United Kingdom में Apple के iPhone के सबसे नए अपडेट में एक नई शर्त आई है: कुछ उपयोगकर्ताओं को अब कुछ खासियतों की एक्सेस के लिए सच्ची करना होगा कि वो 18 साल से ज़्यादा के हैं(नई विंडो), जिसके लिए क्रेडिट कार्ड या सरकार जारी की गई ID इस्तेमाल की जाती है।

ये बदलाव Online Safety Act(नई विंडो) के तहत नियामकों के दबाव के बाद आया है, जिसका मकसद ऑनलाइन बच्चों की सुरक्षा के प्रावधानों को मजबूत करना था. अब तक ये कोशिशें ज़्यादातर वेबसाइटों पे फोकस रही हैं, जहां उम्र की जांच असमान रूप से लागू होती है और अक्सर उन्हें आसानी से टाला भी जा सकता है.

Apple का तरीका उम्र सत्यापन को ऑपरेटिंग सिस्टम में ही ले जाता है, यानी डिवाइस ये तय कर सकता है कि उपयोगकर्ता किसी ऐप या सेवा तक पहुंचने से पहले उसे क्या एक्सेस मिलेगा.

ध्यान देने वाली बात ये है कि Online Safety Act के तहत Apple को ऐसे उपाय लागू करने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि ये कानून ऐप स्टोर्स या हार्डवेयर बनाने वालों पे लागू नहीं होता (इसकी Advanced Data Protection खासियत के उलट, जो iCloud में स्टोर किए गए डाटा के लिए वैकल्पिक शुरु-से-अंत तक एन्क्रिप्शन देती है और जिसे हाल ही में UK के ग्राहकों के लिए हटा दिया गया था)।

ये बदलाव एक्सेस को पहचान से जोड़ते जा रहे हैं, और इंटरनेट को ऐसे सिस्टम के करीब ले जा रहे हैं जहां हिस्सा लेना इस बात पे निर्भर करता है कि आप कौन हैं।

इसी तरह के प्रस्ताव और जगहों पे भी सामने आ रहे हैं. United States में California ने एक कानून पास किया है जिसमें ऑपरेटिंग सिस्टम को उम्र की जानकारी इकट्ठा करके ऐप्स के साथ शेयर करना ज़रूरी है, जबकि दूसरे राज्यों के कानून बनाने वाले इसी तरह के उपायों पे विचार कर रहे हैं.

उम्र सत्यापन अब ऑपरेटिंग सिस्टम में

इस अपडेट के तहत, उपयोगकर्ता क्रेडिट कार्ड लिंक करके या सरकार जारी की गई ID स्कैन करके अपनी उम्र की सच्ची कर सकते हैं। जो लोग सत्यापन नहीं करते, उन्हें कंटेंट पर पाबंदियां अपने-आप लागू होती दिख सकती हैं।

ये नीति UK के नियामकों की उस बड़ी कोशिश का हिस्सा है जिसका मकसद बच्चों को ऑनलाइन हानिकारक कंटेंट से दूर रखना है। जवाब में कई वेबसाइटें पहले ही उम्र की जांच शुरू कर चुकी हैं। Apple का फैसला और आगे जाता है। Online Safety Act ऑपरेटिंग सिस्टम या ऐप स्टोर लेवल पे उम्र सत्यापन की मांग नहीं करता।

उम्र की जांच ऑनलाइन बहुत समय से मौजूद है, लेकिन उन्हें अक्सर आसानी से टाला जा सकता था. सत्यापन को ऑपरेटिंग सिस्टम में ले जाना ये समीकरण बदल देता है. हर वेबसाइट के अलग-अलग उम्र की जांच करने की जगह, ऑपरेटिंग सिस्टम एक बार उपयोगकर्ता की उम्र तय कर सकता है और वो सिग्नल सभी ऐप्स में शेयर कर सकता है.

उम्र सत्यापन का तरीका भी मायने रखता है। सरकारी ID या क्रेडिट कार्ड उपयोगकर्ता की पहचान और उसके डिवाइस के बीच एक स्थायी कनेक्शन बनाता है। एक बार वो कनेक्शन बन जाए, तो उसे दोबारा बनाने की ज़रूरत नहीं पड़ती। सिस्टम पीछे से उस पे भरोसा कर सकता है।

जानकारी और सेवाओं की एक्सेस तेजी से पहचान से जुड़ रही है

जो सिस्टम उम्र की सच्ची करता है, उसे पहचान से जुड़ी दूसरी चीज़ों की सच्ची करने के लिए भी बनाया जा सकता है। स्थान और राष्ट्रीयता इनमें सबसे साफ उदाहरण हैं। इसका असर इस बात पे पड़ता है कि सीमाओं के पार एक्सेस कैसे संभाला जाए।

इंटरनेट अब भी बहुत सी बेतरतीबी के साथ चलता है। कुछ उपयोगकर्ता अपने इलाके के बाहर की सेवाओं को एक्सेस कर पाते हैं या ऐसे ऐप डाउनलोड कर पाते हैं जो उनकी जगह आधिकारिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। ये गैप इसलिए बने रहते हैं क्योंकि पहचान को सिस्टम लेवल पे लगातार लागू नहीं किया जाता।

जब पहचान एक्सेस लेयर का हिस्सा बन जाती है, तो ये बेतरतीबी सिमट जाती है। जो डिवाइस ये जांच सकता है कि उपयोगकर्ता कौन है, उसका इस्तेमाल ये तय करने के लिए भी किया जा सकता है कि उसकी जगह के हिसाब से उसे क्या एक्सेस करने की इजाजत है।

UK से बाहर इसका क्या मतलब है

ज़्यादातर उपयोगकर्ताओं के लिए अपनी उम्र की सच्ची करना एक छोटी-मोटी दिक्कत होगी। लेकिन इसके लंबे समय के असर कम दिखते हैं।

जब ऐप्स और सेवाओं की एक्सेस सच्ची की गई पहचान पे निर्भर होती है, तो लागू करना ज़्यादा एकसार हो जाता है। पाबंदियों को ज़्यादा एकरूपता के साथ लागू किया जा सकता है और अलग-अलग प्लैटफॉर्म पे निर्भर रहना कम हो जाता है।

ये उन माहौलों में और भी ज़रूरी है जहां जानकारी की एक्सेस पहले से सीमित है। जो टूल्स निजी संवाद या बड़े इंटरनेट एक्सेस को सक्षम करें, उनका इस्तेमाल अक्सर इस बात पे निर्भर करता है कि उन्हें किसी अतिरिक्त जांच के बिना इंस्टॉल करके इस्तेमाल किया जा सके।

अगर ऐप स्टोर्स की एक्सेस पहचान से जुड़ जाती है, तो ये चैनल नियंत्रित करना आसान हो जाता है। क्योंकि ये नियंत्रण डिवाइस के अंदर डाले जाते हैं, उन्हें आसानी से टाला नहीं जा सकता। ये शर्तें सिस्टम के साथ ही चलती हैं।

क्या ये बड़े बदलाव की शुरुआत है?

ऑपरेटिंग सिस्टम लेवल पे उम्र सत्यापन की शुरुआत इस बात को दिखाती है कि डिजिटल एक्सेस कैसे बनाया जाता है, उसमें एक बड़ा बदलाव आ रहा है। सत्यापन सिस्टम के कोर के और करीब जा रहा है, और पहचान ज़्यादा से ज़्यादा मौकों पे एक्सेस की शर्त बनती जा रही है।

एक बार ये इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो जाए, तो उसे उम्र से आगे भी लागू किया जा सकता है। इन्हीं तरीकों का इस्तेमाल दूसरी पाबंदियां लागू करने के लिए किया जा सकता है, सेवाओं के पार और सीमाओं के पार। समय के साथ, ये सिस्टम बुनियाद का हिस्सा बन जाते हैं और तय करते हैं कि कौन क्या एक्सेस कर सकता है और किन शर्तों पे।