स्पाईवेयर का निशाना बनना किसी के बिना इजाजत आपकी डेस्क की दराजों में झांकने जैसा है। वजह जो भी हो, ये परेशान करने वाला है, लेकिन किसी भी घुसपैठ की तरह, असली मकसद क्या था और उसने अंदर कैसे घुसा, इसी से तय होता है कि आपको कितनी चिंता करनी चाहिए।

ये समझना ज़रूरी है, क्योंकि स्पाईवेयर कई तरह के होते हैं, और हर एक अलग तरीके और अलग निशाने इस्तेमाल करता है। इस आर्टिकल में चारों मुख्य तरह के स्पाईवेयर कैसे काम करते हैं और उनके निशाने कौन होते हैं, ये सब शामिल है।

इसमें ये भी बताया गया है कि क्या ध्यान देना चाहिए और आगे क्या करना चाहिए, जिनमें शामिल हैं:

  • आपके डिवाइस से छेड़छाड़ होने के संकेत
  • कुछ स्पाईवेयर हटाने वाले टूल चीज़ों को असल में क्यों बदतर बनाते हैं
  • आगे का खतरा कम करने के लिए आप क्या कर सकते हैं

स्पाईवेयर सॉफ्टवेयर की चार मुख्य किस्में

स्पाईवेयर सॉफ्टवेयर की कम से कम चार अलग-अलग किस्में हैं, और हर एक के तरीके और निशाने अलग हैं। इस आर्टिकल में हम बड़ी श्रेणियों पे ध्यान देंगे, लेकिन हमने खास स्पाईवेयर ऐप के बारे में भी लिखा है।

किस्म 1: ऐडवेयर

ऐडवेयर आपकी ब्राउज़िंग आदतों पे नज़र रखता है और आपके व्यवहार के आधार पे टारगेटेड विज्ञापन दिखाता है। Kaspersky थ्रेट इंटेलिजेंस(नई विंडो) के मुताबिक, 2025 में सभी मोबाइल मालवेयर की पहचान में ऐडवेयर का हिस्सा 62% था।

ऐडवेयर अक्सर फ्री सॉफ्टवेयर या ऐप के साथ बंडल होता है, जैसे एक फ्री फ्लैशलाइट ऐप, जो वैसे ही काम करता है जैसा विज्ञापन में कहा गया (इससे शक भी कम होता है), और चुपचाप आपका ब्राउज़िंग डाटा विज्ञापन नेटवर्क को भेजकर पैसे कमाता है।

जब ऐडवेयर का मकसद सिर्फ आपको विज्ञापन दिखाना हो, तो ये अपेक्षाकृत हानिरहित हो सकता है, और आमतौर पे आप इसे घुसाए गए विज्ञापनों और पॉप-अप के रूप में देख पाएंगे। लेकिन जब ऐडवेयर चुपचाप आपका निजी डाटा, जैसे आपका नाम, जन्मतिथि और स्थान, इकट्ठा करके डाटा ब्रोकर को बेचने के लिए भेजता है, तो ये गंभीर निजता खतरा बन जाता है। इसके व्यवहार की दिखावट चाहे जो हो, सभी ऐडवेयर को जोखिम मानें।

किस्म 2: कीलॉगर

कीलॉगर(नई विंडो) आपके हर कीस्ट्रोक को रिकॉर्ड करते हैं। वे पासवर्ड, क्रेडिट कार्ड नंबर और निजी संदेश चुराते हैं, फिर उन्हें उसे भेजते हैं जिसने इन्हें लगाया है।

ज़्यादातर कीलॉगर ट्रोजन हॉर्स वायरस के ज़रिए पहुंचाए जाते हैं, जिन्हें अक्सर ट्रोजन कहा जाता है। ये मालवेयर होते हैं जो कानूनी डाउनलोड की तरह दिखते हैं, और इनमें पायरेटेड सॉफ्टवेयर और क्रैक किए गए ऐप सबसे आम जरिये हैं।

जब आप किसी पेड ऐप का क्रैक किया वर्ज़न डाउनलोड करके इंस्टॉल करते हैं, तो सब ठीक लग सकता है: ऐप सामान्य तरीके से काम करता है। लेकिन इसी दौरान कीलॉगर चुपके से आपके कीस्ट्रोक रिकॉर्ड करता रहता है, और कुछ बेहद संवेदनशील चीज़ कैप्चर कर सकता है, जैसे आपकी बैंकिंग लॉगइन जानकारी।

अगर ऐसा होता है, तो नुकसान हो जाने तक आपको कुछ गड़बड़ होने का पता नहीं चलेगा, जब तक आपका बैंक किसी धोखाधड़ी वाले लेन-देन के बारे में अलर्ट न कर दे।

किस्म 3: स्टॉकरवेयर

स्टॉकरवेयर का इस्तेमाल स्थान, संदेश, कॉल और ब्राउज़िंग पे नज़र रखने के लिए होता है। इसे मालिक की जानकारी या मंज़ूरी के बिना किसी डिवाइस पे इंस्टॉल किया जाता है, अक्सर किसी पार्टनर, फैमिली के सदस्य या नियोक्ता द्वारा। दूसरे तरह के स्पाईवेयर के उलट, स्टॉकरवेयर इंस्टॉल करने के लिए फिजिकल एक्सेस ज़रूरी होता है।

पैरेंटल कंट्रोल की तरह बेचे जाने वाले कानूनी ऐप, जैसे mSpy और FlexiSPY, का इस्तेमाल अक्सर बड़े पार्टनर पे बिना मंज़ूरी नज़र रखने के लिए होता है। ये चुपके से चलते हैं, GPS स्थान लॉग करते हैं और संदेश रियल टाइम में पढ़ते हैं।

अगर आपको चिंता है कि आपके डिवाइस पे स्टॉकरवेयर हो सकता है, तो Coalition Against Stalkerware (नई विंडो)गोपनीय मार्गदर्शन और आपके देश के सहायता संगठनों की डायरेक्टरी देता है।

किस्म 4: ज़ीरो-क्लिक मर्सनरी स्पाईवेयर

ज़ीरो-क्लिक स्पाईवेयर डिवाइस के ऑपरेटिंग सिस्टम में कमज़ोरियों का फायदा उठाकर काम करता है, यानी इसे खुद को इंस्टॉल करने के लिए डिवाइस मालिक की ओर से किसी कार्रवाई की ज़रूरत नहीं होती। इसीलिए ये ‘ज़ीरो-क्लिक’ है।

2021 में, Forbidden Stories द्वारा समन्वित और Amnesty International की सहायता से की गई एक प्रसिद्ध जांच(नई विंडो) में कई देशों में पत्रकारों, वकीलों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के डिवाइस पर NSO Group का Pegasus स्पाईवेयर पाया गया। पीड़ितों ने कुछ भी क्लिक नहीं किया था: एक iMessage कमजोरी के ज़रिए उनके डिवाइस की छेड़छाड़ की गई थी।

Pegasus जैसे मर्सनरी स्पाईवेयर के लिए विकसित किए गए एक्सप्लॉइट चेन अब सिर्फ दमनकारी राज्यों ही नहीं, बल्कि साइबर अपराधियों द्वारा भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं। सिर्फ हाई-वैल्यू उपयोगकर्ता ही नहीं, बल्कि आम उपयोगकर्ताओं को भी खतरा है।

हर प्रकार से किसे सबसे ज़्यादा खतरा है

ऐडवेयर: विज्ञापन से चलने वाले मुफ्त ऐप इस्तेमाल करने वाला हर व्यक्ति ऐडवेयर के संक्रमण के खतरे में है।

कीलॉगर: ऐप या टूल डाउनलोड करने वाला हर व्यक्ति खतरे में है, लेकिन जो लोग टोरेंट साइटों जैसे अनौपचारिक स्रोतों से पायरेटेड कंटेंट डाउनलोड करते हैं, वे खास तौर पर कमजोर होते हैं।

स्टॉकरवेयर: स्पाईवेयर का सबसे खास तौर पर लक्षित प्रकार। आम निशानों में नियंत्रण वाले रिश्तों में रहने वाले लोग और घुसपैठिया निगरानी नीतियों के तहत काम करने वाले कर्मचारी शामिल हैं।

Zero-click: पत्रकार, कार्यकर्ता, वकील और अधिकारी जैसे हाई-वैल्यू निशानों को खास तौर पर सतर्क रहने की ज़रूरत है, लेकिन स्मार्टफोन रखने वाला कोई भी निशाना बन सकता है।

व्यवसायों को ऐडवेयर, कीलॉगर और zero-click स्पाईवेयर से कई गुना खतरा होता है। सिर्फ एक कर्मचारी के डिवाइस पर मौजूद कीलॉगर शेयर किए गए प्रमाण और सिस्टम की छेड़छाड़ कर सकता है।

अगर आपका व्यवसाय संवेदनशील ग्राहक डाटा संभालता है, तो यह सिर्फ छेड़छाड़ के शिकार व्यक्ति को ही प्रभावित नहीं करेगा: इससे आप गंभीर कानूनी ज़िम्मेदारी के दायरे में आ सकते हैं।

कैसे पता करें कि आपके डिवाइस पर स्पाईवेयर है

स्पाईवेयर ज़्यादातर अदृश्य रूप से काम करता है। इसलिए हो सकता है कि आप ये पक्के तौर पे न बता पाएं कि आपके डिवाइस पे स्पाईवेयर है या नहीं।

लेकिन कुछ संकेत हैं जिन पे ध्यान दिया जा सकता है:

  • इस्तेमाल के तरीके में कोई बदलाव न होते हुए भी आपकी बैटरी आम से ज़्यादा तेज़ी से खत्म हो रही है
  • आपका मोबाइल डाटा इस्तेमाल अचानक और बिना किसी वजह के बढ़ जाता है 
  • आपका डिवाइस बेकार पड़ा है, फिर भी गर्म हो रहा है, या आपकी स्क्रीन, माइक्रोफोन या कैमरा बिना किसी वजह के चालू हो जाता है
  • आपकी ऐप लिस्ट में अनजान ऐप दिख रहे हैं और आपको उन्हें इंस्टॉल करने की याद नहीं है

हमने ये बताने वाले संकेतों की एक गहरी और विस्तृत लिस्ट भी लिखी है कि आपके फोन पे वायरस है.

Zero-click मर्सनरी स्पाईवेयर खास तौर पर खतरनाक है, क्योंकि इसमें इनमें से कोई भी संकेत नहीं दिख सकता। अगर आपके पेशे की वजह से आपको ज़्यादा खतरा है, तो बेहतर रास्ता ये है कि Access Now की Digital Security Helpline(नई विंडो) या Amnesty International के Security Lab(नई विंडो) से विश्लेषण मांगा जाए।

अपने डिवाइस से स्पाईवेयर कैसे हटाएं

आपके मन में पहला खयाल स्पाईवेयर हटाने वाला टूल डाउनलोड करने का हो सकता है। ये बिल्कुल स्वाभाविक है, लेकिन जल्दबाज़ी न करें: हो सकता है कि आप उसी समस्या को पैदा कर दें या उसे और बढ़ा दें जिसे हल करने की कोशिश कर रहे हैं।

Android उपयोगकर्ताओं के लिए, हमने अपने डिवाइस से मालवेयर हटाने की एक विस्तृत, स्टेप-बाय-स्टेप गाइड लिखी है।

iPhone उपयोगकर्ताओं के लिए, iOS तीसरें-पार्टी ऐप स्कैनिंग को सीमित करता है, इसलिए आपको अपना iOS तुरंत अपडेट करना चाहिए, सेटिंगजनरलVPN और डिवाइस मैनेजमेंट के तहत इंस्टॉल की गई प्रोफाइल देखनी चाहिए और फिर Apple सहायता से संपर्क करना चाहिए।

अपने डिवाइस को संक्रमण से कैसे बचाएं

आम तौर पे, सुरक्षा की नाकामी किसी असामान्य चीज़ की वजह से नहीं होती। वो आम आदतों की वजह से होती है, जैसे पासवर्ड दोबारा इस्तेमाल करना, एन्क्रिप्शन नहीं वाले कनेक्शन और अनौपचारिक स्रोतों से डाउनलोड किया गया सॉफ्टवेयर।

इन जालों में फंसने से बचें तो आप किसी भी तरह के स्पाईवेयर के खतरे में कम रहेंगे।

कोई ऐप डाउनलोड करने से पहले

सिर्फ ऑफिशियल स्टोर से ऐप इंस्टॉल करें: मोबाइल पे ऑफिशियल ऐप स्टोर ही इस्तेमाल करें, डेवलपर का नाम ज़रूर देखें, और डेस्कटॉप सॉफ्टवेयर सिर्फ डेवलपर की अपनी साइट से डाउनलोड करें।

“मुफ्त” टूल से सावधान रहें, स्पाईवेयर-रोधी टूल समेत: ऊपर देखें।

अपना ऑपरेटिंग सिस्टम अपडेट रखें: मालवेयर की हर किस्म ओएस की ज्ञात कमजोरियों को निशाना बनाती है। अपना ओएस अपडेट करने से ये कमजोरियां पैच हो जाती हैं। खास तौर पर Pegasus जैसे zero-click एक्सप्लॉइट के खिलाफ यही आपका सबसे अच्छा बचाव है।

ऐप अनुमतियों की समय-समय पे समीक्षा करें: ऐप के काम से मेल न खाने वाली अनुमतियां वापस लें। सेटिंग → निजता → Permission Manager (Android) या सेटिंग → निजता (iOS)।

किसी भी ऐप को इस्तेमाल करते वक्त

हर खाते के लिए अलग पासवर्ड इस्तेमाल करें: जब हर खाते का प्रमाण अनोखा होता है, तो कीलॉगर एक खाता पकड़कर कई खातों को नहीं पकड़ सकते। Proton Pass एक सुरक्षित पासवर्ड मैनेजर है, जो zero-knowledge एन्क्रिप्शन के साथ अनोखे पासवर्ड बनाता और स्टोर करता है, यानी आपके प्रमाण Proton के सर्वर तक पहुंचने से पहले एन्क्रिप्ट किए जाते हैं।

पब्लिक वाई-फाई पे VPN इस्तेमाल करें: VPN आपको उन पब्लिक वाई-फाई होस्ट से बचाएगा, जो आपकी ब्राउज़िंग हिस्ट्री ऐड-टेक कंपनियों को बेचकर अपनी “मुफ्त” सर्विस से कमाई करते हैं। Proton VPN जैसा सुरक्षित VPN(नई विंडो) आपके कनेक्शन को एन्क्रिप्ट करता है, ताकि बीच में पकड़ा गया डाटा पढ़ा न जा सके।