हर बार जब आप वेब ब्राउज़ करते हैं, आपकी गतिविधि आपके इंटरनेट सेवा प्रदाता(नई विंडो) (ISP) से गुज़रती है। एन्क्रिप्शन ISPs को आपकी हर गतिविधि देखने से रोकता है, फिर भी वे आपकी ऑनलाइन और ऑफलाइन आदतों के बारे में हैरान कर देने वाली मात्रा में जानकारी इकट्ठा कर सकते हैं।
चाहे आप अपना बैंक खाता चेक कर रहे हों, कोई मूवी स्ट्रीम कर रहे हों, ऑनलाइन शॉपिंग(नई विंडो) कर रहे हों, या सोशल मीडिया स्क्रॉल कर रहे हों, इंटरनेट से हर कनेक्शन आपके ISP से गुज़रता है। Google(नई विंडो), Meta(नई विंडो), या Amazon के उलट, आप अपने ISP से बस लॉग आउट नहीं कर सकते और ना ही इसे इस्तेमाल करने से इनकार कर सकते हैं। ये आधुनिक ज़िंदगी का एक अपरिहार्य हिस्सा है।
इस गाइड में, हम बताएंगे कि ISPs कौन सी जानकारी इकट्ठा कर सकते हैं, वे उसे कैसे इस्तेमाल करते हैं, निजता समर्थकों ने ISP ट्रैकिंग पे चिंताएं क्यों जताई हैं, और आप क्या कर सकते हैं ताकि आपके प्रोवाइडर को मिलने वाली जानकारी कम हो।
आपका ISP असल में क्या देख सकता है?
आधुनिक वेबसाइटें आमतौर पर आपके भेजे और पाए डाटा को सुरक्षित रखने के लिए HTTPS एन्क्रिप्शन इस्तेमाल करती हैं। ये एन्क्रिप्शन आपका ISP क्या देख सकता है, इसे सीमित करती है, लेकिन इससे आपका ब्राउज़िंग पूरी तरह निजी नहीं हो जाता।
HTTPS आपके ISP को एन्क्रिप्ट किए गए वेबपेजों की सामग्री पढ़ने से रोकता है। उदाहरण के लिए, अगर आप Reddit ब्राउज़ कर रहे हैं, तो आपका ISP ये नहीं देख सकता कि आप कौन सी पोस्ट पढ़ रहे हैं। अगर आप अपनी ऑनलाइन बैंकिंग में लॉग इन हैं, तो वे आपका खाता बैलेंस या लेनदेन नहीं देख सकते।
आपके कनेक्शन और आपके प्रोवाइडर की सेवाओं के आधार पर, आपका ISP ये देख सकता है:
- आपने कौन सी वेबसाइटें और डोमेन विज़िट किए
- आपने उन्हें कब विज़िट किया
- आप कितनी देर तक कनेक्टेड रहे
- आपने कितना डाटा ट्रांसफर किया
- आपके नेटवर्क कनेक्शन के ज़रिए आपका अनुमानित फिजिकल स्थान
- आपके होम नेटवर्क से कौन से डिवाइस कनेक्टेड हैं
ये जानकारी DNS रिक्वेस्ट्स, कनेक्शन मेटाडाटा, और उस नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर से आती है जो आपका इंटरनेट ट्रैफिक रूट करता है।
US(नई विंडो) फेडरल ट्रेड कमीशन की 2021 की एक रिपोर्ट ने छह बड़े ISPs की डाटा प्रैक्टिस(नई विंडो) की जांच की, जो लगभग 98% US मोबाइल इंटरनेट मार्केट को सर्व करते हैं। रिपोर्ट में पाया कि कई प्रोवाइडर्स ने बड़ी मात्रा में ग्राहक डाटा इकट्ठा किया, अलग-अलग प्रोडक्ट्स और सेवाओं की जानकारी को मिलाया, और उसे थर्ड पार्टीज़ के साथ शेयर किया, जबकि उपयोगकर्ताओं के पास ऑप्ट आउट करने के सीमित मौके थे।
प्रोवाइडर्स जो ईमेल सेवाएं, सर्च इंजन, टेलीविज़न प्लैटफॉर्म, या स्मार्ट होम प्रोडक्ट्स भी ऑपरेट करते हैं, उनके लिए इकट्ठा किया गया डाटा और भी ज़्यादा व्यापक हो सकता है।
ISPs के पास इतना डाटा क्यों है
अलग-अलग वेबसाइटों या ऐप्स के उलट, आपका ISP आप और इंटरनेट के ठीक बीच बैठता है। आपकी विज़िट की हर वेबसाइट, खोला गया हर ऐप, आपके घर का हर कनेक्टेड डिवाइस आखिरकार आपके इंटरनेट प्रोवाइडर के ज़रिए कम्युनिकेट करता है। इससे ISPs को किसी एक सेवा की बजाय आपकी पूरी डिजिटल ज़िंदगी की गतिविधि दिख जाती है।
कुछ प्रोवाइडर्स ब्रॉडबैंड कनेक्शन से कहीं आगे निकल चुके हैं। वे ये भी ऑफर करते हैं:
- मोबाइल फोन सेवाएं
- टेलीविज़न प्लैटफॉर्म
- ईमेल सेवाएं
- स्मार्ट होम डिवाइस
- क्लाउड सेवाएं
- सर्च प्रोडक्ट्स
इससे कुछ कंपनियों को कई सेवाओं से जानकारी मिलाकर अपने ग्राहकों की ज़्यादा विस्तृत तस्वीर बनाने का मौका मिलता है।
FTC रिपोर्ट के मुताबिक, कई ISPs ने इस मिलाए गए डाटा का इस्तेमाल ग्राहकों को अनुमानित विशेषताओं, जिनमें रुचियां और डेमोग्राफिक्स शामिल हैं, के आधार पर विज्ञापन श्रेणियों में रखने के लिए किया, और उन ऑडियंस सेगमेंट्स को विज्ञापनदाताओं और दूसरी थर्ड पार्टीज़ के साथ शेयर किया।
लेकिन सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म के उलट, ज़्यादातर उपभोक्ताओं के पास ब्रॉडबैंड प्रोवाइडर चुनने के बहुत सीमित विकल्प होते हैं। कई इलाकों में, घरों के पास इंटरनेट एक्सेस के लिए बस एक या दो व्यावहारिक विकल्प होते हैं।
ISP निजता सुरक्षा कैसे बदली
हालांकि निजता कानून दुनिया भर में अलग-अलग हैं, और कई US राज्यों ने तब से अपनी सुरक्षाएं लागू की हैं, अभी भी कोई एक संघीय निजता मानक नहीं है जो ये तय करता हो कि ISPs ग्राहकों का ब्राउज़िंग डाटा कैसे इकट्ठा और इस्तेमाल करते हैं। लेकिन उपभोक्ताओं के लिए नतीजा ये है कि सुरक्षा का एक बिखरा हुआ ढांचा है, जो अक्सर इस पे निर्भर करता है कि वे कहां रहते हैं।
2016 में, US फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) ने निजता नियम अपनाए(नई विंडो) थे, जिनके मुताबिक ISPs को कुछ तरह के ब्राउज़िंग डाटा को इकट्ठा करने और उससे कमाई करने से पहले ग्राहकों की सहमति लेनी होती। लेकिन कांग्रेस ने उन नियमों को रद्द कर दिया, इससे पहले कि वे कभी लागू होते।
2017 में, कांग्रेस ने कांग्रेशनल रिव्यू एक्ट का इस्तेमाल करके उन नियमों को रद्द किया। उसी साल बाद में, FCC ने भी नेट न्यूट्रैलिटी रद्द करने(नई विंडो) के लिए वोट किया, और वे बदलाव 2018 में लागू हुए।
इन बदलावों ने मिलकर ISPs के ग्राहक डाटा को हैंडल करने और इंटरनेट ट्रैफिक को संभालने पे संघीय निगरानी को काफी कम कर दिया। हालांकि कुछ राज्यों ने ज़्यादा सख्त सुरक्षाएं लागू की हैं, ISP ग्राहकों के लिए निजता नियम अब भी इस पे निर्भर करते हैं कि वे कहां रहते हैं।
क्या आपका ISP आपका कनेक्शन धीमा कर सकता है?
ISPs सिर्फ इंटरनेट का एक्सेस नहीं देते। वे उस इंफ्रास्ट्रक्चर को भी कंट्रोल करते हैं(नई विंडो) जिस पे आपका डाटा सफर करता है, जिससे इंटरनेट ट्रैफिक कैसे पहुंचाया जाता है, इस पे उनका काफी असर होता है।
इसका सबसे मशहूर उदाहरण Netflix(नई विंडो) और Comcast के बीच का था। 2013 और 2014 में, Comcast के Netflix ग्राहकों को स्ट्रीमिंग क्वालिटी खराब होने की वजह से गंभीर परफॉर्मेंस समस्याओं का सामना करना पड़ा। Netflix ने तर्क दिया कि Comcast ने अपनी मार्केट पोज़िशन का इस्तेमाल करके नॉर्मल सर्विस रीस्टोर करने से पहले डायरेक्ट नेटवर्क कनेक्शन के लिए एक्स्ट्रा पेमेंट की मांग की, और कंपनी के CEO ने इस इंतज़ाम को “मनमाना टैक्स” बताया।
ये समस्या 2024 में फिर सामने आई, जब Netflix ने FCC के सामने तर्क दिया कि जिन ISPs के पास मुकाबला करने वाली स्ट्रीमिंग प्लैटफॉर्म भी हैं, उनके पास ऐसे फाइनेंशियल इंसेंटिव हो सकते हैं जो हितों के टकराव पैदा करते हैं, भले ही दखल देने का कोई खास कृत्य साबित ना हो सके। Netflix ने जानबूझकर तोड़-फोड़ का इल्ज़ाम लगाने की बजाय ये तर्क दिया कि मार्केट का ढांचा खुद ऐसे इंसेंटिव पैदा करता है जो मुकाबला करने वाली सेवाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
एक अलग उदाहरण कैलिफोर्निया की 2018 की मेंडोसिनो कॉम्प्लेक्स आग के दौरान सामने आया, जब सांता क्लारा काउंटी फायर डिपार्टमेंट ने बताया कि Verizon ने उनकी एक इमरजेंसी रिस्पॉन्स गाड़ी के इस्तेमाल किए गए डाटा कनेक्शन को थ्रॉटल कर दिया था। विभाग के मुताबिक, जब फायरफाइटर्स पूरे राज्य में ऑपरेशन्स कोऑर्डिनेट कर रहे थे, इंटरनेट स्पीड बहुत कम हो गई, और नॉर्मल सर्विस रीस्टोर करने के लिए शुरू में ज़्यादा महंगे प्लैन पे अपग्रेड करना पड़ा, जिसे बाद में Verizon ने ग्राहक सहायता की गलती बताया।
हालांकि इन थ्रॉटलिंग(नई विंडो) घटनाओं के हालात बिल्कुल अलग थे, दोनों ये दिखाती हैं कि इंटरनेट प्रोवाइडर्स उन नेटवर्क पे कितना कंट्रोल रख सकते हैं जिन पे रोज़ लाखों लोग निर्भर करते हैं।
क्या आपका Wi-Fi राऊटर आपके घर के अंदर आपको ट्रैक कर सकता है?
नेटवर्किंग टेक्नोलॉजी में कम जाने-माने विकासों में से एक है Wi-Fi सेंसिंग(नई विंडो)। एक दशक से ज़्यादा समय से, शोधकर्ताओं ने दिखाया है कि बिल्डिंग के अंदर लोगों और चीज़ों से बिना तार सिग्नल कैसे टकराकर लौटते हैं, इसका विश्लेषण करके Wi-Fi सिग्नल्स से मूवमेंट का पता लगाया जा सकता है। अकादमिक स्टडीज़ ने दिखाया है कि कंट्रोल्ड हालात में ये तकनीकें मूवमेंट, सांस लेने के पैटर्न पहचान सकती हैं, और दीवारों के पार शरीर की पोज़िशन का अनुमान भी लगा सकती हैं।
आज, कुछ राऊटर और स्मार्ट होम डिवाइस में ह्यूमन प्रेज़ेंस डिटेक्शन के रूप शामिल हैं, जिन्हें लाइटिंग, सिक्योरिटी सिस्टम और दूसरे कनेक्टेड डिवाइस को ऑटोमेट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इंडस्ट्री के अनुमानों के मुताबिक, करोड़ों US घरों के पास ISP-दिए गए हार्डवेयर के ज़रिए पहले से किसी ना किसी लेवल की Wi-Fi सेंसिंग टेक्नोलॉजी का एक्सेस है। एक Verizon Fios राऊटर में बिल्ट-इन ह्यूमन प्रेज़ेंस डिटेक्शन शामिल था, जबकि Wi-Fi सेंसिंग कंपनी Cognitive Systems 160 से ज़्यादा इंटरनेट प्रोवाइडर्स के साथ पार्टनर है।
आज के कंज़्यूमर प्रोडक्ट्स और रिसर्च लैब में क्या संभव है, इन दोनों में फर्क करना ज़रूरी है। ज़्यादातर कमर्शियल उपलब्ध सिस्टम लोगों की पहचान करने या विस्तृत मूवमेंट दोबारा बनाने की बजाय अपेक्षाकृत सिंपल प्रेज़ेंस या मोशन डिटेक्शन करते हैं। फिर भी, ये टेक्नोलॉजी दिखाती है कि उन डिवाइस के अंदर अब कितनी क्षमता मौजूद है जिन्हें कई लोग बस अपने ISP से किराए पे लेते हैं।
चूंकि प्रोवाइडर्स अक्सर ISP-जारी किए गए राऊटर के फर्मवेयर को कंट्रोल करते हैं, वे ये भी कंट्रोल करते हैं कि समय के साथ उन डिवाइस को कौन सी खासियतें मिलती हैं। हालांकि इसका कोई सबूत नहीं कि आज के कंज़्यूमर राऊटर रिसर्च में दिखाई गई Wi-Fi सेंसिंग के ज़्यादा एडवांस रूप करते हैं, ये टेक्नोलॉजी दिखाती है कि नेटवर्किंग हार्डवेयर लगातार कैसे विकसित हो रहा है, और ये जानना क्यों फायदेमंद है कि आपके डिवाइस क्या कर सकते हैं।
ISP ट्रैकिंग कैसे कम करें
हालांकि आपका ISP आपका इंटरनेट ट्रैफिक हैंडल करता है, आप ये कम कर सकते हैं कि वो कितनी जानकारी इकट्ठा कर सकता है। हालांकि कोई एक निजता टूल सभी तरह की ट्रैकिंग नहीं रोकता, कई उपायों को मिलाने से आपके प्रोवाइडर को दिखने वाली चीज़ें काफी सीमित हो सकती हैं।
VPN इस्तेमाल करें
एक VPN(नई विंडो) आपका इंटरनेट ट्रैफिक आपके डिवाइस से निकलने से पहले एन्क्रिप्ट करता है(नई विंडो)। आपका ISP आमतौर पर हर वेबसाइट देखने की बजाय सिर्फ इतना देखता है कि आप एक VPN सर्वर से कनेक्टेड हैं। इससे आपका प्रोवाइडर नॉर्मल कनेक्शन मेटाडाटा के ज़रिए आपके ब्राउज़िंग डेस्टिनेशन की निगरानी नहीं कर पाता।
एन्क्रिप्टेड DNS पे स्विच करें
ट्रैडिशनल DNS रिक्वेस्ट्स ये दिखा सकती हैं कि आप कौन सी वेबसाइटें विज़िट करते हैं, भले ही उन वेबसाइटों की सामग्री एन्क्रिप्टेड हो। DNS-over-HTTPS (DoH) या DNS-over-TLS (DoT) जैसी एन्क्रिप्टेड DNS टेक्नोलॉजी इस्तेमाल करने से ISPs को वे रिक्वेस्ट्स प्लेन टेक्स्ट में देखने से रोकने में मदद मिलती है। कई आधुनिक ब्राउज़र और ऑपरेटिंग सिस्टम अब एन्क्रिप्टेड DNS को सपोर्ट करते हैं। Proton VPN इस्तेमाल करने वालों की DNS रिक्वेस्ट्स भी डिफॉल्ट रूप से एन्क्रिप्टेड(नई विंडो) होती हैं।
अपना खुद का राऊटर इस्तेमाल करें
कई घर बस अपने ISP से मिले राऊटर का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अपना खुद का कंपैटिबल राऊटर खरीदने से आपको फर्मवेयर अपडेट, सुरक्षा सेटिंग, और उपलब्ध खासियतों पे ज़्यादा कंट्रोल मिलता है।
जब भी मुमकिन हो HTTPS सक्षम करें
ज़्यादातर वेबसाइटें पहले से HTTPS डिफॉल्ट रूप से इस्तेमाल करती हैं, लेकिन ये पक्का करना अब भी फायदेमंद है कि आपका ब्राउज़र हमेशा एन्क्रिप्टेड कनेक्शन को प्राथमिकता दे। HTTPS ये नहीं छिपाता कि आप कौन सी वेबसाइटें विज़िट करते हैं, लेकिन ये आपके ISP को एन्क्रिप्ट किए गए वेबपेजों की सामग्री देखने से रोकता है, जिससे आपकी ऑनलाइन गतिविधि में निजता की एक और परत जुड़ती है।
आपका ISP हर चीज़ नहीं देख सकता, लेकिन वो अब भी बहुत कुछ देखता है
आपका ISP आपकी ऑनलाइन ज़िंदगी में एक खास जगह रखता है। ज़रूरी नहीं कि वो हर उस पेज को जानता हो जो आप विज़िट करते हैं या हर संदेश जो आप भेजते हैं, लेकिन वो अक्सर देख सकता है कि आप कहां कनेक्ट कर रहे हैं, आप कब ऑनलाइन हैं, और कितना डाटा इस्तेमाल कर रहे हैं। कई मामलों में, वो उस हार्डवेयर को भी कंट्रोल कर सकता है जो आपके घर को वेब से जोड़ता है।
जैसे-जैसे नेटवर्किंग टेक्नोलॉजी विकसित होती रहेगी, ये देखने की क्षमता और भी बढ़ सकती है।
खुशकिस्मती से, अपनी निजता की सुरक्षा के लिए इंटरनेट से डिस्कनेक्ट करने की ज़रूरत नहीं है। VPN इस्तेमाल करना, एन्क्रिप्टेड DNS सक्षम करना, अपना खुद का राऊटर चुनना, और ये समझना कि आपका ISP क्या देख सकता है और क्या नहीं, जैसे सिंपल कदम आपके प्रोवाइडर को मिलने वाली जानकारी को काफी कम कर सकते हैं।
हालांकि अलग-अलग निजता टूल बड़ी रेगुलेटरी या इंडस्ट्री समस्याओं का हल नहीं कर सकते, वे आपको अपनी ऑनलाइन गतिविधि पे कुछ कंट्रोल वापस पाने में मदद कर सकते हैं।





