डेनमार्क, स्वीडन, नॉर्वे और फिनलैंड के नागरिक अमेरिकी टेक कंपनियों के प्रति बढ़ती आलोचनात्मक नज़रिया अपना रहे हैं और यूरोप में इनकी अत्यधिक ताकत को लेकर चिंतित हैं। अपने दक्षिण के पड़ोसियों की तरह ही, नॉर्डिक देशों के उपभोक्ता मानते हैं कि यूरोप वॉशिंगटन के प्रति जवाबदेह बड़ी टेक कंपनियों पर बहुत ज़्यादा निर्भर हो गया है और अब विकल्प ढूंढने का समय आ गया है।

नॉर्डिक देशों में रहने वाले 4,000 लोगों पर किए गए Proton के एक नए सर्वे में पाया गया कि करीब 83% लोग मानते हैं कि यूरोप अमेरिकी ऐप और सेवाओं पर निर्भर है, और 85% लोग इस निर्भरता को चिंताजनक मानते हैं

हमारे पहले के अध्ययन में UK, फ्रांस और जर्मनी के 3,000 लोगों से पता चला था कि 73% लोग मानते थे कि उनके समाज अमेरिकी टेक कंपनियों पर बहुत ज़्यादा निर्भर हैं। हाल ही में, फ्रांस की सरकार ने कहा कि वो Windows छोड़ रही है(नई विंडो) और दूसरी अमेरिकी सेवाएं भी छोड़ रही है, और जर्मनी(नई विंडो) तथा दूसरे देश(नई विंडो) भी यूरोपीय डिजिटल संप्रभुता की तलाश कर रहे हैं। अमेरिकी टेक से दूरी का ये रुझान साफ दिख रहा है।

लेकिन नॉर्डिक देशों का क्या? शायद कोई हैरान न हो कि वो भी उतने ही चिंतित हैं, या उससे भी ज़्यादा।

  • यूरोप के दूसरे देशों के लोगों की तुलना में नॉर्डिक देशों के नागरिक यूरोपीय टेक सेवाओं पर स्विच करना ज़्यादा चाहते हैं।
  • खबरों पे नज़र रखने वाले 64% लोग कहते हैं कि अमेरिका और यूरोप के बीच तनाव ने अमेरिकी टेक ऐप और सेवाओं के इस्तेमाल को लेकर उनकी भावनाओं को बदल दिया है
  • डेटा संप्रभुता और यूरोप-समर्थक भावना नॉर्डिक देशों के लोगों के लिए यूरोपीय टेक चुनते वक्त सबसे बड़े प्रेरक हैं।

जनवरी के बाद से अमेरिका और नॉर्डिक देशों के बीच भू-राजनीतिक तनाव बेहद बढ़ गया है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने डेनमार्क के इलाके ग्रीनलैंड(नई विंडो) पर हमला करने की धमकी दी। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस फ्रेडेरिक-नील्सन ने अमेरिकी आक्रामकता का लगातार विरोध किया और उसे हमले से बचाने के लिए NATO से अपील की(नई विंडो)। इसके बाद ट्रम्प ने यूरोप के साथ अमेरिकी सैन्य गठजोड़ खत्म करने की धमकी दी(नई विंडो)

इस उथल-पुथल के बीच अमेरिकी टेक के प्रति उपभोक्ताओं का रुख बदल रहा है। हमारा सर्वे जांचता है कि मौजूदा राजनीतिक माहौल नॉर्डिक देशों के नागरिकों के नज़रिए को कैसे आकार दे रहा है।

अमेरिकी टेक का विरोध नॉर्डिक देशों में सबसे ज़्यादा है

  • डेनमार्क के 85% उत्तरदाता मानते हैं कि यूरोप अमेरिकी टेक कंपनियों पर बहुत या बेहद ज़्यादा निर्भर है, और 87% इस निर्भरता को लेकर चिंता जताते हैं
  • नॉर्वे के 78% उत्तरदाता मानते हैं कि यूरोप अमेरिकी टेक कंपनियों पर बहुत या बेहद ज़्यादा निर्भर है, और 84% इस निर्भरता को लेकर चिंता जताते हैं
  • स्वीडन के 82% उत्तरदाता मानते हैं कि यूरोप अमेरिकी टेक कंपनियों पर बहुत या बेहद ज़्यादा निर्भर है, और 81% इस निर्भरता को लेकर चिंता जताते हैं
  • फिनलैंड के 86% उत्तरदाता मानते हैं कि यूरोप अमेरिकी टेक कंपनियों पर बहुत या बेहद ज़्यादा निर्भर है, और 89% इस निर्भरता को लेकर चिंता जताते हैं

अमेरिकी टेक पर बहुत ज़्यादा निर्भरता को लेकर नॉर्डिक देशों के लोग अपने यूरोपीय समकक्षों से भी ज़्यादा चिंतित हैं। ग्रीनलैंड को लेकर डेनमार्क और अमेरिका के बीच चल रहे तनावपूर्ण गतिरोध को देखते हुए ये कोई हैरानी की बात नहीं है।

ज़्यादातर उपभोक्ताओं के लिए ये बात अब साफ है कि अमेरिकी टेक का इस्तेमाल करके आप जो भी करें, वो कभी निजी नहीं रहेगा। अमेरिका से चलने वाले क्लाउड स्टोरेज, ईमेल और मैसेजिंग ऐप ऐसी गतिविधि को कैप्चर करते हैं जिसे NSA के साथ शेयर किया जा सकता है, तब भी जब उपयोगकर्ता किसी दूसरे देश में हों। ऐसा Five Eyes, Nine Eyes और Fourteen Eyes(नई विंडो) जैसे समझौतों की वजह से मुमकिन होता है, जो सीमाओं के पार खुफिया जानकारी इकट्ठा करने की इजाज़त देते हैं।

Foreign Intelligence Surveillance Act (FISA) की Section 702 ने भी 2008 से अमेरिका को विदेश में रहने वाले लोगों की निगरानी की इजाज़त दी है, बिना आतंकवाद का शक और बिना कोर्ट की मंज़ूरी के। ईमेल, फोन कॉल, टेक्स्ट संदेश और अन्य यूरोपीय संचार की जानकारी खुफिया एजेंसियां अमेरिकी कंपनियों से मांग सकती हैं।

नॉर्डिक देशों के लोग और उनके यूरोपीय पड़ोसी बिना वारंट निगरानी के शिकार नहीं होना चाहते, और ऐसी कंपनियों को विदेश पैसा भेजने को लेकर वो पहले से ज़्यादा असहज हो रहे हैं जो डेटा नियमों की लगातार अवहेलना करती हैं।

नॉर्डिक देशों का अपना एक सेहतमंद सॉफ्टवेयर उद्योग भी है, जहां कई नए संगठन अपने अमेरिकी समकक्षों से अलग रणनीति अपना रहे हैं। निजी डेटा इकट्ठा करने या सोशल मीडिया पर ध्यान देने की बजाय, ये नई सॉफ्टवेयर कंपनियां कंस्ट्रक्शन, नियम-लागू करने और रियल एस्टेट जैसे कम डिजिटल उद्योगों के लिए समाधान पर ध्यान दे रही हैं। जैसे-जैसे ये उद्योग बढ़ेगा और अमेरिकी टेक का विरोध बढ़ेगा, नॉर्डिक देश विकल्प ढूंढने या उन्हें खुद बनाने में साफ तौर पर ज़्यादा दिलचस्पी रखते हैं।

नॉर्डिक भावना पर खबरों का गहरा असर है

  • खबरों को फॉलो करने वाले डेनमार्क के 67% उत्तरदाता बताते हैं कि अमेरिका और यूरोप के बीच बढ़ता तनाव उन्हें यूरोपीय सेवाओं को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करता है।
  • खबरों को फॉलो करने वाले नॉर्वे के 65% उत्तरदाता बताते हैं कि अमेरिका और यूरोप के बीच बढ़ता तनाव उन्हें यूरोपीय सेवाओं को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करता है।
  • खबरों को फॉलो करने वाले स्वीडन के 65% उत्तरदाता बताते हैं कि अमेरिका और यूरोप के बीच बढ़ता तनाव उन्हें यूरोपीय सेवाओं को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करता है।
  • खबरों को फॉलो करने वाले फिनलैंड के 60% उत्तरदाता बताते हैं कि अमेरिका और यूरोप के बीच बढ़ता तनाव उन्हें यूरोपीय सेवाओं को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करता है।

वैश्विक मंच पर अमेरिका के व्यवहार की हाल के महीनों में दुनिया भर में खूब आलोचना हुई है। NATO छोड़ने की ट्रम्प की धमकियों ने सदस्य देशों को विरोध में एकजुट(नई विंडो) कर दिया है। अमेरिका के अंदर ही प्रशासन, ICE एजेंटों की हिंसक कार्रवाइयों और ईरान पर हमले के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।

अमेरिकी टेक का अमेरिकी सरकार से गहरा नाता है। ट्रम्प का दूसरा कार्यकाल शुरू होते ही बड़ी टेक कंपनियों के नेता शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए ताकि प्रशासन के साथ काम करने की अपनी इच्छा दिखा सकें। OpenAI का अमेरिकी सेना(नई विंडो) के साथ घनिष्ठ और बदलता रिश्ता(नई विंडो) और DHS अधिकारियों द्वारा Meta के Ray-Ban स्मार्ट ग्लास के अनधिकृत इस्तेमाल(नई विंडो) — बड़ी टेक के निगरानी प्लेटफॉर्म और सरकारी कामकाज के बीच की सीमा धुंधली होने के ये हाल के दो उदाहरण हैं।

अमेरिकी टेक के प्रति धारणा बदलने के पीछे मूल्यों का टकराव भी एक बड़ी प्रेरक शक्ति हो सकता है। जब नॉर्डिक देशों के लोग देखते हैं कि Meta बच्चों की सुरक्षा को खतरे में डालता है(नई विंडो), या Google उनकी तस्वीरों को निजी नहीं रखता, तो इससे ये विचार और मजबूत होता है कि ये कंपनियां सेहतमंद समाज बनाने और ईमानदारी से कारोबार करने वाले नॉर्डिक मूल्यों को शेयर नहीं करतीं।

सुरक्षित यूरोपीय टेक की चाह बढ़ रही है

  • अगर कोई यूरोपीय ऐप या ऑनलाइन सेवा किसी अमेरिकी ऐप या सेवा की कीमत, खासियत और इस्तेमाल में आसानी से मुकाबला कर सकती हो, तो 71% डेनमार्क के लोग यूरोप में स्थित कंपनियों को प्राथमिकता देंगे
  • अगर कोई यूरोपीय ऐप या ऑनलाइन सेवा किसी अमेरिकी ऐप या सेवा की कीमत, खासियत और इस्तेमाल में आसानी से मुकाबला कर सकती हो, तो 75% नॉर्वे के लोग यूरोप में स्थित कंपनियों को प्राथमिकता देंगे
  • अगर कोई यूरोपीय ऐप या ऑनलाइन सेवा किसी अमेरिकी ऐप या सेवा की कीमत, खासियत और इस्तेमाल में आसानी से मुकाबला कर सकती हो, तो 67% स्वीडन के लोग यूरोप में स्थित कंपनियों को प्राथमिकता देंगे
  • अगर कोई यूरोपीय ऐप या ऑनलाइन सेवा किसी अमेरिकी ऐप या सेवा की कीमत, खासियत और इस्तेमाल में आसानी से मुकाबला कर सकती हो, तो 74% फिनलैंड के लोग यूरोप में स्थित कंपनियों को प्राथमिकता देंगे

फिर एक बार, नॉर्डिक देशों के लोग उतनी ही अच्छी क्वालिटी की टेक का एक्सेस मिलने पर यूरोपीय टेक को ज़्यादा प्राथमिकता देने की स्थिति में हैं। अपने यूरोपीय पड़ोसियों की तरह, नॉर्डिक उत्तरदाता उन अमेरिकी टूल्स के विकल्प ढूंढने के लिए उत्सुक हैं जो वो पहले से इस्तेमाल कर रहे हैं।

वजहें साफ हैं, हाल के साल में EuroStack(नई विंडो) बनाने में दिलचस्पी काफी बढ़ी है। यूरोपीय आयोग ने 2024 की शुरुआत के बाद से Google, Apple और Meta पर $7 अरब से ज़्यादा के जुर्माने लगाए हैं, जिन्हें व्हाइट हाउस ऐसे अति-नियमन के तौर पर पेश कर रहा है जो आखिरकार EU को AI का फायदा उठाने से रोक देगा।

जब पूछा गया कि कौन सी खासियतें उन्हें यूरोपीय ऐप या सेवा चुनने के लिए प्रेरित करेंगी, तो उत्तरदाताओं ने कहा कि वो ऐसे प्रोडक्ट चाहते हैं जो स्थानीय कानूनों से उनकी निजता की रक्षा करें और उनकी अपनी अर्थव्यवस्था की सहायता करें।

डेनमार्क में:

  • 49% यूरोपीय अर्थव्यवस्था की सहायता करना चाहते हैं
  • 48% चाहते हैं कि उनका डेटा यूरोपीय कानूनों के तहत स्टोर किया जाए
  • 47% चाहते हैं कि निजी डेटा की प्रोसेसिंग में ज़्यादा भरोसा हो

नॉर्वे में:

  • 55% चाहते हैं कि डेटा निजता की सुरक्षा कुल मिलाकर और मजबूत हो
  • 54% चाहते हैं कि उनका डेटा यूरोपीय कानूनों के तहत स्टोर किया जाए
  • 53% चाहते हैं कि निजी डेटा की प्रोसेसिंग में ज़्यादा भरोसा हो

स्वीडन में:

  • 49% चाहते हैं कि उनका डेटा यूरोपीय कानूनों के तहत स्टोर किया जाए
  • 47% चाहते हैं कि डेटा निजता की सुरक्षा कुल मिलाकर और मजबूत हो
  • 47% यूरोपीय अर्थव्यवस्था की सहायता करना चाहते हैं

फिनलैंड में:

  • 57% चाहते हैं कि निजी डेटा की प्रोसेसिंग में ज़्यादा भरोसा हो
  • 52% चाहते हैं कि डेटा निजता की सुरक्षा कुल मिलाकर और मजबूत हो
  • 51% यूरोपीय अर्थव्यवस्था की सहायता करना चाहते हैं

नॉर्डिक देश बदलाव के लिए तैयार हैं

  • डेनमार्क के 65% उत्तरदाता सहमत हैं कि रोज़मर्रा के ऐप और सेवाओं के लिए यूरोप के लोगों को यूरोपीय टेक कंपनियों पर ज़्यादा भरोसा करना चाहिए
  • नॉर्वे के 66% उत्तरदाता सहमत हैं कि रोज़मर्रा के ऐप और सेवाओं के लिए यूरोप के लोगों को यूरोपीय टेक कंपनियों पर ज़्यादा भरोसा करना चाहिए
  • स्वीडन के 62% उत्तरदाता सहमत हैं कि रोज़मर्रा के ऐप और सेवाओं के लिए यूरोप के लोगों को यूरोपीय टेक कंपनियों पर ज़्यादा भरोसा करना चाहिए
  • फिनलैंड के 69% उत्तरदाता सहमत हैं कि रोज़मर्रा के ऐप और सेवाओं के लिए यूरोप के लोगों को यूरोपीय टेक कंपनियों पर ज़्यादा भरोसा करना चाहिए

नॉर्डिक उत्तरदाताओं में से करीब दो-तिहाई कहते हैं कि वो अपने देश की बनी तकनीक के लिए यूरोपीय लोगों से ज़्यादा समर्थन चाहते हैं। ऐसा होने के लिए हमें समझना होगा कि अगर यूरोप अमेरिकी टेक पर निर्भर रहता है तो क्या दांव पे लगा है।

अमेरिकी बड़ी टेक कंपनियों ने सिर्फ एक तकनीकी एकाधिकार ही नहीं बनाया है, बल्कि एक वैश्विक निगरानी तंत्र भी बनाया है। इस तंत्र का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर हावा होने, राजनीतिक कथानकों को नियंत्रित करने और हर जगह के नागरिकों की निजता का उल्लंघन करने के लिए हो रहा है।

Big Tech से ताल्लुक तोड़ना इतना आसान नहीं है, क्योंकि अमेरिकी कंपनियों के पास बेहद बड़े एकाधिकार हैं। डेनमार्क Meta और Google के साथ लाइसेंसिंग डील(नई विंडो) पर साइन करने से इनकार कर रहा है और देश के मीडिया इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिए अपना डेनिश प्रेस कलेक्टिव मैनेजमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DPCMO) बना रहा है। हालांकि, ये देश 2020 से एक Google डेटा सेंटर(नई विंडो) की मेज़बानी भी कर रहा है। हम अमेरिकी टेक के प्रति भावनाओं के बदलाव को रीयल टाइम में देख रहे हैं, और उपभोक्ताओं का रुख संभवतः उन दिशाओं को प्रभावित करेगा जिन्हें सरकारें चुनेंगी।

यूरोपीय टेक पर स्विच करने के लिए अब से बेहतर समय कभी नहीं रहा

अब जब बेहतर यूरोपीय टेक की चाह की लहर उठ रही है, बदलाव मुमकिन है। जब यूरोपीय और नॉर्डिक देशों के लोग ठीक-ठीक समझ जाते हैं कि Google, Meta और Microsoft पर भरोसा करते रहने में क्या जोखिम है, तो वो जानते हैं कि उन्हें इस निगरानी से खुद को बचाना है। पहले ऐसे यूरोपीय टेक विकल्प नहीं थे जो अमेरिकी टेक से मुकाबला कर सकें — लेकिन ये बदल रहा है।

निगरानी हर टेक प्रोडक्ट में अपने आप बनी नहीं होती — ये अमेरिकी कंपनियों का एक जानबूझकर लिया गया फैसला है, जिसकी अब दुनिया भर के लोग हर सेवा से उम्मीद करने लगे हैं। लेकिन ईमेल से लेकर वीडियो कॉल और AI चैटबॉट तक, सब कुछ असल में निजी हो सकता है (और होना चाहिए।)

Proton स्विट्ज़रलैंड से काम करता है, जिससे दुनिया के हर देश के लोगों को स्विस नियामकीय डेटा सुरक्षा और शुरु-से-अंत तक एन्क्रिप्शन का एक्सेस मिलता है जो अंतरराष्ट्रीय निगरानी को रोकता है। हम समझते हैं कि अगर अमेरिका Big Tech से दुनिया पर हावी रहता है तो क्या दांव पे है; इसीलिए हमने एक ऐसा इकोसिस्टम बनाया है जो डेटा निजता की छेड़छाड़ किए बिना उन सेवाओं से प्रतिस्पर्धा करता है। Proton जैसे यूरोपीय विकल्प चुनकर यूरोपीय अर्थव्यवस्था की सहायता भी की जा सकती है और अपने निजी डेटा की रक्षा भी।

अमेरिकी टेक पर भरोसा करने वाले व्यवसायों के लिए खास जोखिम जानें