Android उपयोगकर्ता के तौर पे आपको लग सकता है कि Google प्ले स्टोर से ऐप डाउनलोड करना सुरक्षित है। ये समझ में आता है, लेकिन पूरी तरह सही नहीं है।

सख्त सुरक्षा जांच की वजह से प्ले स्टोर, Android ऐप पाने की सबसे सुरक्षित जगह है, लेकिन पूरी तरह सुरक्षित नहीं। Google का ऐप स्टोर साइबर अपराधियों और उन डेवलपर्स, जो आपके डाटा से पैसे कमाते हैं (और इसलिए उसमें छेड़छाड़ करते हैं), दोनों के लिए एक बड़ा निशाना है, और ये कभी भी 100% जोखिम मुक्त नहीं होगा।

इसीलिए ऐप चुनते वक्त सतर्क रहना ज़रूरी है: डाउनलोड करने से पहले ऐप्स की जांच करें, पहले से डाउनलोड किए गए ऐप्स की समीक्षा करें, और लीक की स्थिति में तैयारी के लिए अपने डिवाइस का डाटा सुरक्षित रखें।

दुर्भावनापूर्ण ऐप Google को कैसे चकमा देते हैं

पिछले साल Google ने 1.75 मिलियन नीति-उल्लंघन करने वाले ऐप्स को प्रकाशित होने से रोका(नई विंडो) और 80,000 से ज़्यादा डेवलपर खातों पर बैन लगाया। ज़्यादातर Android डिवाइस में पहले से मौजूद Google Play Protect(नई विंडो) ने 266 मिलियन जोखिम भरी इंस्टॉलेशन कोशिशों को ब्लॉक किया।

लेकिन Google इतना ही कर सकता है। साइबर अपराधी लगातार Google के प्रकाशन-पूर्व और इंस्टॉलेशन-पूर्व स्कैन को बायपास करने के तरीके ढूंढते रहते हैं।

आम तरीके:

  • समीक्षा के लिए साफ ऐप्स सबमिट करना और फिर रिमोट अपडेट के ज़रिए दुर्भावनापूर्ण गतिविधि भेजना।
  • दुर्भावनापूर्ण ऐप्स को आसान (और वाकई काम करने वाले) यूटिलिटी ऐप्स की तरह दिखाना, जैसे डॉक्यूमेंट स्कैनर या PDF रीडर।
  • दुर्भावनापूर्ण ऐप्स को सुरक्षा या एंटीवायरस ऐप की तरह दिखाना, ये खास तौर पे चालाकीभरा और असरदार तरीका है। अगर उपयोगकर्ता किसी समस्या को जल्दी ठीक करवाना चाहता है, तो इंस्टॉल करने से पहले जांच-पड़ताल करने की संभावना कम होती है।

प्ले स्टोर पे हर दिन 2,029 ऐप्स(नई विंडो) प्रकाशित होते हैं, इसलिए कुछ दुर्भावनापूर्ण ऐप्स का Google के जाल से बच निकलना तय है। पिछले साल Bitdefender ने एक ऐड फ्रॉड कैंपेन कोडनेम Vapor(नई विंडो) का पर्दाफाश किया था, जिसमें कम से कम 331 दुर्भावनापूर्ण ऐप्स शामिल थे, जिनमें से कुछ उपयोगकर्ताओं के प्रमाण और क्रेडिट कार्ड डाटा इकट्ठा कर रहे थे।

इन ऐप्स को प्ले स्टोर से 60 मिलियन बार से ज़्यादा डाउनलोड किया गया।

वैध ऐप्स भी आपके डाटा को खतरे में डाल सकते हैं

प्ले स्टोर पे दुर्भावनापूर्ण ऐप्स ही एकमात्र खतरा नहीं है। कुछ वैध ऐप्स भी हैं जो चुपचाप आपका पर्सनल और ट्रैकिंग डाटा इकट्ठा करके स्टोर करते हैं, और उसे ऐड नेटवर्क जैसे थर्ड पार्टी के साथ शेयर करते हैं।

पिछले साल NowSecure ने iOS और Android पे 25,000 ऐप्स टेस्ट किए(नई विंडो) और पाया कि टेस्ट किए गए 75% iOS ऐप्स और 70% Android ऐप्स, सेंसिटिव डाटा और ट्रैकिंग डोमेन दोनों इकट्ठा कर रहे थे।

Google ये ऐप्स प्ले स्टोर पे इसलिए अनुमति देता है, क्योंकि इनके डेवलपर ऐप के प्रोडक्ट पेज के डाटा सेफ्टी सेक्शन में खुलेआम बताते हैं कि वो कौन सा डाटा और क्यों इकट्ठा करते हैं।

Google ने 2025 में अपनी नीति सख्त की और 2,55,000 ऐप्स को(नई विंडो) सेंसिटिव डाटा तक “बहुत ज़्यादा एक्सेस” पाने से रोका। फिर भी हज़ारों ऐप्स बिना ब्लॉक रहते हैं, जो Google की नीति के दायरे में रहकर डाटा इकट्ठा करते हैं, लेकिन उपयोगकर्ताओं की उम्मीद से कहीं ज़्यादा।

ये सिर्फ निजता की चिंता का विषय नहीं है, बल्कि खतरनाक भी है. वैध लेकिन डाटा के भूखे ऐप्स रोज़ उपयोगकर्ता डाटा को ऐडवरटाइज़िंग SDK और एनालिटिक्स पार्टनर्स के साथ शेयर करते हैं। फिर ये थर्ड पार्टी वो डाटा बेईमान डाटा ब्रोकर्स तक पहुंचा सकते हैं।

इस चेन का हर लिंक एक संभावित लीक पॉइंट है। अगर आपके डाटा के साथ छेड़छाड़ हो जाए, तो हो सकता है कि आपको देर होने तक पता ही न चले।

किन बातों का ध्यान रखें: पांच पॉइंट की चेकलिस्ट

बैन किए गए (और जिन्हें बैन किया जाना चाहिए) ऐप्स की कोई भरोसेमंद, अप-टू-डेट ब्लैकलिस्ट मौजूद नहीं है, जिसे आप देख सकें।

लेकिन जोखिम भरे ऐप्स पहचानने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखा जा सकता है:

  1. डाटा सेफ्टी सेक्शन चेक करें: क्या डेवलपर ने समझाया है कि वो कौन सा डाटा इकट्ठा करते हैं और उसका इस्तेमाल कैसे करेंगे? खाली डाटा सेफ्टी सेक्शन तो बड़ा रेड फ्लैग है ही, लेकिन ऐसी नीति भी रेड फ्लैग है जो ऐप के काम से मेल नहीं खाती। टॉर्च ऐप को आपके कॉन्टैक्ट्स जानने की ज़रूरत नहीं होनी चाहिए।
  2. इंस्टॉल के वक्त परमिशन्स पढ़ें: ऐप इंस्टॉल करने के बाद वो अक्सर आपके स्थान, कॉन्टैक्ट्स, स्टोरेज, स्थान और/या माइक्रोफोन तक एक्सेस मांगता है। कभी-कभी ये समझ में आता है, लेकिन कई बार ये ज़्यादा लग सकता है। याद रखें, क्या वॉलपेपर ऐप को आपका स्थान जानने की ज़रूरत है?
  3. डेवलपर का नाम और इतिहास चेक करें: क्या डेवलपर एक जानी-पहचानी कंपनी है, जिसके पास और प्रकाशित ऐप्स और वेब पर मौजूदगी है? या फिर ये एक ऐसा खाता है जिसके नाम सिर्फ ये एक ऐप है, और पृष्ठभूमि समझने के लिए कोई सबूत नहीं? 
  4. चेक करें कि रिव्यू असली हैं या नहीं: फेक रिव्यू अक्सर साफ दिखने वाले पैटर्न में दिखते हैं। छोटे वक्त में पोस्ट किए गए पांच स्टार रिव्यू की भरमार एक जाना-माना मैनिपुलेशन तरीका है। पॉजिटिव रिव्यू के बीच मौजूद क्रिटिकल रिव्यू और तारीखों की चौड़ी रेंज चेक करें।
  5. फ्री यूटिलिटी ऐप्स से सावधान रहें: दुर्भावनापूर्ण ऐप्स और डाटा इकट्ठा करने वाले ऐप्स, दोनों के सबसे आम छद्म रूप फ्री फ्लैशलाइट और बैटरी ऐप्स, कीबोर्ड ऐप्स, फ्री फोटो एडिटर, स्थान तक एक्सेस वाले वेदर ऐप्स और ऐड-सपोर्टेड गेम्स हैं। अगर कोई ऐप फ्री है और आपको समझ नहीं आ रहा कि उसका फंक्शन डेवलपर्स के लिए पैसे कैसे कमा सकता है, तो जवाब ये हो सकता है कि आपका डाटा ही उनका रेवेन्यू मॉडल है।

अपने डाटा की रक्षा कैसे करें

चाहे आपने पूरी सावधानी बरत ली हो, फिर भी हो सकता है कि आप प्ले स्टोर से कोई दुर्भावनापूर्ण ऐप डाउनलोड कर लें। लेकिन सही सुरक्षा उपायों के साथ आप उस ऐप से होने वाले नुकसान को सीमित कर सकते हैं।

Proton VPN के साथ अपने कनेक्शन को एन्क्रिप्ट करें

दुर्भावनापूर्ण ऐप्स अक्सर आपका डाटा (जिसमें आपका ब्राउज़िंग व्यवहार, स्थान और डिवाइस आइडेंटिफायर शामिल हैं) एन्क्रिप्शन नहीं किए गए कनेक्शन पे भेजने की कोशिश करते हैं।

यहां आता है Proton VPN: एक सुरक्षित VPN(नई विंडो) जो

  • आपके फोन के आने-जाने वाले सारे डाटा को नेटवर्क लेवल पे एन्क्रिप्ट करता है, जिससे ब्राउज़िंग व्यवहार, स्थान और डिवाइस आइडेंटिफायर को भेजना और रोकना काफी मुश्किल हो जाता है
  • पब्लिक वाई-फाई पे नेटवर्क लेवल की निगरानी को रोकता है (छेड़छाड़ किए गए ऐप्स के लिए एक आम अटैक वेक्टर(नई विंडो)
  • उन डाटा ट्रांसमिशन को ब्लॉक करता है जिन पे एनालिटिक्स SDK निर्भर होते हैं (बिल्ट-इन ट्रैकर एड-ब्लॉकर NetShield(नई विंडो) के ज़रिए), जिससे डेवलपर्स थर्ड पार्टी के साथ जितना डाटा शेयर कर सकते हैं, वो सीमित हो जाता है

अपने प्रमाणों की रक्षा करें Proton Pass के साथ

दुर्भावनापूर्ण ऐप्स अदृश्य कीलॉगर और फिशिंग ओवरले का इस्तेमाल करके लॉगइन प्रमाण चुराते हैं। अगर आप, जैसा कई लोग करते हैं, कई खातों पे एक ही पासवर्ड दोबारा इस्तेमाल करते हैं, तो ये खास तौर पे नुकसानदेह हो सकता है।

Proton Pass एक सुरक्षित पासवर्ड मैनेजर है जो दोनों समस्याओं का समाधान करता है:

  • आपके बनाए हर खाते के लिए यूनीक पासवर्ड बनाता है, ताकि अगर एक लीक हो जाए, तो सब लीक न हों
  • पासवर्ड, पासकी और क्रेडिट कार्ड को शुरु-से-अंत तक, ज़ीरो-नॉलेज एन्क्रिप्शन के साथ सुरक्षित रखता है। इसका मतलब है कि आपके प्रमाण डिवाइस छोड़ने से पहले आपके डिवाइस पे ही एन्क्रिप्ट किए जाते हैं, और Proton तक उन तक एक्सेस नहीं कर सकता।

जानें मालवेयर कैसे हटाएं

अगर आपको चिंता है कि आपके डिवाइस के साथ छेड़छाड़ हो सकती है, या आप जानना चाहते हैं कि ऐसा होने पे क्या देखना चाहिए, तो फोन के हैक होने के संकेतों को पहचानना ज़रूर सुनिश्चित करें।