व्यवसाय और अन्य संगठन कर्मचारियों या ग्राहकों को कुछ ऑनलाइन कंटेंट को एक्सेस करने से रोकने के लिए कंटेंट फिल्टरिंग का इस्तेमाल करते हैं।

ऐसा करने के कुछ कारण हो सकते हैं:

  • ऑफिस नेटवर्क की सुरक्षा बेहतर बनाने के लिए
  • ग्राहकों, शैक्षिक संस्थानों के छात्रों, या पब्लिक वाई-फाई हॉटस्पॉट इस्तेमाल करने वाले किसी भी व्यक्ति को गैरकानूनी या अनचाहे कंटेंट को एक्सेस करने से रोकने के लिए
  • सोशल मीडिया को एक्सेस करने पर पाबंदी लगाकर स्टाफ के सदस्यों की प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए

इस लेख में हम संगठन कंटेंट फिल्टरिंग का इस्तेमाल क्यों करते हैं और इसे कैसे लागू करते हैं, इस बारे में गहराई से जानेंगे।

कंटेंट फिल्टरिंग का इस्तेमाल क्यों करें?

कोई व्यवसाय या संगठन कई कारणों से कंटेंट फिल्टरिंग लागू कर सकता है। घर, स्कूल, कार्यस्थल, और पब्लिक नेटवर्क जैसे अलग-अलग संदर्भों में स्वीकार्य उपयोग, सुरक्षा, और अनुपालन से जुड़ी नीतियों को लागू करने के लिए आमतौर पर इसका इस्तेमाल किया जाता है।

सुरक्षा

दुर्भावनापूर्ण वेबसाइटों और कंटेंट को एक्सेस करने पर रोक लगाकर कंटेंट फिल्टरिंग, नेटवर्क और सिस्टम को मालवेयर, वायरस, और अन्य सुरक्षा खतरों से बचाने में मदद करती है। ये कर्मचारियों को अनजाने में नुकसानदेह फ़ाइलें डाउनलोड करने या एक्सेस करने से रोक सकती है, और उन्हें फिशिंग घोटालों से भी बचा सकती है।

स्वीकार्य उपयोग

बहुत सारे (अगर ज़्यादातर नहीं) संगठनों के पास स्वीकार्य उपयोग नीतियां (AUPs) होती हैं, जो बताती हैं कि उनके नेटवर्क और इंटरनेट संसाधनों का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, ज़्यादातर कंपनियां नहीं चाहतीं कि स्टाफ अपने ऑफिस वाई-फाई नेटवर्क का इस्तेमाल NSFW(नई विंडो), आपत्तिजनक, भेदभावपूर्ण या उत्पीड़न वाले कंटेंट को एक्सेस करने के लिए करे।

AUP का उल्लंघन करने वाली वेबसाइटों और कंटेंट को एक्सेस करने पर रोक लगाकर कंटेंट फिल्टरिंग इन नीतियों को लागू कर सकती है।

पब्लिक वाई-फाई

इसी तरह, कैफे, हवाई अड्डे, और होटल जैसे पब्लिक वाई-फाई सेवाएं देने वाले व्यवसाय, अपने ग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ गैरकानूनी या नुकसानदेह कंटेंट को एक्सेस करने से रोकने के लिए कंटेंट फिल्टरिंग का इस्तेमाल करते हैं।

ये बात यूनिवर्सिटी, स्कूल और दूसरे शैक्षिक संस्थानों पे भी लागू होती है, जो अक्सर अपने नेटवर्क पे व्यावसायिक व्यवसायों की तुलना में ज़्यादा सख्त पाबंदियां लगाते हैं।

प्रोडक्टिविटी में इज़ाफा

संगठन कभी-कभी काम से जुड़ी न हुई वेबसाइटों, जैसे सोशल मीडिया, गेमिंग और स्ट्रीम प्लैटफॉर्म को एक्सेस करने पर पाबंदी लगाकर कार्यस्थल की प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए कंटेंट फिल्टरिंग का इस्तेमाल करते हैं।

इसका मकसद ये सुनिश्चित करने में मदद करना है कि कर्मचारी अपने काम पे फोकस बनाए रखें, लेकिन जब सब अपने स्मार्टफोन पे आसानी से ऐसी सेवाओं को एक्सेस कर सकते हैं, तो शक है कि ऐसी रणनीतियां कितनी असरदार होती हैं।

अनुपालन

व्यवसाय अक्सर ये सुनिश्चित करने के लिए कंटेंट फिल्टरिंग का इस्तेमाल करते हैं कि वे इंडस्ट्री नियमों, कानूनी ज़रूरतों, और आंतरिक नीतियों का पालन करें। इसमें कर्मचारियों को ईमेल या दूसरे संवाद चैनलों के ज़रिए संवेदनशील जानकारी शेयर करने से रोककर HIPAA, GDPR(नई विंडो), या CCPA जैसे डाटा सुरक्षा नियमों का पालन करना शामिल हो सकता है।

कंटेंट फिल्टरिंग का इस्तेमाल इंडस्ट्री-विशिष्ट नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने में मदद के लिए भी किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, किसी वित्तीय संस्थान पर Sarbanes-Oxley Act(नई विंडो)या Payment Card Industry Data Security Standard(नई विंडो) (PCI DSS) जैसे नियम लागू हो सकते हैं, जिनमें डाटा को एक्सेस और स्टोरेज करने पर सख्त नियंत्रण ज़रूरी होते हैं। कंटेंट फिल्टरिंग इन नियमों को लागू करने में मदद कर सकती है।

अनुपालन का एक और पहलू है रिकॉर्ड रखना और ऑडिटिंग। कंटेंट फिल्टरिंग सॉल्यूशन ऐसे लॉग और रिपोर्ट दे सकते हैं, जिनका इस्तेमाल ऑडिटिंग और अनुपालन की पुष्टि के लिए किया जा सकता है। ये रिकॉर्ड ये दिखाने के लिए बेहद ज़रूरी हो सकते हैं कि कोई संगठन अपने अनुपालन दायित्वों को पूरा करने के लिए ज़रूरी कदम उठा रहा है।

बैंडविड्थ मैनेजमेंट

व्यवसाय के लिए ज़रूरी एप्लीकेशन को प्राथमिकता देकर और वीडियो स्ट्रीम जैसी बैंडविड्थ-गहन गतिविधियों को एक्सेस करना सीमित करके, कंटेंट फिल्टरिंग का इस्तेमाल नेटवर्क बैंडविड्थ को ज़्यादा असरदार तरीके से संभालने के लिए किया जा सकता है।

कंटेंट फिल्टरिंग कैसे काम करती है?

कंटेंट फिल्टरिंग को अलग-अलग तरीकों से लागू किया जा सकता है। कौन सा तरीका इस्तेमाल होगा, ये किसी संगठन की ज़रूरतों पे निर्भर करेगा (और वो कई कंटेंट फिल्टरिंग तकनीकों का इस्तेमाल कर सकता है)।

DNS फिल्टरिंग

डोमेन नेम सिस्टम (DNS), इंसानों के पढ़ने लायक डोमेन नामों को उनके संबंधित IP पतों(नई विंडो) से मैप करता है (उदाहरण के लिए: protonvpn.com से 185.159.159.140)। DNS फिल्टरिंग ब्लैकलिस्ट में शामिल डोमेन के लिए DNS क्वेरी को रिज़ॉल्व होने से रोकती है।

DNS कैसे काम करता है, इस बारे में और जानें(नई विंडो)

वेब कंटेंट फिल्टरिंग के अलावा, DNS फिल्टरिंग ज्ञात दुर्भावनापूर्ण डोमेन को एक्सेस करने पर रोक लगाकर संगठनों को मालवेयर और फिशिंग खतरों से बचाने में मदद कर सकती है। ये उपयोगकर्ताओं को अनजाने में ऐसी वेबसाइटों पे जाने से रोक सकती है, जो मालवेयर फैलाती हैं या फिशिंग घोटालों की मेज़बानी करती हैं।

DNS फिल्टरिंग का इस्तेमाल ऐड सर्वर या ऑनलाइन विज्ञापन देने के लिए जाने जाने वाले डोमेन को एक्सेस करने पर रोक लगाने के लिए भी किया जा सकता है। इससे वेब ब्राउज़ करते वक्त दिखाए जाने वाले विज्ञापनों की संख्या कम करने में मदद मिलती है, जिससे उपयोगकर्ताओं को बेहतर अनुभव मिलता है।

Proton VPN सभी प्लैटफॉर्म पे DNS फिल्टरिंग टूल देता है, जिसे NetShield Ad-blocker कहा जाता है और जो विज्ञापन, मालवेयर, और ट्रैकर को ब्लॉक कर सकता है।

NetShield Ad-blocker के बारे में और जानें (नई विंडो)

URL फिल्टरिंग

URL फिल्टरिंग DNS फिल्टरिंग जैसी ही है, सिवाय इसके कि ये कंटेंट को उसके वेब पते के आधार पे ब्लॉक करती है। इससे DNS फिल्टरिंग की तुलना में ज़्यादा बारीक नियंत्रण मिलता है, क्योंकि इसका इस्तेमाल पूरी वेबसाइट की बजाय किसी वेबसाइट के खास पेजों को ब्लॉक करने के लिए किया जा सकता है। हालांकि, मालवेयर और विज्ञापन जैसे दूसरे कंटेंट को ब्लॉक करने के लिए ये उतनी काम की नहीं है।

कीवर्ड फिल्टरिंग

खास शब्दों या वाक्यांशों के आधार पे कंटेंट फिल्टर करना, खास तरह या श्रेणी की वेबसाइटों, जैसे सट्टेबाज़ी या वयस्क कंटेंट होस्ट करने वाली वेबसाइटों को एक्सेस करने पर रोक लगाने के लिए काम का है।

व्हाइटलिस्टिंग

कुछ संगठन कंपनी के संसाधनों का इस्तेमाल करके एक्सेस किए जा सकने वाले सारे वेब कंटेंट को एक्सेस करने पे रोक लगाते हैं, सिवाय पहले से तय “व्हाइटलिस्टेड” वेबसाइटों की लिस्ट के। ये अक्सर सुरक्षा की वजहों से किया जाता है।

कंटेंट विश्लेषण

ये कंटेंट फिल्टरिंग की काफी नई किस्म है, जो वेबसाइटों के कंटेंट का विश्लेषण करने और फिर उस विश्लेषण के आधार पे ब्लॉक लागू करने के लिए मशीन लर्निंग (AI) एल्गोरिदम, जैसे नैचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग और इमेज और वीडियो रिकग्निशन का इस्तेमाल करती है।

कंटेंट विश्लेषण, पारंपरिक व्हाइटलिस्ट/ब्लैकलिस्ट तरीके की तुलना में कहीं ज़्यादा बारीक कंटेंट फिल्टरिंग की सुविधा देता है। उदाहरण के लिए, AI कंटेंट विश्लेषण फिल्टरिंग वयस्क वेबसाइट और सेक्सुअल हेल्थ की सलाह देने वाली वेबसाइट में फर्क कर सकती है।

हालांकि, AI कंटेंट विश्लेषण से जुड़ी निजता और नैतिकता की कई चिंताएं हैं। इन्हें असरदार और ज़िम्मेदाराना इंसानी निगरानी से संभाला जा सकता है, लेकिन ऑटोमेटेड कंटेंट विश्लेषण और इंसानी फैसले के बीच सही संतुलन बनाना एक चुनौतीपूर्ण समस्या बनी हुई है।

कंटेंट फिल्टरिंग के अन्य कारण

हालांकि इस लेख का फोकस व्यवसायों और शैक्षिक संस्थानों जैसे संगठनों पे है, जो कंटेंट फिल्टरिंग का इस्तेमाल करते हैं, ये बात ध्यान देने लायक है कि कंटेंट फिल्टरिंग का इस्तेमाल दूसरे संदर्भों में भी किया जाता है।

सरकारी सेंसरशिप

दुनिया भर की अधिनायकवादी सरकारें राजनीतिक, सामाजिक, या सामाजिक-धार्मिक वजहों से अपने नागरिकों का कंटेंट को एक्सेस करना ब्लॉक करती हैं। ऊपर दी गई कंटेंट फिल्टरिंग की किस्मों के अलावा (अक्सर ISP(नई विंडो) लेवल पे), सरकारें अपनी ताकत का इस्तेमाल कंटेंट फिल्टरिंग की अतिरिक्त किस्मों को अंजाम देने के लिए भी करती हैं।

सर्च इंजन ब्लॉक — सरकारें सर्च इंजन प्रोवाइडर्स पे दबाव बना सकती हैं कि वे जिन कंटेंट से वे सहमत नहीं हैं, उन्हें सर्च रिज़ल्ट से हटाएं।

डीप पैकेट इंस्पेक्शन (DPI) — ये नेटवर्क से गुज़रने वाले डाटा पैकेट की जांच करने का एक तरीका है, ताकि ट्रैफिक की किस्म की पहचान की जा सके।

पैरेंटल कंट्रोल

कंटेंट फिल्टरिंग का एक लोकप्रिय इस्तेमाल उन अभिभावकों के ज़रिए होता है, जो नियंत्रित करना चाहते हैं कि उनके बच्चे इंटरनेट पे क्या एक्सेस कर सकते हैं। हालांकि पहले ये काम “net nanny” सॉफ्टवेयर से होता था, पिछले कुछ सालों में इस मकसद के लिए ऑनलाइन software as a services(नई विंडो)(नई विंडो) (SaaS) सॉल्यूशन का इस्तेमाल करने की तरफ बड़ा बदलाव आया है।

अंतिम विचार

संगठनों के लिए कंटेंट फिल्टरिंग करने की बहुत सारी अच्छी वजहें हैं। आगे चलकर ये काफी संभावित है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की इसमें बढ़ती अहम भूमिका होगी, इसलिए कंपनियों के लिए ज़रूरी है कि वे अपने स्टाफ, ग्राहकों या छात्रों की निजता की सुरक्षा के लिए असरदार और नैतिक तरीके विकसित करें।

ये भी खतरा है कि अधिनायकवादी सरकारें अपने नागरिकों की आज़ादी को सीमित करने के लिए इस ताकत का दुरुपयोग करेंगी। हालांकि, Proton VPN for Business की मदद से, आप ऐसी पाबंदियों से बच सकते हैं और अपने संगठन के स्टाफ को फ्री और ओपन इंटरनेट तक बिना रुकावट एक्सेस दे सकते हैं।

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