटेंट फ़िल्टर करना (उदाहरण के लिए, बैनर और गैर-जरूरी, या खतरनाक स्क्रिप्ट हटाना)
  • वेबसाइटों और दूसरे इंटरनेट रिसोर्स तक एक्सेस सीमित करना (उदाहरण के लिए, एडल्ट कंटेंट)
  • बेहतर परफॉर्मेंस के लिए मीडिया और कंटेंट कैश करना

इससे प्रॉक्सी ऐसी चीजें भी कर पाती है जिनपे बहुत सारे लोग शायद खुश न हों, जैसे:

  • वेब कंटेंट सेंसर करना (उदाहरण के लिए, राजनीतिक कंटेंट)
  • विज्ञापन बैनर और घातक कोड डालना, ये मुफ्त HTTP प्रॉक्सी सर्वर में खास तौर पे बड़ी समस्या है

HTTP कनेक्शन डिफॉल्ट रूप से सुरक्षित नहीं होते, जिससे आपका ISP और दूसरी थर्ड पार्टी आपके इंटरनेट ट्रैफिक पर नज़र रख सकती है। हालांकि, कनेक्शन को HTTPS प्रोटोकॉल का इस्तेमाल करके एन्क्रिप्ट किया जा सकता है, जो सारे इंटरनेट ट्रैफिक को सुरक्षित रखता है। जो HTTP प्रॉक्सी सर्वर आपके प्रॉक्सी सर्वर तक के कनेक्शन को सुरक्षित रखने के लिए HTTPS इस्तेमाल करते हैं, उन्हें अक्सर HTTPS प्रॉक्सी कहा जाता है।

वेब प्रॉक्सी

वेब प्रॉक्सी एक HTTP प्रॉक्सी है जिससे आप अपने ब्राउज़र विंडो के अंदर कनेक्ट करते हैं, बिना कोई सॉफ्टवेयर डाउनलोड किए या अपने ब्राउज़र की प्रॉक्सी सेटिंग कॉन्फ़िगर किए। ज़्यादातर मुफ्त होते हैं, लेकिन ये आम तौर पे एक कमी है, क्योंकि बहुत सारे अपने ब्राउज़र विंडो में बैनर, विज्ञापन, और दूसरी (संभावित रूप से घातक) स्क्रिप्ट डालकर खुद का पेटा चलाते हैं।

सच में, बहुत सारी वेब प्रॉक्सी आपके ब्राउज़िंग अनुभव को इतना बाधित करती हैं कि इंटरनेट लगभग बेकार हो जाता है।

ट्रांसपेरेंट प्रॉक्सी

ट्रांसपेरेंट प्रॉक्सी आपके डिवाइस और इंटरनेट के बीच होती हैं, लेकिन ये कोई चीज़ नहीं जिससे आप जानबूझकर कनेक्ट करें। असल में, हो सकता है कि आपको पता भी न हो कि आप किसी का इस्तेमाल कर रहे हैं।

ट्रांसपेरेंट प्रॉक्सी के भले इस्तेमाल में वो वाई-फाई पोर्टल शामिल हैं जिनमें आप पब्लिक वाई-फाई हॉटस्पॉट पे साइनइन करते हैं, और वो फ़िल्टर जो पब्लिक लाइब्रेरी या स्कूलों की दी गई वाई-फाई पर गलत कंटेंट ब्लॉक करते हैं। कम भले इस्तेमाल में राजनीतिक, सामाजिक, या धार्मिक वजहों से जायज़ कंटेंट सेंसर करना शामिल है।

प्रॉक्सी यूआरएल

प्रॉक्सी यूआरएल असली प्रॉक्सी नहीं, बल्कि एक वेब पता है जो दूसरे URL पे फॉरवर्ड होता है। जब कोई URL ब्लॉक हो, तो सेंसरशिप से बचने के लिए ये काम आ सकता है।

Tor

Tor गुमनामी नेटवर्क कनेक्शन को कई नोड से रूट करता है, और हर बार कनेक्शन को एन्क्रिप्ट करता है। हर नोड एक प्रॉक्सी सर्वर की तरह काम करता है और उसे (कम से कम थ्योरी(नई विंडो) में) वर्लंटियर चलाते हैं।

निजी प्रॉक्सी

निजी (या बंद) प्रॉक्सी कोई भी ऐसा प्रॉक्सी सर्वर है जो निजी तौर पे चलाया जाता है और जो सबके लिए उपलब्ध नहीं है। शायद सबसे आम उदाहरण है रिवर्स प्रॉक्सी जिसे कोई कंपनी इंटरनल कॉर्पोरेट रिसोर्स तक गेटवे के रूप में इस्तेमाल करती है, लेकिन लोगों का सेंसरशिप बायपास करने के लिए रिमोट निजी प्रॉक्सी सर्वर (जो VPN हो सकते हैं) सेटअप करना भी काफी आम है।

हालांकि, ये ध्यान देने लायक बात है कि ऐसे निजी पर्सनल प्रॉक्सी और VPN आपकी निजता की सुरक्षा में कमर्शियल VPN सेवाओं जितने अच्छे नहीं हैं(नई विंडो), क्योंकि प्रॉक्सी सर्वर के IP पते की मालिकियत का पता आसानी से आप तक लगाया जा सकता है।

अगर आपके पास Proton VPN Professional या Proton Business Suite खाता है, तो आप डेडिकेटेड IP पते(नई विंडो) सेटअप कर सकते हैं जो आपको अपने संगठन के SaaS और लोकल रिसोर्स तक सुरक्षित सेगमेंटेड एक्सेस देने की सुविधा देते हैं। इन डेडिकेटेड IP को निजी VPN प्रॉक्सी कहा जा सकता है।

कमर्शियल प्रॉक्सी

कमर्शियल प्रॉक्सी (VPN से अलग) एक पेड सर्विस है जो आपको किसी कंपनी द्वारा चलाई गई HTTP या SOCKS प्रॉक्सी से कनेक्ट करने देती है। ये कनेक्शन लगभग हमेशा HTTPS इस्तेमाल करके सुरक्षित किए जाते हैं।

ज़्यादातर कमर्शियल प्रॉक्सी डेटा सेंटर से चलती हैं, हालांकि रेज़िडेंशियल या मोबाइल IP पते देने वाली कमर्शियल प्रॉक्सी सेवाएं एक उभरती हुई इंडस्ट्री हैं।

कमर्शियल प्रॉक्सी को अक्सर उनकी दी जाने वाली निजता की मात्रा के आधार पे कैटेगराइज़ किया जाता है:

  • शेयर्ड – एक प्रॉक्सी सर्वर (और उससे जुड़ा IP पता), जो कई दूसरे ग्राहकों के साथ शेयर किया जाता है।
  • सेमी-शेयर्ड – एक प्रॉक्सी जो सीमित संख्या में दूसरे ग्राहकों (आम तौर पे तीन और) के साथ शेयर की जाती है।
  • एक्सक्लूसिव या डेडिकेटेड – प्रॉक्सी और उससे जुड़े (स्टैटिक) IP पते का इस्तेमाल सिर्फ आप करते हैं, हालांकि ये ध्यान देने लायक है कि इसका मतलब लगभग हमेशा एक वर्चुअलाइज़्ड सर्वर होता है जो किसी फिजिकल मशीन पे होस्ट होता है जो कई ऐसे वर्चुअल सर्वर होस्ट करती है। ये भी ध्यान देने लायक है कि एक्सक्लूसिव IP होने से निजता कम हो जाती है, क्योंकि IP पते का पता आप तक लगाया जा सकता है।

रेज़िडेंशियल और मोबाइल प्रॉक्सी

ज़्यादातर कमर्शियल प्रॉक्सी डेटा सेंटर से चलाई जाती हैं और ऐसे IP पते इस्तेमाल करती हैं जो किसी ISP से लीज़ पे लिए गए हैं। डेटा सेंटर के कंट्रोल वाले IP के ये ब्लॉक कभी-कभी ब्लॉक कर दिए जाते हैं (स्ट्रीमिंग सेवाओं का एक लोकप्रिय तरीका, जो कॉपीराइट की वजहों से अपना कंटेंट जियो-रेस्ट्रिक्ट करती हैं)।

रेज़िडेंशियल प्रॉक्सी सीधे ISP द्वारा चलाई जाती हैं, और इसलिए ऐसे IP पते इस्तेमाल करती हैं जो फिजिकल पतों से जुड़े “असली” IP पतों से अलग नहीं किए जा सकते। इसलिए इन्हें ब्लॉक करना लगभग नामुमकिन है, और प्रॉक्सी का इस्तेमाल करके आपके स्थान को स्पूफ करने में ये ज़्यादा ग्रैन्युलैरिटी देते हैं।

मोबाइल प्रॉक्सी रेज़िडेंशियल प्रॉक्सी जैसी ही होती हैं, सिवाय इसके कि इन्हें मोबाइल इंटरनेट प्रोवाइडर देते हैं।

पब्लिक प्रॉक्सी

पब्लिक प्रॉक्सी कोई भी मुफ्त में इस्तेमाल कर सकता है। पब्लिक प्रॉक्सी की लिस्ट इंटरनेट पे आसानी से मिल जाती है, लेकिन हम इनका इस्तेमाल करने की सख्त सिफारिश नहीं करते।

इसकी वजह ये है कि ये पता लगाने का कोई तरीका नहीं है कि सर्वर कौन चला रहा है और उनपे भरोसा करने का कोई कारण नहीं है। असल में, चूंकि सर्वर से कनेक्ट होने पे वो आपकी ऑनलाइन हर गतिविधि पर नज़र रख सकते हैं, और प्रॉक्सी सर्वर चलाने में लगने वाले वक्त और मेहनत के बदले में कुछ नहीं मांगते, इसलिए शक करने का हर कारण है।

पब्लिक प्रॉक्सी को आम तौर पे उनके गुमनामी लेवल के हिसाब से रेट किया जाता है।

  • लेवल 1 (ट्रांसपेरेंट प्रॉक्सी या कैशिंग प्रॉक्सी) – इस लेख में पहले चर्चा की गई ट्रांसपेरेंट प्रॉक्सी की किस्म से इन्हें भ्रमित न करें, ये प्रॉक्सी आपका IP पता बहुत हद तक छिपा देंगी। हालांकि, ये अब भी वेब पेज से कनेक्ट करते वक्त भेजे गए रिक्वेस्ट हैडर में दिखता है। इंटरनेट पे कोई असरदार निजता न देते हुए, लेवल-1 प्रॉक्सी का इस्तेमाल मुख्य रूप से कंटेंट कैश करके वेब परफॉर्मेंस बेहतर करने के लिए होता है।
  • लेवल 2 (गुमनाम प्रॉक्सी) – इस तरह की प्रॉक्सी आपकी विज़िट की गई वेबसाइटों से आपका असली IP पता छिपाकर इंटरनेट पे कुछ निजता देती है। हालांकि, ये ये छिपाने की कोशिश नहीं करतीं कि आप किसी प्रॉक्सी सर्वर का इस्तेमाल कर रहे हैं। पेज रिक्वेस्ट करते वक्त FORWARDED हैडर इस्तेमाल करके प्रॉक्सी सर्वर का खुद को प्रॉक्सी सर्वर के रूप में बताना आम बात है।
  • लेवल 3 (एलीट प्रॉक्सी या हाई-गुमनामी प्रॉक्सी) – लेवल-3 प्रॉक्सी सिर्फ आपका असली IP पता नहीं छिपाती, बल्कि आपकी विज़िट की गई वेबसाइटों को ये भी नहीं बताती कि आप किसी प्रॉक्सी का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेवल-3 पब्लिक प्रॉक्सी आम तौर पे बेहद लोकप्रिय होती हैं, जिससे वो बहुत धीमी भी हो सकती हैं।

VPN या प्रॉक्सी? VPN का इस्तेमाल क्यों करें

जैसा कि हमने चर्चा की, प्रॉक्सी कई अलग-अलग तरह की होती हैं। VPN और कमर्शियल प्रॉक्सी कई मामलों में मिलते-जुलते हैं और अक्सर मिलते-जुलते मकसद के लिए इस्तेमाल होते हैं। हालांकि, इसके अच्छे कारण हैं कि VPN मार्केट कमर्शियल प्रॉक्सी मार्केट से कहीं बड़ा और ज़्यादा विकसित है:

फैसला, जाहिर है, आपका है।