Meta की खबरों के मुताबिक वो US में कर्मचारियों के व्यवहार को कैप्चर करने की तैयारी कर रहा है, जिसमें माउस मूवमेंट, क्लिक, कीस्ट्रोक और स्क्रीन स्नैपशॉट शामिल हैं, ताकि उसके AI सिस्टम को इंसानों की तरह सॉफ्टवेयर चलाने में मदद मिल सके।
रॉयटर्स(नई विंडो) के मुताबिक, Model Capability Initiative (MCI) नाम दिए गए इस प्रोग्राम का मकसद Meta के उस बड़े प्रयास का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य ऐसे AI एजेंट बनाना है जो ड्रॉपडाउन मेन्यू नेविगेट करने से लेकर कीबोर्ड शॉर्टकट इस्तेमाल करने तक, कंप्यूटर पर आधारित काम अपने आप कर सकें।
Meta ने कहा है कि वो संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा करेगा, लेकिन उसने साफ नहीं किया कि कौन सा डाटा संवेदनशील माना जाएगा, ये सुरक्षा कैसे काम करेगी, या क्या ये तीसरें-पार्टी की उस जानकारी तक भी लागू होगी जिसे कर्मचारी काम के दौरान संभालते हैं।
ये कदम उस वक्त आया है जब Meta 20 मई से अपनी वर्कफोर्स का 10% कम करने की तैयारी कर रहा है, और खबर है कि इस साल बाद में और छंटनियां हो सकती हैं।
नए AI गोल्ड रश की सबसे कीमती चीज़ है व्यवहार संबंधी डाटा
AI कंपनियां पहले ही पब्लिक इंटरनेट डाटे की भारी मात्रा का इस्तेमाल कर चुकी हैं, और Meta का MCI इस बात का उदाहरण है कि ये कंपनियां नए ज़माने के AI ट्रेनिंग के इस चारे, यानी व्यवहार संबंधी डाटे(नई विंडो), की तलाश में कितनी गहराई तक जा रही हैं।
व्यवहार संबंधी डाटा से मतलब है वो डिजिटल निशान, जो लोग सिस्टम इस्तेमाल करते वक्त छोड़ जाते हैं: क्लिक, कीस्ट्रोक, ठहराव, सुधार, शॉर्टकट और नेविगेशन पैटर्न, जो दिखाते हैं कि कोई काम असल में कैसे होता है। ये कंपनियों के लिए कीमती है, क्योंकि इसमें सिर्फ काम का नतीजा नहीं, बल्कि उसके पीछे का प्रोसेस भी कैप्चर होता है, जिसे AI सिस्टम अभी समझने और दोहराने में जूझते हैं।
Microsoft Recall भी यही लॉजिक अपनाता है, जो कंप्यूटर पे किसी के किए गए काम के स्नैपशॉट लेता है, और Microsoft इसे AI ट्रेनिंग पाइपलाइन नहीं, बल्कि प्रोडक्टिविटी ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर की तरह पेश करता है। लेकिन इससे ये भी दिखता है कि Big Tech ने बेहद बारीक व्यवहार के निशानों को किसी ऐसी चीज़ में बदलना कितना आसान बना लिया है, जिसे सिस्टम रिकॉर्ड कर सकें और उससे सीख सकें। काम की जगह पे ऐसी खासियतें, जिन्हें ऑप्शनल बताया जाता है, मना करना मुश्किल बना देती हैं, क्योंकि कंपनी की नीति पे नियंत्रण नियोक्ता के पास होता है, जो सहमति के इर्द-गिर्द के पावर डायनैमिक्स को भी आकार देता है।
Meta के मामले में, MCI ऐसा लगता है जैसे पर्सनल डाटे के ज़्यादा निजी और खुलासा करने वाले रूपों को कैप्चर करने के बड़े प्रयास का एक और हिस्सा हो। कंपनी पहले से ही Facebook, Instagram, WhatsApp और अपने पूरे इकोसिस्टम के सभी Meta AI इंटरैक्शन का इस्तेमाल प्रोडक्ट बेहतर बनाने, AI ट्रेनिंग और टारगेटेड ऐड्स के लिए कर रही है, उन जगहों पे जहां GDPR जैसी मजबूत निजता सुरक्षा नहीं है।
कर्मचारियों को ट्रैक करना काम को बदतर बना सकता है
AI ट्रेनिंग के लिए Meta के कर्मचारियों को ट्रैक करने की एक और समस्या ये है कि इससे काम बदतर हो सकता है(नई विंडो)। क्लिक ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर की तरह, ये कीस्ट्रोक और माउस मूवमेंट को मायने रखने वाले सिग्नल मानता है। लेकिन ऊपर से ज़्यादा एडवांस AI की परतें चढ़ाने के बाद भी, ये असली परफॉर्मेंस के खराब प्रतिरूप ही हैं, खासकर नॉलेज वर्क में, जहां क्रिटिकल थिंकिंग, प्लानिंग, अलग-अलग कामों के आइडियाज़ को कनेक्ट करना और समस्याएं सुलझाना बाहर से अक्सर दिखता ही नहीं।
जब कामगारों को पता चलता है कि ये सिग्नल कैप्चर किए जा रहे हैं — खासकर अगर उन्हें शक हो कि किसी दिन वो उन्हीं AI एजेंट्स की जगह ले सकते हैं जिन्हें बेहतर बनाने में वो खुद मदद कर रहे हैं — तो बिजी दिखने के लिए खुद को ऑप्टिमाइज़ करने, या यूं कहें कि मायने रखने वाले काम की बजाय जानबूझकर अपना व्यवहार बिगाड़ने की एक गलत प्रेरणा पैदा होती है। निगरानी और अविश्वास काम की जगह का आम नियम बन जाते हैं।
निजता-फर्स्ट इंफ्रास्ट्रक्चर क्यों ज़रूरी है
निकालने के इर्द-गिर्द बने प्लैटफॉर्म में हर इंटरैक्शन ऐसे डाटे की तरह दिखने लगता है, जो मुनाफ़े में बदलने, ऑप्टिमाइज़ करने या किसी दूसरे सिस्टम में डालने का इंतज़ार कर रहा हो। जब AI की बात हो, तो वो सिस्टम आपको समझने, आपकी नकल करने और आखिरकार आपकी जगह लेने के लिए इस्तेमाल हो सकता है।
निजता-फर्स्ट सर्विसेज़ इसलिए ज़रूरी हैं, क्योंकि कंपनी जितना कम डाटा एक्सेस कर सके, इस तरह के मिशन क्रीप के लिए उसमें उतनी ही कम गुंजाइश रहती है। शुरु-से-अंत तक एन्क्रिप्शन जैसी मजबूत सुरक्षा किसी प्लैटफॉर्म को शुरू से ही कम देखने देती है, जबकि ओपन-सोर्स कोड पारदर्शिता जोड़ता है, क्योंकि इससे ये जांचा जा सकता है कि ये सिस्टम असल में कैसे काम करते हैं। इन दोनों से कर्मचारियों और ग्राहकों, दोनों का भरोसा बनाए रखने में मदद मिलती है।






