स्टार्मर सरकार की नई जानकारी के बाद 15 जनवरी 2026 को अपडेट हुआ
पहचान सत्यापन उन कई ज़रूरी सरकारी सेवाओं में से एक है जिनका डिजिटल रूपांतरण हो रहा है। यूके सरकार ने 2028 तक हर यूके नागरिक और कानूनी निवासी के लिए डिजिटल आईडी लाने का प्रस्ताव दिया है। यूके में रहने वालों के लिए इसका क्या मतलब है? सबसे पहले हमें ये समझना होगा कि डिजिटल आईडी क्या है और ये कैसे काम कर सकती है।
डिजिटल आईडी क्या है?
अगर ये योजना लागू होती है, तो ब्रिटिश नागरिकों और कानूनी निवासियों को डिजिटल आईडी दी जाएगी, जिसे उनकी पहचान और यूके में काम करने के अधिकार के सबूत के तौर पे स्वीकार किया जाएगा। इस आईडी को एक ऐप में स्टोर किया जाएगा और ये फिजिकल रूप में उपलब्ध नहीं होगी।
यूके सरकार(नई विंडो) के मुताबिक, डिजिटल आईडी में ये डाटा शामिल होगा:
- नाम
- जन्म की तारीख
- राष्ट्रीयता या निवास स्थिति की जानकारी
- बायोमेट्रिक सुरक्षा के आधार के तौर पे एक फोटो
सरकार डिजिटल आईडी को लेकर एक सार्वजनिक परामर्श शुरू करने जा रही है, जिसमें ये भी “देखा जाएगा कि क्या पता जैसी कोई अतिरिक्त जानकारी शामिल करना मददगार होगी।”
यूके डिजिटल आईडी क्यों लाना चाहता है?
यूके में डिजिटल आईडी लाने की बहस तब से चल रही है, जब पूर्व यूके प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने अपने कार्यकाल के दौरान इस योजना का प्रस्ताव पहली बार दिया था। विरोध और निजता की चिंताओं की वजह से ये प्रोजेक्ट कई बार टल गया, लेकिन मौजूदा सरकार ने अब एक अनिवार्य राष्ट्रीय डिजिटल आईडी योजना को मंजूरी दे दी है।
सरकार डिजिटल पहचान के संचालन की जांच कर रही है और साथ ही इस तरह की योजना के संभावित आर्थिक फायदों के साथ-साथ जोखिमों का भी विश्लेषण कर रही है: एक नई जांच का दावा है(नई विंडो) कि फिजिकल दस्तावेज़ों पे निर्भर रहना अकुशल है और फ्रॉड के मौके भी पैदा करता है, और ये दोनों ऐसी समस्याएं हैं जिन्हें डिजिटल आईडी हल कर सकती हैं। सरकार का दावा है कि फिजिकल दस्तावेज़ों पे निर्भर न रहकर, सरकारी लाभ या काउंसिल टैक्स जैसी सेवाओं को एक्सेस करने का इंतज़ार का समय काफी कम हो सकता है। उनका कहना है कि इससे फ्रॉड भी कम होगी और उम्र सत्यापन भी आसान होगा।
पिछले कुछ सालों में प्रवासियों को बदनाम करने की वजह से दूसरे देशों से यूके आने वालों के खिलाफ विरोध का माहौल बन गया है। सरकार ने गिग इकोनॉमी(नई विंडो) में बदलावों का प्रस्ताव दिया है और यूके में गैरकानूनी तौर पे काम करने वालों के कथित खतरे से निपटने के लिए छापे(नई विंडो) भी मारे हैं। शुरुआत में यूके सरकार ने दावा किया था(नई विंडो) कि डिजिटल आईडी से “रोज़गार जांचें सख्त होंगी, जिनमें गिग इकोनॉमी भी शामिल है, और गैरकानूनी प्रवासियों के काम की संभावना रुकेगी।”
लेकिन जनवरी 2025 में खूब चर्चा हुई कि सरकार ने यूके के वर्कर्स के लिए अनिवार्य डिजिटल आईडी पर अपना रुख बदल लिया(नई विंडो)। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर का दावा है कि “जांच होंगी, वो डिजिटल होंगी और वो अनिवार्य होंगी।” लेकिन अभी तक ये साफ नहीं है कि वो कैसी होंगी।
ये लिखते समय, ऐसा लगता है कि सरकार अब भी डिजिटल आईडी को बढ़ावा देना चाहती है और यूके के साथ-साथ बाहर के वर्कर्स को इन्हें अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी, लेकिन Right to Work जांच पास करने के लिए डिजिटल आईडी के दूसरे रूप, जैसे पासपोर्ट में बायोमेट्रिक चिप, भी मान्य होंगे। डिजिटल आईडी को अब भी सरकारी सेवाओं को एक्सेस करने का सबसे सुरक्षित और आसान तरीका बताया जा रहा है, और ये 2029 में इस संसद के खत्म होने तक उपलब्ध होने की उम्मीद है।
नया डिजिटल आईडी कैसे काम करेगा?
ऐसा लगता है कि यूके में डिजिटल आईडी का इंफ्रास्ट्रक्चर अब भी फाइनल हो रहा है। सरकारी संचार से जो समझ आता है, डिजिटल आईडी योजना दो सरकारी बनाए सिस्टम पे आधारित होगी: GOV.UK One Login और GOV.UK Wallet। One Login(नई विंडो) एक पहचान सत्यापन सेवा है, जो केंद्र सरकार की सेवा पे काम करने वालों को वर्कर्स की पहचान सत्यापित करने देती है और आखिरकार सभी सरकारी सेवाओं का एक्सेस केंद्रीकृत करेगी। Wallet(नई विंडो) एक अभी-तक रिलीज़ न हुई ऐप है, जो यूके के नागरिकों को सरकार की जारी की डिजिटल दस्तावेज़ स्टोर करने देगी।
अभी ये साफ नहीं है कि आईडी खुद कैसे काम करेगी। अपने डिजिटल आईडी योजना के एक्सप्लेनर पेज(नई विंडो) पे सरकार का दावा है कि डिजिटल प्रमाण यूज़र्स के डिवाइस पे स्टोर किए जाएंगे। नया सिस्टम उनका डाटा बचाने के लिए एन्क्रिप्शन और सत्यापन का भी इस्तेमाल करेगा। आने वाले सालों में ये सिस्टम बदल सकता है, लेकिन फिलहाल सरकार के मुताबिक NHS ऐप या डिजिटल बैंकिंग ऐप जैसे ऐप डिजिटल आईडी सिस्टम को बनाने का रास्ता तय करेंगे।
नवंबर 2025 में जारी एक रिसर्च ब्रीफिंग(नई विंडो) में विकेंद्रीकृत ID सिस्टम का जिक्र था। विकेंद्रीकृत सिस्टम का मतलब होगा कि आईडी सिर्फ उसके मालिक के डिवाइस पे स्टोर किया जाए, जबकि उनका डाटा उस प्राधिकरण के पास रहे जिसने आईडी जारी की। इस तरह का आर्किटेक्चर यूके के निवासियों की डाटा संप्रभुता के हित में होगा, लेकिन ये देखना बाकी है कि 2029 तक लॉन्च होने वाली आखिरी आईडी योजना विकेंद्रीकृत होगी या नहीं।
यूके में डाटा को कौन से कानून नियंत्रित करते हैं?
यूके में डाटा सुरक्षा को UK General Data Protection Regulation (UK GDPR) और Data Protection Act 2018 नियंत्रित करते हैं। अगर आपको शक हो कि कोई संगठन आपका पर्सनल डाटा गलत इस्तेमाल कर रहा है, तो आप Information Commissioner’s Office (ICO) में शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
लेकिन यूके में डाटा का एक्सेस और इस्तेमाल बदलने वाला है। तीन साल के कानूनी विकास के बाद, Data Protection Act में The Data (Use and Access) Act(नई विंडो) के ज़रिए लाए गए संशोधन अगस्त 2025 में लागू हुए। ये एक्ट यूके के मौजूदा डाटा सुरक्षा फ्रेमवर्क के कुछ हिस्सों में बदलाव करता है और कई नए उपाय लाता है, जिनमें शामिल हैं:
- डिजिटल वेरिफिकेशन सर्विसेज़ फ्रेमवर्क (जो डिजिटल आईडी को आसान बनाएगा)
- यूके में “स्मार्ट डाटा” योजनाओं को सेटअप करें के लिए एक फ्रेमवर्क
- ICO के कर्तव्यों में बदलाव और उसका पुनर्गठन
- डाटा प्रोसेसिंग की वैधता में बदलाव
कुछ नागरिक अधिकारों के लिए अभियान चलाने वाले संगठन, जैसे Big Brother Watch(नई विंडो), ने बताया है कि Data Protection Act में बदलावों से डाटा अधिकार कमजोर हो रहे हैं। डिजिटल आईडी योजना पे GOV.UK ब्रीफिंग के मुताबिक: “सरकार तीसरें-पार्टी को आपके पर्सनल डाटा का एक्सेस सिर्फ तब देगी जब आप ये शेयर करना शुरू करें या यूके के डाटा सुरक्षा कानूनों के तहत ये वरना अनुमत हो।” चूंकि ये डाटा सुरक्षा कानून तेजी से बदल रहे हैं, इससे लोगों की जगह बिज़नेस को फायदा हो सकता है। बिज़नेस के लिए डाटा का एक्सेस पाना आसान होगा, और ये नागरिकों की निजता के हित में नहीं हो सकता।
डिजिटल आईडी याचिकाएं ज़ोर पकड़ रही हैं
चिंतित नागरिकों का विरोध पहले से शुरू हो चुका है, और ऑनलाइन डिजिटल आईडी के खिलाफ कई याचिकाएं सामने आई हैं। यूके के लोगों को चिंता है कि सरकार ऐसी योजना शुरू करेगी जो डाटा कलेक्शन में हद से ज़्यादा बढ़ेगी और उन्हें निगरानी और खतरनाक डाटा लीक(नई विंडो) के खतरे में डाल देगी।
GOV.UK Petitions पेज पे एक मशहूर याचिका पर लगभग 30 लाख हस्ताक्षर हैं। संसद ने 8 दिसंबर 2025 को इस याचिका पर बहस की, जिसमें मास निगरानी को अपनी प्रमुख चिंताओं में से एक बताया गया है। बहस में इतने लोग शामिल हुए कि तीन मिनट की स्पीच की सीमा लगानी पड़ी, और चिंताएं डिजिटल अपवर्जन से लेकर पर्सनल डाटा की सुरक्षा तक फैली थीं। जनवरी 2026 में सरकार के रुख में बदलाव को देखते हुए, लगता है कि इस योजना के खिलाफ विरोध ने सरकार के प्लैन पर काफी असर डाला है।
चिंतित नागरिकों के लिए ये जानकर राहत की बात होगी कि कई एक्सपर्ट डिजिटल आईडी से होने वाले संभावित नुकसान की जांच कर रहे हैं और सबसे ज़्यादा ह्यूमन-सेंट्रिक और निजी लागू करने की वकालत कर रहे हैं। Liberty Investigates(नई विंडो), जो यूके का सबसे बड़ा नागरिक अधिकार संगठन है, उन कई संगठनों में से एक है जो यूके के नागरिकों को डिजिटल आईडी योजना के मौजूदा प्लैन के बारे में खुद जानने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। ये संवेदनशील डेटाबेस के आसपास फायरवॉल बनाने की सिफारिशें करता है और लोगों को बाहर रखने की बजाय नागरिकों को पब्लिक सेवाओं को एक्सेस करने देने पे फोकस करता है।
क्या डिजिटल आईडी योजना यूके के लिए फायदेमंद हो सकती है?
यूके के डिजिटल आईडी अपनाने को लेकर अब भी बहुत कुछ अनजाना है, लेकिन डाटा निजता, डाटा संप्रभुता और सुलभता जैसी अवधारणाओं को देखकर हम इस योजना के संभावित असर को समझ सकते हैं।
फायदे
स्मार्टफोन पे स्टोर की गई मुफ्त आईडी कई लोगों की सेवाओं को एक्सेस करने की क्षमता बेहतर कर सकती है। सिद्धांत रूप में, पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस का मुफ्त विकल्प कम आमदनी वालों के लिए फायदेमंद होगा। मकान मालिक, बैंक या नियोक्ता को अपनी पहचान साबित करने का भरोसेमंद और मुफ्त तरीका होने से यूके में रोज़मर्रा की जिंदगी आसान हो सकती है।
विकेंद्रीकृत आईडी योजना पर्सनल डाटा के मामले में ज़्यादा हस्तक्षेप भी रोक सकती है। अपनी जन्मतिथि देने की बजाय, डिजिटल आईडी बस ये सत्यापित कर सकती है कि आप 18 से ऊपर हैं। सिद्धांत रूप में, इससे आप असल में कितना पर्सनल डाटा शेयर करते हैं, वो छोटा किया जा सकता है। लाखों यूके निवासियों का पर्सनल डाटा स्टोर करने वाला केंद्रीकृत सिस्टम हैकर्स के लिए एक कीमती निशाना है, जबकि विकेंद्रीकृत सिस्टम आपको अपनी पहचान का मालिक बनने और अपनी जानकारी एक ही सुरक्षित स्थान पे स्टोर करने देता है।
चिंताएं
पिछले कुछ सालों में यूके कानून में खराब तरीके से लागू बदलावों का असर नागरिकों के लिए अफरा-तफरी बन गया है। Online Safety Act की उम्र सत्यापन ज़रूरतों के बाद, Discord की चुनी हुई तीसरें-पार्टी उम्र सत्यापन सर्विस पर हुए साइबर अटैक में लगभग 70,000 ID फोटो और संभवतया दूसरी पर्सनल और कुछ वित्तीय जानकारी भी लीक हुई। बिज़नेस को यूके के बाहर मौजूद तीसरें-पार्टी वेरिफिकेशन सर्विसेज़ पर निर्भर रहने के लिए मजबूर करके, सरकार असरदार तौर पे नागरिकों को संवेदनशील डाटा उन बिज़नेस के साथ शेयर करने के लिए मजबूर करती है जिनके साथ उन्होंने ऐसा करना चुना ही नहीं था।
अगर डिजिटल आईडी योजना के पीछे के टेक्निकल आर्किटेक्चर की निगरानी किसी कॉन्ट्रैक्टर को हैंडल करनी हो, तो समझदारी से चुनने की ज़िम्मेदारी यूके सरकार की होगी। हाल के ब्रिटिश इतिहास के सबसे बड़े न्यायिक अन्यायों में से एक, Horizon IT घोटाला(नई विंडो), में अविश्वसनीय अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर ने ऐसे वित्तीय घाटे पैदा किए जिनका इल्ज़ाम सबपोस्टमास्टर्स पर डाला गया। गलत मुकदमों से मुआवज़े की अदायगी अब भी चल रही है और मुआवज़े की अपेक्षित अंतिम लागत £1 अरब से ज़्यादा है। वेंडर्स की गलत पसंद जनता से उनकी निजता और आजीविका छीन सकती है और सरकार के कीमती संसाधनों को भी खत्म कर सकती है।
यूके के डिजिटल आईडी प्रस्ताव के बारे में जानकारी रखें
डिजिटल आईडी योजना अगले दो सालों में काफी बदलेगी। सरकार के प्लैन के बारे में जानकारी रखना और जहां ज़रूरी हो वहां सवाल उठाना यूके के निवासियों पर है। लोगों को सबसे पहले रखने वाला पहचान सत्यापन समाधान ढूंढने में जानकार नागरिक ही यूके की सबसे बड़ी उम्मीद हैं।
ये ज़रूरी है कि सरकारों या निजी टेक वेंडर्स के बजाय लोगों का अपने बायोमेट्रिक डाटा पर अकेला अधिकार हो, ताकि ये पक्का हो सके कि हमारा डाटा गलत इस्तेमाल, लीक या मुनाफ़े के लिए इस्तेमाल न हो। हम यूके के डिजिटल आईडी प्रयासों पर नज़र बनाए रखेंगे, क्योंकि इसे लागू करने के तरीके का पहचान प्रबंधन के भविष्य पर बड़ा असर पड़ेगा।






