2024 में दुनिया भर की सरकारों ने दुनिया की कुछ सबसे बड़ी टेक कंपनियों — Apple, Google, Meta, Amazon और Microsoft — पर मिलाकर $8.2 बिलियन का जुर्माना लगाया। पहली नज़र में ऐसा लगता है कि अथॉरिटीज़ आख़िरकार Big Tech कंपनियों को उनकी प्रतिस्पर्धा-विरोधी प्रैक्टिसेज़, निजता के उल्लंघन और दूसरे दुरुपयोगों के लिए जवाबदेह बना रही हैं। लेकिन ज़रा ध्यान से देखें तो सच्चाई साफ़ दिखती है: सालाना सौ अरबों डॉलर कमाने वाली कंपनियों के लिए ये जुर्माने महज़ कुछ दिनों में — कभी-कभी तो कुछ घंटों में — चुक जाते हैं और उनके मुनाफ़े पे कोई खास असर नहीं पड़ता।
इस साल Google पे सबसे ज़्यादा जुर्माने लगे, जो $3 बिलियन से हल्के-से कम हैं। फिर भी, अगर उसके free cash flow (जो उसकी आमदनी में से उपकरण, संपत्ति और दूसरे ज़रूरी आइटम के खर्च घटाकर निकाला जाता है) का इस्तेमाल करें, तो वो करीब तीन हफ़्तों के कारोबार के बाद अपने सारे जुर्माने चुका सकता है। Meta निजता के उल्लंघनों का $1.46 बिलियन का जुर्माना दो हफ़्तों से भी कम में चुका सकता है। Amazon के $57 मिलियन के जुर्माने को तो एक एरर कहा जा सकता है — महज़ एक दिन की कमाई ही पूरे जुर्माने को मिटाए देती है। ये आंकड़े एक चिंताजनक सच को उजागर करते हैं: Big Tech पे लगाए गए आर्थिक जुर्माने कोई मायने रखने वाला रोक नहीं हैं।
अगर जुर्माने असर नहीं कर रहे, तो क्या करेगा? इस असंतुलन को ठीक करने के लिए रेगुलेटर्स को अपना तरीका दोबारा सोचना होगा और सिर्फ़ निशानी भर की सज़ा की जगह सिस्टम में बदलाव को टारगेट करना होगा। इस आर्टिकल में देखा गया है कि मौजूदा नीतियां कहां कम पड़ रही हैं और ऐसी दुनिया में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए क्या करना ज़रूरी है, जहां टेक दिग्गज जुर्मानों को कारोबार की लागत समझते हैं।
हमने ये टॉपिक 2022 और 2023 में कवर किया था। जुर्माने बड़े ज़रूर हुए हैं, लेकिन अब भी इतने बड़े नहीं हुए हैं कि किसी भी Big Tech कंपनी की लीडरशिप के लिए चिंता की बात बनें। इसके कई कारण हैं।
जुर्माने असल में दुरुपयोग वाली प्रैक्टिसेज़ जारी रखने की फीस हैं
ये जुर्माने सरकारों की वो कोशिशें हैं जिनसे वो ये सुनिश्चित करना चाहती हैं कि Big Tech कंपनियां उनके कानूनों का सम्मान करें। हर जुर्माना कानून तोड़ने की सज़ा है — उपयोगकर्ताओं के डाटा का दुरुपयोग करना या किसी दूसरी कंपनी के बराबरी से प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता में गैरकानूनी रुकावट डालना।
पिछले तीन सालों में टेक मोनोपॉली पे लगाए गए जुर्माने काफ़ी तेज़ी से बढ़े हैं। दरअसल, इस साल Big Tech कंपनियों को 2022 और 2023 के मुकाबले ज़्यादा जुर्माने चुकाने पड़े। दुख की बात है कि अपने अकल्पनीय साइज़ के बावजूद ये जुर्माने Big Tech के लिए कोई मायने नहीं रखते।
| कंपनी | 2024 में कुल जुर्माने | जुर्माने चुकाने में लगा समय (free cash flow के हिसाब से) |
|---|---|---|
| Amazon | $5,74,78,000 | 1 दिन, 0 घंटे, 51 मिनट |
| Apple | $2,11,72,03,000 | 7 दिन, 2 घंटे, 28 मिनट |
| $2,97,47,52,000 | 16 दिन, 21 घंटे, 25 मिनट | |
| Meta | $1,46,28,50,000 | 9 दिन, 19 घंटे, 15 मिनट |
| Microsoft | $1,60,50,00,000 | 7 दिन, 21 घंटे, 49 मिनट |
$2.97 बिलियन के जुर्माने के बाद ज़्यादातर दूसरी कंपनियां तबाह हो जातीं। लेकिन 2024 की पहली तीन तिमाहियों में Google का free cash flow (FCF) $47.9 बिलियन था, यानी करीब 16 गुना ज़्यादा। Free cash flow ये हिसाब लगाने का तरीका है कि कमाई में से कितनी रकम कंपनी इस्तेमाल कर सकती है — इसके लिए कंपनी की कारोबारी आमदनी में से संपत्ति और उपकरण खरीदने पे खर्च की गई रकम घटाई जाती है। जैसा Google अपनी earnings report(नई विंडो) में बताता है, free cash flow वो “रकम है जो बिज़नेस से जनरेट होती है और जिसका इस्तेमाल स्ट्रैटेजिक मौकों के लिए किया जा सकता है, जिनमें अपने बिज़नेस में निवेश, एक्विज़िशन और अपनी बैलेंस शीट को मज़बूत करना शामिल है”।
| कंपनी | 2024 का free cash flow | 2024 का प्रति घंटा free cash flow |
|---|---|---|
| Amazon(नई विंडो) | $15.08 बिलियन | $23,13,112 |
| Apple(नई विंडो) | $108.81 बिलियन | $1,24,20,091 |
| Google(नई विंडो) | $47.93 बिलियन | $73,37,622 |
| Meta(नई विंडो) | $40.51 बिलियन | $62,04,044 |
| Microsoft(नई विंडो) | $74.07 बिलियन | $84,55,593 |
जुर्मानों को दस गुना बड़ा होना होगा तभी वो असरदार रोक बनेंगे। मार्क ज़करबर्ग को ही लें। 2022 में हमारे Big Tech के जुर्मानों पे नज़र रखना शुरू करने के बाद से Facebook पे $3.7 बिलियन से ज़्यादा का जुर्माना लग चुका है। फिर भी ना बोर्ड से और ना ही जनता से उसे हटाने की कोई मांग आई। इसकी वजह ये है कि जिन बिज़नेस प्रैक्टिसेज़ की वजह से ये सारे जुर्माने लगे, उन्हीं ने Facebook के लिए सौ अरबों डॉलर भी कमाए।
ये भी Big Tech कंपनियों को करने पड़ने वाले सारे अलग-अलग भुगतानों का पूरा हिसाब नहीं है (अपीलें लंबित हैं)। Apple को Ireland में $14 बिलियन का बकाया टैक्स बिल(नई विंडो) चुकाना है, और दुनिया भर में Big Tech कंपनियों के खिलाफ सैकड़ों क्लास एक्शन केस चल रहे हैं (इनमें सबसे बड़े केस में से एक UK में Which? ने Apple के खिलाफ(नई विंडो) क्लाउड स्टोरेज पे उसके दबदबे के लिए $3.66 बिलियन की रकम पे दायर किया है)। फिर भी, Apple को इस $17.66 बिलियन के अतिरिक्त जुर्माने को चुकाने में दो महीनों से भी कम (59 दिन, 5 घंटे, 19 मिनट) लगेंगे।
दुख की बात ये है कि इनमें से हर कंपनी एक मोनोपॉलिस्ट है। इन्होंने इंटरनेट को — जो दुनिया का सबसे अहम और ना बदले जा सकने वाला इंफ़्रास्ट्रक्चर है जो अरबों लोगों को नौकरियों, अपनों, मनोरंजन और ज़रूरी जानकारी से जोड़ता है — काट-काटकर ऐसे बांट दिया कि हर एक के पास एक मार्केट है जिसे वो कंट्रोल कर सकती है। Google और Apple स्मार्टफ़ोन पे हावी हैं। Google और Meta ऑनलाइन विज्ञापन पे हावी हैं। Amazon ऑनलाइन मार्केट पे हावी है। सरल शब्दों में कहें तो Big Tech जानता है कि ये जुर्माने हमेशा चुकाना ज़्यादा फ़ायदेमंद है, अगर इसके बदले वो ये कंट्रोल बरकरार रख पाती है।
Big Tech समझता है कि वो कानून से ऊपर है
सरकारें ये सबक़ सीखना शुरू कर रही हैं। जुर्मानों का साइज़ बढ़ाने के अलावा, EU के लॉमेकर्स ने Digital Markets Act पास किया, जो 2024 में लागू हुआ। इससे पॉलिसीमेकर्स उन कंपनियों से बदलाव मांग सकते हैं जो ख़ास मार्केट में गेटकीपर की भूमिका निभाती हैं। जिस मार्केट को वो सबसे पहले ज़्यादा फ़ेयर बनाने की कोशिश कर रहे थे, वो स्मार्टफ़ोन मार्केट था, जिसमें Apple और Google को अपने iOS और Android डिवाइस खोलने के लिए मज़बूर करने की कोशिश की गई।
जैसा अंदाज़ा लगाया जा सकता था, Google और Apple ने कानून की रूह को नज़रअंदाज़ करते हुए ऐसे सुधार पेश किए जो कुछ खास हासिल नहीं करते (या, Apple के मामले में, जानबूझकर सज़ा देने वाले हैं)। ये रिएक्शन दिखाता है कि Big Tech अपना गैरकानूनी मार्केट दबदबा खुशी-खुशी नहीं छोड़ेगा। इंटरनेट में चॉइस और फ़ेयरनेस वापस लाने के लिए सरकारों को लगातार और सख़्ती से आगे बढ़ना होगा।
ख़ुशख़बरी ये है कि ये कोशिश पूरी दुनिया में दिख रही है। US, जो मार्केट फ़ेयरनेस लागू करने में अब तक पीछे रहा था, हाल ही में जागा है। Epic Games के दायर किए केस(नई विंडो) में Google Play को गैरकानूनी मोनोपॉली पाया गया। एक अलग US Department of Justice के दायर किए केस(नई विंडो) में पाया गया कि Google ने Google Search का मोनोपॉली सुनिश्चित करने के लिए मोबाइल डिवाइस पार्टनर्स के साथ गैरकानूनी सौदे किए। संभावित समाधानों में Google को Android या Chrome को एक अलग कंपनी में बांटने की मज़बूरी शामिल है। Department of Justice के Google के ऐड टेक बिज़नेस(नई विंडो) और Apple(नई विंडो) के खिलाफ भी केस चल रहे हैं, जबकि Federal Trade Commission का Meta(नई विंडो) के खिलाफ केस अप्रैल में शुरू होने वाला है।
ज़्यादा फ़ेयर इंटरनेट संभव है
बहुत समय बाद पहली बार, सरकारें अपने नागरिकों के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी को गंभीरता से ले रही हैं और उन टेक मोनोपॉली के खिलाफ लड़ना शुरू कर रही हैं जिन्होंने इंटरनेट के शुरुआती वादे को ख़राब कर दिया है। लेकिन ये भ्रम ना रखें कि जुर्माने अब भी इतने छोटे हैं कि Big Tech के कान खड़े हो जाएं। बल्कि, ऑनलाइन आज़ादी और फ़ेयरनेस रीस्टोर करने में सबसे ज़्यादा उम्मीद Big Tech के स्ट्रक्चरल फ़ायदों को ख़त्म करने की कोशिशों में है।
ज़्यादा फ़ेयर इंटरनेट ऐसे कॉम्पिटिटर्स को सफल होने देगा जो लोगों की मांगों पे ख़रा उतरने वाली सर्विसेज़ देते हैं — जैसे पर्सनल डाटा का शोषण करने की बजाय उसकी सुरक्षा करना। लेकिन दुख की बात है कि इंटरनेट को बराबरी का मैदान बनाने में सालों लगेंगे। तब तक अपनी निजता की सुरक्षा का बोझ आप पे ही है। अपने पर्सनल डाटा को Big Tech के लालची हाथों से दूर रखकर आप सिर्फ़ अपनी जानकारी की सुरक्षा नहीं कर रहे — उनकी ऐड रेवेन्यू पे असर डालकर आप उनका ध्यान भी खींचेंगे।
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