साइबरस्टॉकिंग असल में निजता का उल्लंघन है। अक्सर ये उस जानकारी से शुरू होती है जो आप ऑनलाइन अपनी मर्ज़ी से शेयर करें, जिसमें सोशल मीडिया पोस्ट से लेकर टैग की गई तस्वीरें शामिल हैं।

अमेरिका में हर पांच में से लगभग एक महिला और हर 10 में से एक आदमी(नई विंडो) किसी न किसी समय अपनी जिंदगी में स्टॉकिंग का शिकार होते हैं, और उस स्टॉकिंग का बढ़ता हिस्सा शक्स के सामने होने के बजाय फोन या लैपटॉप के ज़रिए होता है।

सबसे ज़रूरी बात, साइबरस्टॉकिंग एक जुर्म है। लेकिन इसे परिभाषित करने वाले कानून दुनिया भर में अलग-अलग हैं।

ये गाइड बताती है कि साइबरस्टॉकिंग क्या है और ये ऑनलाइन उत्पीड़न की दूसरी विधियों से कैसे अलग है। हम ये भी देखेंगे कि बड़े देशों में कानून क्या कहता है। साथ ही आप जानेंगे कि इसे पहचानने, इसका जवाब देने और शुरू से ही खुद को मुश्किल निशाना बनाने के लिए आप क्या कर सकते हैं।

साइबरस्टॉकिंग क्या है?

साइबरस्टॉकिंग में किसी को धमकाने या काबू करने के इरादे से इंटरनेट, ईमेल, सोशल मीडिया या दूसरे इलेक्ट्रॉनिक साधनों के ज़रिए बार-बार उत्पीड़न किया जाता है। ऑफलाइन स्टॉकर्स की तरह, ज़्यादातर साइबरस्टॉकर्स का अपने निशाने से पहले से कोई नाता होता है, चाहे वो पुराना पार्टनर हो, सहकर्मी या जान-पहचान वाला शख्स।

जिन तरह के उत्पीड़न को साइबरस्टॉकिंग माना जा सकता है, वो कई रूपों में होते हैं। 2025 में अमेरिका में एक आदमी ने AI चैटबॉट(नई विंडो) का इस्तेमाल करके लोगों को अपने शिकार के घर तक बुलाया, जो सात साल तक चले साइबरस्टॉकिंग के हमले का हिस्सा था। ब्रिटेन में एक महिला को ऑनलाइन नुकसानदेह और झूठे आरोपों की पोस्ट करने पर 28 महीने की जेल की सज़ा(नई विंडो) सुनाई गई थी।

“साइबरस्टॉकिंग” शब्द का इस्तेमाल अक्सर कुछ मिलते-जुलते शब्दों के साथ, ढीले मायने में होता है:

  • ऑनलाइन उत्पीड़न साइबरस्टॉकिंग से ज़्यादा बड़ा दायरा रखता है। साइबरस्टॉकिंग के कानूनों में आमतौर पर ये साबित करना पड़ता है कि ऐसी हरकत से जान के खतरे का डर पैदा हुआ; वहीं ऑनलाइन उत्पीड़न के कानूनों में अक्सर बस ये काफी है कि उस शख्स का इरादा आपको परेशान या चौंकाने का था, और संपर्क की कोई वाजिब वजह(नई विंडो) नहीं थी।
  • साइबरबुलिंग भी इसी तरह का आक्रामक और बिना मांगे किया गया संपर्क है, लेकिन ये शब्द आमतौर पर बड़ों के बजाय नाबालिगों और स्कूलों से जुड़ा है।
  • डॉक्सिंग में किसी का पता, फोन नंबर या पहचान बताने वाली दूसरी जानकारी सार्वजनिक करके उसे डराना या खतरे में डालना शामिल है। ये आमतौर पर किसी बड़ी स्टॉकिंग या उत्पीड़न की घटना का एक तरीका होता है, और इसे अलग जुर्म के तौर पर कम ही देश मानते हैं।

कानूनी लिहाज़ से ये फर्क तब अहम हो जाते हैं जब आप समझना चाहें कि आपको कौन सी सुरक्षा लागू होती है।

दुनिया भर में साइबरस्टॉकिंग के कानून

साइबरस्टॉकिंग कम ही अपने आप में एक अलग जुर्म माना जाता है। इसकी जगह आमतौर पर इसके लिए सामान्य स्टॉकिंग या उत्पीड़न के कानूनों के तहत मुकदमा चलता है। यहां शामिल लगभग हर कानूनी व्यवस्था में एक शर्त साझा है: बार-बार दोहराई गई हरकतों का सबूत, किसी एक घटना का नहीं।

संयुक्त राज्य

अमेरिका में कोई एक संघीय “साइबरस्टॉकिंग कानून” नहीं है। ज़्यादातर मुकदमे राज्य स्तर पर ऐसे स्टॉकिंग या उत्पीड़न कानूनों के तहत चलते हैं जिन्हें इलेक्ट्रॉनिक संचार शामिल करने तक बढ़ाया गया है। कैलिफोर्निया ने 1999 में पहला राज्य कानून पारित किया जिसमें साइबरस्टॉकिंग को साफ तौर पर जुर्म गिना गया, और उसके बाद से बाकी ज़्यादातर राज्यों ने भी ऐसा किया(नई विंडो)

संघीय स्तर पर 18 U.S.C. § 2261A(नई विंडो) किसी को मारने, चोट पहुंचाने, उत्पीड़ित करने, धमकाने या निगरानी करने के इरादे से राज्यों के बीच सफर या इलेक्ट्रॉनिक संचार के इस्तेमाल को जुर्म मानता है, बशर्ते ऐसी हरकत से उसे गहरी मानसिक परेशानी हो या गंभीर नुकसान का वाजिब डर हो। सज़ा के तौर पर आधारभूत दंड पांच साल तक की जेल हो सकता है।

युनाइटेड किंगडम

ब्रिटेन साइबरस्टॉकिंग के लिए Protection from Harassment Act 1997(नई विंडो) की धारा 2A के तहत कार्रवाई करता है, यही कानून ऑफलाइन स्टॉकिंग को भी कवर करता है। स्टॉकिंग की सज़ा 10 साल तक की जेल हो सकती है। अकेले धमकी भरे या बेहद आपत्तिजनक संदेशों के लिए, जो चलती-फिरती स्टॉकिंग की श्रेणी में नहीं आते, अभियोजन पक्ष Malicious Communications Act 1988(नई विंडो) या Communications Act 2003(नई विंडो) का इस्तेमाल कर सकता है। हाल के सालों में Online Safety Act 2023(नई विंडो) ने ब्रिटेन में काम करने वाले प्लैटफॉर्म के लिए कानूनी ज़िम्मेदारियां तय की हैं, जिनमें स्टॉकिंग और उत्पीड़न को उन अवैध सामग्रियों में गिना गया है जिन्हें प्लैटफॉर्म को खास तौर पर संभालना होता है।

जर्मनी

जर्मनी में स्टॉकिंग आपराधिक कोड की धारा 238(नई विंडो) (StGB) के तहत जुर्म है, जिसे 2017 में सुरक्षा मजबूत करने के लिए खास तौर पर संशोधित किया गया था। कानून साफ तौर पर “दूरसंचार के ज़रिए या [पीड़ित के] निजी डाटा के इस्तेमाल से” की गई हरकतों को कवर करता है, जिनमें उस शख्स की नकल करना शामिल है, और यही सीधा रास्ता साइबरस्टॉकिंग तक जाता है। सज़ा तीन साल तक की जेल हो सकती है, और गंभीर मामलों में पांच साल तक। जर्मनी में साइबरस्टॉकिंग के मामलों पर अक्सर मिलते-जुलते जुर्मों, जैसे ऑनलाइन धमकियां (धारा 241 StGB) या अपमान और मानहानि (धारा 185–187 StGB), के साथ भी मुकदमा चलता है।

फ्रांस

फ्रांस साइबरस्टॉकिंग को आपराधिक कोड के अनुच्छेद 222-33-2-2(नई विंडो) के तहत संभालता है, जो मानसिक उत्पीड़न को ऐसे बार-बार किए गए व्यवहार के तौर पर परिभाषित करता है जिससे किसी की जीवन-शैली बिगड़ती है और उसकी शारीरिक या मानसिक सेहत को नुकसान पहुंचता है। सज़ा में एक साल तक की जेल और €15,000 तक का जुर्माना हो सकता है। फ्रांस के 2016 के डिजिटल रिपब्लिक एक्ट ने “रिवेंज पोर्न” के लिए सख्त सज़ा(नई विंडो) रखकर कानून को मजबूत किया, जिसमें जेल की मियाद दोगुनी और जुर्माना बढ़ाकर €60,000 कर दिया गया।

कनाडा

कनाडा में ऑनलाइन स्टॉकिंग आपराधिक कोड की धारा 264(नई विंडो) के तहत मुकदमे में आती है, जो 1993 में बनाया गया आपराधिक उत्पीड़न का प्रावधान है। सज़ा सुनिश्चित करने के लिए ये साबित करना पड़ता है कि ऐसे व्यवहार से पीड़ित को अपनी या किसी जानकार शख्स की सुरक्षा को लेकर वाजिब डर हुआ हो, और सज़ा 10 साल तक की जेल हो सकती है। साइबरस्टॉकिंग के लिए बिल C-13(नई विंडो), यानी Protecting Canadians from Online Crime Act, के तहत भी मुकदमा चल सकता है, जिसके मुताबिक “संपर्क बार-बार दोहराया गया और बिना मांगे किया गया” होना चाहिए और “पीड़ितों को अपनी या किसी जानकार शख्स की सुरक्षा को लेकर वाजिब डर होना चाहिए”।

इटली

इटली में स्टॉकिंग को “atti persecutori” यानी सताने वाली हरकतों के तौर पर आपराधिक कोड के अनुच्छेद 612-bis(नई विंडो) के तहत जुर्म माना गया है, जिसे 2009 में पेश किया गया था। कानून ऐसे बार-बार किए गए व्यवहार को कवर करता है जिससे लगातार बेचैनी या डर, किसी की सुरक्षा को लेकर वाजिब डर, या पीड़ित को अपनी रोज़मर्रा की आदतें बदलने पर मजबूर होना पड़ता है। इस प्रावधान में ईमेल और टेक्स्ट संदेशों को खास तौर पर उदाहरण के तौर पर गिना गया है। सज़ा की बुनियादी मियाद एक से साढ़े छह साल तक की जेल है, और कानून को तब से दो बार मजबूत किया गया है, 2019 में और फिर 2023 में। पीड़ित के लिए जुर्म की घटना के छह महीने के अंदर शिकायत दर्ज कराना ज़रूरी है।

ब्राज़ील

ब्राज़ील ने स्टॉकिंग को हाल में ही एक अलग जुर्म माना, कानून 14.132/2021(नई विंडो) के ज़रिए, जिसने आपराधिक कोड में अनुच्छेद 147-A जोड़ा। इसके मुताबिक ये जुर्म तब होता है जब कोई किसी का किसी भी तरीके से बार-बार पीछा करे ऐसे में कि उसकी शारीरिक या मानसिक सुरक्षा को खतरा हो, उसकी आने-जाने की आज़ादी पर रोक लगे, या उसकी निजता का उल्लंघन हो। ब्राज़ील की कानूनी टिप्पणियां साइबरस्टॉकिंग को “किसी भी तरीके से” के दायरे में पूरी तरह आता मानती हैं। सज़ा में छह महीने से दो साल तक की जेल और जुर्माना होता है, और जुर्म अगर किसी बच्चे, बुज़ुर्ग या महिला को उसके लिंग की वजह से निशाना बनाए तो आधा बढ़ जाता है।

ऑस्ट्रेलिया

ऑस्ट्रेलिया साइबरस्टॉकिंग के लिए आपराधिक कोड की धारा 474.17(नई विंडो) के तहत कार्रवाई करता है, जो किसी “कैरिज सर्विस”, यानी किसी भी फोन या इंटरनेट सर्विस, के इस्तेमाल से धमकाने, उत्पीड़ित करने या ठेस पहुंचाने को जुर्म मानता है और सज़ा पांच साल तक की जेल हो सकती है। खास बात ये है कि इसमें अभियोजन पक्ष को ये साबित करने की ज़रूरत नहीं कि पीड़ित को वाकई शारीरिक नुकसान का डर हुआ था।

भारत

भारत के आपराधिक कोड की धारा 354D, जो 2013 में जोड़ी गई, किसी आदमी के ज़रिए किसी महिला के इंटरनेट, ईमेल या दूसरे इलेक्ट्रॉनिक संचार के इस्तेमाल की निगरानी(नई विंडो) को स्टॉकिंग के तौर पर साफ तौर पर जुर्म मानती है। दुनिया भर में मिलने वाले कानूनी उल्लेखों में ये साइबरस्टॉकिंग जैसी हरकतों के सबसे सीधे उल्लेखों में से एक है। भले ही ये कानून खास तौर पर महिलाओं को आदमियों से बचाता है और सब पर एक समान लागू नहीं होता, आदमियों को धमकी से जुड़े एक अलग कानून(नई विंडो) के तहत सुरक्षा हासिल है। पहली सज़ा में तीन साल तक की जेल हो सकती है, और दोबारा जुर्म होने पर पांच साल तक।

फिलीपींस

फिलीपींस का 2019 का Safe Spaces Act(नई विंडो) बाकी ज़्यादातर देशों से आगे जाता है और “साइबरस्टॉकिंग” को साफ तौर पर लिंग आधारित ऑनलाइन यौन उत्पीड़न के कई रूपों में से एक गिनता है, जिनमें बिना मांगे भेजे जाने वाले यौन संदेश और बिना रज़ामंदी तस्वीरें शेयर करना शामिल है। पूरी दुनिया में साइबरस्टॉकिंग का एक अलग जुर्म के तौर पर शायद यही सबसे सीधा उल्लेख है।

दुनिया के बाकी हिस्से

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी तस्वीर असमान और अक्सर अधूरी है। 2020 के वर्ल्ड बैंक के आकलन(नई विंडो) में पाया गया कि दुनिया भर की सिर्फ 30% अर्थव्यवस्थाओं के पास ऑनलाइन उत्पीड़न से जुड़ी कानूनी सुरक्षा है, और साइबर यौन उत्पीड़न से खास तौर पर सिर्फ 12% बचाती हैं। आकलन में शामिल 190 अर्थव्यवस्थाओं में से सिर्फ 21 के पास बच्चों को ऑनलाइन उत्पीड़न से साफ तौर पर बचाने वाले कानून हैं। हाल के शोध(नई विंडो) से पता चलता है कि कानूनी कवरेज में कोई खास सुधार नहीं हुआ है।

साइबरस्टॉकिंग निजता की समस्या क्यों है

हर तरह की साइबरस्टॉकिंग किसी डिजिटल जानकारी तक स्टॉकर की पहुंच पर टिकी होती है। हर मामले में जानकारी ही वो चीज़ है जिसे वो अपने शिकार के खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं, और इसके कई संभावित स्रोत हैं:

  • डाटा ब्रोकर और लोगों की खोज करने वाली साइटें। ये साइटें आपका पता, फोन नंबर, काम की जगह और परिवार की जानकारी अक्सर आपकी जानकारी के बिना इकट्ठा करके दोबारा बेचती हैं, और आपकी प्रोफाइल बना रहे स्टॉकर के लिए यही अक्सर सबसे आसान शुरुआती जगह होती है।
  • तस्वीर और स्थान का मेटाडाटा। स्थान सर्विस चालू होने पर ली गई तस्वीरों में इमेज मेटाडाटा के साथ GPS निर्देशांक अंदर डाले होते हैं। स्टॉकर्स ने डेटिंग ऐप और सोशल मीडिया की तस्वीरों के मेटाडाटा से पीड़ितों का घर और काम की जगह पहचानी है।
  • स्टॉकरवेयर ये व्यापारिक निगरानी सॉफ्टवेयर होता है जो किसी डिवाइस पे इंस्टॉल किया जाता है, आमतौर पर ऐसे शख्स के ज़रिए जिसकी डिवाइस तक शारीरिक पहुंच रही हो, और जिसकी मदद से शोषक संदेश, कॉल, ब्राउज़िंग और स्थान पर निगरानी रख सकता है।
  • दोबारा इस्तेमाल किए गए या कमजोर पासवर्ड किसी पुराने, असंबंधित खाते का एक लीक हुआ पासवर्ड ही वो जगह बन सकता है जिससे कोई आपका ईमेल या सोशल मीडिया काबू में ले ले।

अपना डिजिटल फुटप्रिंट साफ करना ही सबसे असरदार तरीका है जिससे आप सुरक्षित रह सकते हैं।

साइबरस्टॉकिंग को पहचानें, उसका जवाब दें, खुद को उससे बचाएं

अगर आपको ये संकेत नज़र आएं, तो हो सकता है कोई आपकी साइबरस्टॉकिंग कर रहा हो

अगर आपको ये संकेत नज़र आएं, तो हो सकता है कोई आपकी साइबरस्टॉकिंग कर रहा हो:

  • बेहद ज़्यादा संपर्क या अचानक बर्स्ट में आने वाले संदेश
  • पुराने सोशल मीडिया पोस्ट पे हुई बातचीत, जिन्हें निकालने में सचमुच खूब मेहनत लगी होगी
  • धमकियां या ब्लैकमेल, जिनमें निजी जानकारी या तस्वीरें सार्वजनिक करने की धमकी भी शामिल है
  • आपके खातों या डिवाइस को एक्सेस करने की कोशिशें, या असली प्रोफाइल ब्लॉक करने के बाद फर्जी प्रोफाइल का संपर्क करना
  • बिना मांगे भेजे गए यौन संदेश

सबसे साफ संकेत ये है कि कोई अनचाहा ध्यान स्टॉकिंग में बदल गया है, जब आप साफ शब्दों में रुकने को कह देने के बाद भी संपर्क जारी रहता है।

अगर कोई आपकी साइबरस्टॉकिंग कर रहा हो तो क्या करें

अगर आप साइबरस्टॉकिंग का शिकार हो रहे हैं:

  1. एक साफ, लिखित संदेश भेजें कि ये संपर्क अनचाहा है, फिर जवाब देना पूरी तरह बंद कर दें।
  2. सब कुछ दर्ज करें: तारीखें, स्क्रीनशॉट, हर घटना का ब्यौरा।
  3. जिस प्लैटफॉर्म पे संपर्क हुआ, वहां उस शख्स की शिकायत करें।
  4. अपने इस्तेमाल किए हर चैनल पे उन्हें ब्लॉक कर दें।
  5. इसे अकेले संभालने के बजाय अपने विश्वसनीय लोगों को बताएं।
  6. अगर ये जारी रहे, तो पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं और रोक या सुरक्षा आदेश पर विचार करें।

स्टॉकरवेयर के बारे में एक ज़रूरी बात: अगर आपको शक हो कि आपके फोन पे स्टॉकरवेयर है, तो उसे हटाने से जिसने इंस्टॉल किया है उसे खबर मिल सकती है और हालात बिगड़ भी सकते हैं। अगर आप फिलहाल किसी ऐसे रिश्ते में हैं जिसमें घरेलू हिंसा हो रही है, तो कोई कदम उठाने से पहले घरेलू हिंसा विशेषज्ञ से सहायता लेना फायदेमंद हो सकता है।

स्टॉकरवेयर पे ये विस्तृत जानकारी देखें Coalition Against Stalkerware(नई विंडो) से।

अपनी निजता की रक्षा के लिए:

  • अपने नाम को खोजें और देखें कि क्या-क्या पहले से ऑनलाइन मिल रहा है, और डाटा ब्रोकर व पीपल-सर्च साइटों से अपनी जानकारी हटवाएं। ध्यान रहे, ये एक बार का समाधान नहीं है, क्योंकि वक्त के साथ नई लिस्टिंग फिर सामने आ जाती हैं।
  • अपनी ऑनलाइन निजता सेटिंग जांचें और अपने कैमरे और ऐप पे जियोलोकेशन टैगिंग बंद कर दें, ताकि फोटो में GPS डाटा न आए।
  • अपना IP पता छिपाने(नई विंडो) के लिए VPN(नई विंडो) इस्तेमाल करें, ताकि आपका सामान्य स्थान उन सबसे छिपा रहे जो आपके कनेक्शन को ट्रेस करके आप तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हों। लेकिन ध्यान रहे कि VPN GPS डाटा नहीं छिपा सकता और न ही उस जानकारी की रक्षा कर सकता है जो आप खुद किसी खाते में दर्ज करते हैं।
  • हर खाते के लिए यूनीक पासवर्ड बनाने के लिए पासवर्ड मैनेजर इस्तेमाल करें, और सुरक्षा की एक और परत के तौर पर दो-फैक्टर सत्यापन चालू कर दें।
  • कुछ भी साइनअप करते वक्त अपने असली ईमेल पते की जगह ईमेल नकली-नाम इस्तेमाल करें, ताकि सर्विसेज़ और डाटा ब्रोकर कभी भी नए खाते को आपकी पहचान से कनेक्ट न कर सकें।
  • अपने डिवाइस पे स्टॉकरवेयर के संकेतों पर नज़र रखें: बैटरी जल्दी खत्म होना, अनजाने ऐप या ऐसे अनुमति बदलाव जो आपने नहीं किए।

साइबरस्टॉकिंग के खिलाफ निजता ही आपका सबसे बड़ा बचाव है

साइबरस्टॉकिंग एक अपराध है, और कई देश इसका जवाब देने का कानूनी रास्ता देते हैं। लेकिन कानून बाद में असर करता है; ज़्यादा असरदार कदम ये है कि शुरू से ही आपका पर्सनल डाटा ढूंढना मुश्किल बना दिया जाए।

इसकी शुरुआत बुनियादी चीज़ों से होती है: एक ईमेल पता जो आपके असली नाम से न जुड़ा हो, ऐसे पासवर्ड जिन्हें कोई स्टॉकर अंदाज़ा लगाकर या किसी पुराने लीक से दोबारा इस्तेमाल न कर सके, और ऐसा इंटरनेट कनेक्शन जो आपका स्थान देख रहे किसी को न बताए।

बिग टेक की निगरानी से आपकी निजता की रक्षा करने में आपकी मदद करना Proton में हमारा मिशन है। लेकिन ऐसा करना आपकी पर्सनल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में भी एक अच्छा कदम है।