अपडेट: 4 मार्च तक की जानकारी के मुताबिक, Apple ने अब ब्रिटेन सरकार को कानूनी चुनौती दी है। हालांकि, इससे इस बात नहीं बदलती कि Apple ने सभी कानूनी रास्तों को आजमाने से पहले ही आदेश का पालन करके ब्रिटेन के उपयोगकर्ताओं के लिए Advanced Data Protection हटा दिया था।

ब्रिटेन सरकार ने Investigatory Powers Act 2016 के तहत iCloud डाटा तक एक्सेस देकर एन्क्रिप्शन को कमज़ोर करने का आदेश Apple को दिया।

Apple का जवाब? नोटिस को अदालत में चुनौती देने की बजाय, कंपनी ने अपनी Advanced Data Protection (ADP) खासियत हटा दी(नई विंडो), जिससे ब्रिटेन में iCloud इस्तेमाल करने वालों के लिए शुरु-से-अंत तक एन्क्रिप्शन खत्म हो गया।

1990 के दशक में शुरू हुई मुहिम में एन्क्रिप्शन और निजता पर यह सबसे ताज़ा हमला है, जिसकी अक्सर अगुवाई उदार लोकतंत्रों ने की, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और EU शामिल हैं। अब तक, ज़्यादातर टेक कंपनियों ने सरकारी दखल के खिलाफ अपने उपयोगकर्ताओं के अधिकारों के लिए सफलतापूर्वक लड़ाई लड़ी है। Apple का फैसला उन पहले मामलों में से एक है, जब किसी बड़े लोकतंत्र ने किसी टेक कंपनी पर एन्क्रिप्शन सुरक्षा उपायों को पलटने का दबाव सफलतापूर्वक डाला। चूंकि Apple दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे अमीर कंपनियों में से एक है, ऐसी कंपनी जो निजता को अपनी प्राथमिकता बताती थी, यह विदेश की दूसरी सरकारों और Apple के भविष्य के फैसलों, दोनों के लिए एक चिंताजनक मिसाल कायम करता है।

साफ तौर पर बता दें, Proton एक अलग रास्ता अपनाएगा। हमने कभी अपने एन्क्रिप्शन से छेड़छाड़ नहीं की और कभी नहीं करेंगे। हमने रूस, चीन या भारत के दबाव में ऐसा नहीं किया, और ब्रिटेन के लिए भी नहीं करेंगे। अगर हम इसी स्थिति में होते, तो बैकडोर जोड़ने से इनकार करते, लेकिन सामने का दरवाज़ा खोलकर आदेश का पालन भी नहीं करते।

ब्रिटेन सरकार ब्रिटिश नागरिकों की सुरक्षा को खतरे में डाल रही है

जब ब्रिटेन सरकार को टेक निवेश के लिए सहायक माहौल बनाने और कारोबारों के फलने-फूलने को बढ़ावा देने पर ध्यान देना चाहिए था, तब यह एन्क्रिप्शन विरोधी मुहिम इसके उलटा असर डालेगी।

शुरु-से-अंत तक एन्क्रिप्शन सुरक्षा के लिए बेहद ज़रूरी है, जो लोगों को पहचान की चोरी, वित्तीय धोखाधड़ी और बुरी नीयत वाले लोगों की जासूसी जैसे साइबर खतरों से बचाता है। कारोबारों के लिए, एन्क्रिप्शन बैंकिंग और वित्त जैसे अहम उद्योगों की सुरक्षा के लिए बेहद अहम है। इसके बिना, संवेदनशील डाटा हैकरों, दूसरी कंपनियों और यहां तक कि शत्रुतापूर्ण सरकारों के सामने उजागर हो जाता है। एन्क्रिप्शन को कमज़ोर करना सिर्फ निजता और सुरक्षा को नुकसान नहीं पहुंचाता — यह एक ऐसा रास्ता है जो पूरे कारोबारी और डिजिटल तंत्र को कम सुरक्षित बनाता है और सबको साइबर अपराध के लिए ज़्यादा आसान शिकार बना देता है।

पिछले कुछ सालों में हमने यूरोप और अमेरिका(नई विंडो) भर की संस्थाओं पर साइबर हमलों की भारी बढ़ोतरी देखी है। ऐसे माहौल में, एन्क्रिप्शन राष्ट्रीय सुरक्षा की पहली कतार है और इसे कमज़ोर नहीं, बल्कि मज़बूत किया जाना चाहिए। अमेरिकी Cybersecurity and Infrastructure Security Agency ने यही माना और सलाह दी कि सभी ज़्यादा निशाने पर रहने वाले लोग शुरु-से-अंत तक एन्क्रिप्ट की गई सेवाएं इस्तेमाल करें(नई विंडो)

ब्रिटेन सरकार का तरीका इन खतरों को नज़रअंदाज़ करता है और कारोबारों और लोगों को खतरे में डालता है। हालांकि, भले ही सरकारें जो चाहें कानून बना लें, गणित के नियम नहीं बदलते। इसीलिए हम शुरु-से-अंत तक एन्क्रिप्शन पर भरोसा करते हैं, जो या तो सबके लिए सुरक्षित होता है या फिर बिल्कुल सुरक्षित नहीं। सांसदों और टेक कंपनियों को एन्क्रिप्शन पर डटे रहना चाहिए, क्योंकि ऐसा कोई बैकडोर नहीं होता जिससे सिर्फ अच्छे लोग अंदर आ सकें।

निजता पर Apple का दोहरा मापदंड

ब्रिटेन सरकार के नोटिस को चुनौती न देने का Apple का फैसला बेहद चिंताजनक है और निजता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। कंपनी खुद को निजता की रक्षक के रूप में ज़ोर-शोर से मार्केट करती है और प्रमुख “Privacy. That’s iPhone” विज्ञापन चलाती है। अगर Apple अपने दावे के मुताबिक निजता को प्राथमिकता देता है, तो इस नोटिस को अदालत में क्यों नहीं चुनौती देता, जैसा कि उसने दूसरे सरकारी फैसलों के खिलाफ(नई विंडो) किया?

Apple ने अपने फैसले में पारदर्शिता पर ज़ोर दिया है और तर्क दिया है कि यह नतीजा साफ तौर पर बैकडोर बनाने से बेहतर है। हालांकि, पारदर्शिता से Apple की कार्रवाई का व्यावहारिक असर नहीं बदलता — ADP को हटाकर, Apple ने ब्रिटेन के अधिकारियों के लिए उपयोगकर्ताओं का निजी डाटा एक्सेस करना आसान बना दिया। भले ही उसे बैकडोर नहीं मिला, Home Office ने अपना असली मकसद हासिल कर लिया।

इस स्थिति को संभालने में Apple का तरीका चीन सरकार के दबाव से निपटने के उसके अंदाज़ की याद दिलाता है। 2017 में, Apple ने दर्जनों VPN ऐप(नई विंडो) App Store के चीनी वर्ज़न से हटा दिए थे, और पिछले ही साल, यानी 2024 में, उसने कई एन्क्रिप्ट किए गए मैसेजिंग ऐप(नई विंडो), जिनमें Signal और WhatsApp शामिल हैं, हटा दिए। यह एक तस्वीर दिखाता है, जिसमें Apple बार-बार अपने उपयोगकर्ताओं की निजता से छेड़छाड़ करता है, बजाय इसके कि वह अपनी सप्लाई चेन या बाज़ारों तक एक्सेस दांव पर लगाए।

इससे एक अहम सवाल खड़ा होता है: अगर सरकारों को दिख जाए कि वे Apple पर दबाव डाल सकती हैं, तो अमेरिकी सरकार को एन्क्रिप्शन कमज़ोर करने की मांग करने से क्या रोकेगा? या भारत को? या EU को? ब्रिटेन में Apple के कदम एक साफ संदेश भेजते हैं — निजता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता वहीं खत्म हो जाती है जहां से सरकारी दबाव शुरू होता है।

Proton कभी एन्क्रिप्शन को कमज़ोर नहीं करेगा

Proton पहले भी रूस से ऐसी ही मांगों का सामना कर चुका है। हमने इनकार किया, तब भी जब इसका मतलब सरकार द्वारा ब्लॉक होना था।

ब्रिटेन अब एन्क्रिप्ट किए गए डाटा तक बैकडोर मुहैया कराने की मांग करके इन तानाशाही शासनों की राह पर चल रहा है। हम इन मांगों का विरोध करने के लिए तैयार हैं, जैसा कि हमने दूसरी जगहों पर किया है।

सरकारी दखल के सामने निजता और आज़ादी के लिए लड़ने का हमें अनुभव है। रूस, चीन और ईरान में सेवाएं देने के अलावा, Proton ने 2021 में ईमेल निजता को कमज़ोर करने की स्विस सरकार की कोशिश को भी सफलतापूर्वक चुनौती दी

हम ये रुख इसलिए अपना सकते हैं क्योंकि स्विस कंपनी होने के नाते हमें मज़बूत कानूनी सुरक्षा हासिल है। स्विस संघीय संविधान(नई विंडो) साफ तौर पर निजता के अधिकार को कायम करता है, और दूसरे लोकतंत्रों के उलट, स्विट्ज़रलैंड ने कभी भी शुरु-से-अंत तक एन्क्रिप्शन को निशाना बनाने वाले कानून पर विचार नहीं किया। स्विट्ज़रलैंड EU या अमेरिका के अधिकार क्षेत्र में भी नहीं है, यानी अगर वे सरकारें शुरु-से-अंत तक एन्क्रिप्शन को कमज़ोर करने वाले कानून भी बना दें, तो वे स्विट्ज़रलैंड में लागू नहीं होंगे।

निजता का भविष्य आपके हाथों में है

सरकारें एन्क्रिप्शन को कमज़ोर करने की कोशिश करती रहेंगी, जब तक लोग और कंपनियां इसका विरोध नहीं करतीं। निजता कोई विशेषाधिकार नहीं — यह एक बुनियादी अधिकार है। लेकिन अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए।

हमने ऐसी दुनिया में निजता की रक्षा के लिए Proton बनाया, जहां सरकारें और कंपनियां इसे खत्म करने की कोशिश करती हैं। हम शुरु-से-अंत तक एन्क्रिप्ट की गई सेवाएं देते हैं, जो सरकारों या टेक दिग्गजों के बजाय लोगों को उनके अपने डाटा का नियंत्रण देती हैं। जब हमारी ज़्यादातर निजी जानकारी ऑनलाइन स्टोर की जाती है, तब उसे शुरु-से-अंत तक एन्क्रिप्शन से सुरक्षित करना बेहद ज़रूरी है।

उपभोक्ताओं के तौर पर, हम अपने वॉलेट से वोट देते हैं। अगर आप ब्रिटेन में निजता का ध्यान रखने वाले iCloud उपयोगकर्ता हैं, तो हम आपको ऐसी सेवाओं की सहायता करने का सुझाव देते हैं जो निगरानी राज्य बनाने में मदद करने से इनकार करती हैं। अगर हम कुछ नहीं करते, तो ब्रिटेन का फैसला अकेला मामला नहीं रहेगा — यह एक नया वैश्विक मानक बन जाएगा।

Proton मानता है कि निजता एक बुनियादी इंसानी अधिकार है और एन्क्रिप्शन उसे सुरक्षित रखने का सबसे अच्छा तरीका है। यह ऐसी लड़ाई नहीं जिससे हम भागेंगे — ब्रिटेन में नहीं। कहीं भी नहीं।