FBI ने इस हफ्ते इस बात की सच्ची पुष्टि की है कि वो अमेरिकियों का स्थान डाटा कमर्शियल डाटा ब्रोकर्स से खरीद रहा है, जो सरकार को बिना पारंपरिक वारंट आधारित अनुरोध के संवेदनशील जानकारी तक एक्सेस करने की सुविधा देता है.
ये पुष्टि सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी की सुनवाई के दौरान हुई, जहां FBI डायरेक्टर कश पटेल ने कहा कि एजेंसी जांच के लिए “कमर्शियली उपलब्ध जानकारी” खरीदती है, Politico के मुताबिक(नई विंडो)। इस बातचीत पर कानून बनाने वालों ने तुरंत आलोचना की, जिनमें ओरेगन के सीनेटर रॉन वायडेन भी शामिल हैं, जिन्होंने कहा कि ये प्रैक्टिस गंभीर संवैधानिक चिंताएं पैदा करती है(नई विंडो)।
2023 के बाद ये पहली पुष्टि है कि FBI दोबारा इस तरह का डाटा सक्रिय रूप से खरीद रहा है।
FBI बिना वारंट स्थान इतिहास का एक्सेस कैसे कर सकता है
2018 में यूएस सुप्रीम कोर्ट ने Carpenter v. United States(नई विंडो) में फैसला दिया था कि कानून प्रवर्तन को टेलीकॉम प्रोवाइडर्स से स्थान डाटा का एक्सेस लेने के लिए वारंट हासिल करना होगा। लेकिन डाटा ब्रोकर्स ऐसी ही जानकारी हासिल करने का दूसरा रास्ता देते हैं।
फोन कंपनियों से सीधे रिकॉर्ड मांगने की बजाय एजेंसियां मोबाइल ऐप्स, विज्ञापन सिस्टम और डिजिटल ट्रैकिंग के दूसरे ज़रिए से इकट्ठा किए गए मिलते-जुलते डेटासेट खरीद सकती हैं। इन डेटासेट में अक्सर विस्तृत स्थान इतिहास शामिल होता है, जो दिखाता है कि कोई कहां-कहां गया है और दुनिया में कैसे घूमता है।
ये सिस्टम डाटा ब्रोकर्स की वजह से चलता है, जो सीमित पारदर्शिता के साथ पर्सनल जानकारी इकट्ठा, पैकेज और बेचते हैं।
कमर्शियल ट्रैकिंग पे बना सिस्टम
डाटा ब्रोकर ऐप्स, वेबसाइट और तीसरें-पार्टी पार्टनर्स से जानकारी इकट्ठा करते हैं। स्थान डाटा उस सिस्टम का केंद्रीय हिस्सा है, जो अक्सर रूटीन ऐप परमिशन और बैकग्राउंड में चल रहे ऐप्स से सक्षम की गई स्थान सर्विसेज़(नई विंडो) के ज़रिए इकट्ठा होता है।
ये जानकारी ब्राउज़िंग गतिविधि, खरीद और अनुमानित रुचियों जैसे दूसरे सिग्नल्स के साथ जोड़ी जाती है। नतीजा एक विस्तृत प्रोफाइल होती है, जिसे सरकारी एजेंसियों समेत कई तरह के खरीदारों को बेचा जा सकता है।
ये डाटा सिर्फ निगरानी से आगे इस्तेमाल होता है। ये विज्ञापनों को आकार दे सकता है और राजनीतिक संदेशों पर उस तरह असर डाल सकता है जिससे लोकतंत्र कमज़ोर होता है। ये डेटासेट लगातार बढ़ते जा रहे हैं और इनका तेज़ी से AI से विश्लेषण किया जा रहा है, जिससे डाटा का क्रॉस-रेफरेंस करना और लोगों के बारे में गहरे पैटर्न उजागर करना आसान हो जाता है, जो मौजूदा पूर्वाग्रहों को बढ़ाता है और बड़े पैमाने पे ज़्यादा सटीक मैनिपुलेशन सक्षम करता है।
ये चिंता क्यों पैदा करता है
चौथा संशोधन सरकारी निगरानी की सीमाएं तय करता है। आलोचकों का तर्क है कि ब्रोकर्स से डाटा खरीदने से एजेंसियों को बिना उन पाबंदियों के ऐसी ही जानकारी का एक्सेस मिल जाता है।
वायडेन ने सुनवाई के दौरान इस प्रैक्टिस को संवैधानिक सुरक्षा को “बेहूदे तरीके से टालना” बताया, जैसा The Guardian ने रिपोर्ट किया।
डाटा का दायरा भी चिंता का हिस्सा है। डाटा ब्रोकर्स किसी खास संदिग्ध की नहीं, बल्कि बड़ी आबादी की जानकारी इकट्ठा करते हैं। यानी रोज़मर्रा की दिनचर्या से जुड़ा स्थान डाटा बिना सूचना या सहमति के एक्सेस किया जा सकता है।
ये डाटा एक बार इकट्ठा होने के बाद उसे हटाना मुश्किल हो सकता है। कई ब्रोकर्स उसे मिटा देते नहीं, और वही जानकारी पीपल-फाइंडर वेबसाइट पर सामने आ सकती है।
अपने डाटा का एक्सपोज़र कैसे कम करें
डाटा इकट्ठा होना पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन इन सिस्टम में कितनी जानकारी दर्ज होती है, वो कम की जा सकती है।
ऐप परमिशन सीमित करना और स्थान सर्विसेज़ बंद करना(नई विंडो) सबसे असरदार कदमों में से एक है। इस्तेमाल न होने वाले ऐप्स हटाने और ट्रैकिंग पे निर्भर सर्विसेज़ से बचने से भी एक्सपोज़र कम होता है।
एक VPN (वर्चुअल निजी नेटवर्क)(नई विंडो) आपके IP पते(नई विंडो) को छिपाने और आपके इंटरनेट ट्रैफिक को एन्क्रिप्ट करने में मदद करता है। इससे तीसरें-पार्टी के लिए आपकी गतिविधि को आपकी पहचान से लिंक करना मुश्किल हो जाता है, जिससे बाद में बेची जा सकने वाली जानकारी की मात्रा कम हो जाती है।
आगे इसका क्या मतलब है
FBI की मान्यता सरकारी निगरानी कैसे काम करती है, इस पे रोशनी डालती है, लेकिन ये कोई नई बात नहीं है। Big Tech सालों से उसी मॉडल पे काम कर रहा है, जिसमें मुनाफ़े के लिए उपयोगकर्ता डाटा हासिल किया जाता है और गलत काम मानने या लोगों को ये दिखाने कि वो उनकी निजता को कितना कम महत्व देते हैं, इसकी बजाय कारोबार की लागत के तौर पे अरबों डॉलर के जुर्माने चुकाए जाते हैं। FBI जैसी सरकारी एजेंसियां बस इसी मौजूदा इकोसिस्टम में टैप कर रही हैं, चाहे डाटा ब्रोकर्स के ज़रिए हो या Big Tech कंपनियों के ज़रिए।
ऐप्स और सर्विसेज़ आपकी सबसे कीमती और संवेदनशील जानकारी लगातार इकट्ठा करते हैं, जिसे पैकेज करके, दूसरे डेटासेट के साथ जोड़कर, बढ़ते कमर्शियल मार्केट के ज़रिए बेचा जा सकता है। वक्त के साथ ये सिस्टम और बेहतर होता गया है, खासकर जब से लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLMs) से बड़ी मात्रा में जानकारी का विश्लेषण, क्रॉस-रेफरेंस और अंतर्दृष्टि निकालना आसान हो गया है। ये डाटा एक बार सिस्टम में दर्ज होने के बाद उस पे कंट्रोल पाना मुश्किल हो जाता है। उसे ऐसे तरीकों से एक्सेस, विश्लेषण और फिर से इस्तेमाल किया जा सकता है जो देखना मुश्किल है और चुनौती देना उससे भी ज़्यादा।
लेकिन शुरुआत में ही आप कितना डाटा बनाते हैं, वो कम करना इस सिस्टम से बाहर रहने के सबसे असरदार तरीकों में से एक है।






