Disney को Federal Trade Commission (FTC) के आरोपों को सुलझाने के लिए $10 मिलियन(नई विंडो) देने होंगे, जिनमें आरोप था कि उसने YouTube की चेतावनी के बावजूद YouTube पर अपने बच्चों के वीडियो को Made For Kids लेबल नहीं किया, जिसकी वजह से 13 साल से कम उम्र के बच्चों की जानकारी इकट्ठा हुई, जो COPPA का उल्लंघन था। इस समझौते के हिस्से के तौर पर Disney ने कोई गलती मानी नहीं।

COPPA क्या है?

अमेरिका का Children’s Online Privacy Protection Rule(नई विंडो) (COPPA) वेबसाइटों और ऑनलाइन सेवाओं को ये करने के लिए कहता है:

  • 13 साल से कम उम्र के बच्चों से जुड़ी निजी जानकारी इकट्ठा करने से पहले माता-पिता की सहमति लें।
  • सिर्फ वही जानकारी इकट्ठा करें जो सेवा के मकसद को पूरा करने के लिए ज़रूरी है; मार्केटिंग जैसे दूसरे इस्तेमाल के लिए माता-पिता की अतिरिक्त सहमति ज़रूरी है।

Disney ने YouTube की कंटेंट लेबलिंग लागू नहीं की

Disney ने बच्चों के लिए बने वीडियो YouTube पर अपलोड किए, लेकिन उन्हें Made for Kids लेबल नहीं दिया, जिसकी वजह से YouTube के बच्चों के लिए बनाए गए ज़्यादातर सेफगार्ड लागू नहीं हुए। YouTube पर अपनी COPPA उल्लंघन को लेकर FTC के साथ $170 मिलियन के समझौते(नई विंडो) के बाद 2019 में कंटेंट लेबलिंग सिस्टम(नई विंडो) लागू करने के बाद से ही बच्चों के कंटेंट पर ये लेबल ज़रूरी हैं।

Disney के इन वीडियो को सही तरीके से लेबल न करने की वजह से ये हुआ:

  • Disney ने बच्चों से उनके माता-पिता की सहमति मांगे बिना, जब वो ये वीडियो देखते थे, उनकी निजी जानकारी इकट्ठा की।
  • बच्चों को बड़े लोगों के लिए बना ऑनलाइन विज्ञापन दिखाया जाता था।
  • Disney के वीडियो खत्म होने के बाद बच्चों को ऑटोप्ले पर Not Made for Kids वीडियो दिखाए जाते थे।

हर वीडियो को अलग-अलग Made for Kids या Not Made for Kids लेबल देने की बजाय, वीडियो Not Made for Kids चैनल पर अपलोड किए गए और इसलिए डिफॉल्ट रूप से उन्हें अपने-आप Not Made for Kids लेबल मिल गया।

Disney का कहना है कि वीडियो गलती से गलत लेबल हो गए, लेकिन YouTube ने 2020 में Disney को चेतावनी दी थी कि उसे 300 से ज़्यादा वीडियो को Not Made for Kids से Made for Kids में दोबारा क्लासिफाई करना पड़ा। इन वीडियो में The Incredibles, Coco, Toy Story, Frozen और Mickey Mouse का कंटेंट और म्यूज़िक शामिल था। इस चेतावनी के बावजूद, Disney ने अपनी नीति बदलने की कोई कोशिश नहीं की।

$10 मिलियन के सिविल समझौते के अलावा, Disney ने बच्चों का डाटा इकट्ठा करने से पहले माता-पिता की सहमति लेना सुनिश्चित करने (जैसा कि COPPA में पहले से ही ज़रूरी है) और अपने वीडियो का सही लेबल होना सुनिश्चित करने के लिए एक प्रोग्राम बनाने पर सहमति दी है। उसे ये प्रोग्राम 10 साल तक या YouTube के अपना उम्र सत्यापन सिस्टम लागू करने तक चलाना होगा।

YouTube पे अपने बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए आप क्या कर सकते हैं

YouTube में पैरेंटल कंट्रोल्स(नई विंडो) हैं, जिनका इस्तेमाल करके आप डाटा इकट्ठा होना रोक सकते हैं और अपने बच्चों को गलत कंटेंट देखने से बचा सकते हैं। हालांकि, अगर कंपनियां सिस्टम को नज़रअंदाज़ करें, तो आप ज़्यादा कुछ नहीं कर सकते।

अगर आपके बच्चे काफी बड़े हैं, तो सबसे अच्छा तरीका ये है कि आप उनसे YouTube के काम करने के तरीके के बारे में बात करें। उन्हें बताएं कि YouTube उनकी हर हरकत का डाटा इकट्ठा करता है और उन्हें ऐसा कंटेंट दिखा सकता है जिसकी उन्हें उम्मीद नहीं या जो वो चाहते भी नहीं।

ये छोटे बच्चों के लिए ज़ाहिर तौर पर काम नहीं करेगा। ऐसे में सबसे अच्छा ये है कि बच्चों के YouTube देखते वक्त आप उनके पास रहें। इसका मतलब ये भी है कि बच्चों को टैबलेट या फोन पे अकेले या हेडफोन लगाकर देखने न दें। भले ही आप उनके साथ देख नहीं रहे हों, आपके पास रहने से आपको गलत कंटेंट आने पर दखल देने का बेहतर मौका मिलता है।

YouTube और उम्र सत्यापन

2025 में बच्चों की इंटरनेट सुरक्षा एक गरम मुद्दा बन गया है, जिसकी बड़ी वजह UK के विवादास्पद Online Safety Act(नई विंडो) का लागू होना है। इस नियम के मुताबिक वेबसाइटों की एक बहुत बड़ी रेंज (काफी बड़ी(नई विंडो) उन “पोर्न वेबसाइटों” से जिन्हें ये कानून दिखावटी तौर पर निशाना बनाता है) को ये सत्यापित करना होगा कि विज़िटर 18 साल से बड़े हैं। दुनिया की कई और जगहें, जिनमें EU(नई विंडो), ऑस्ट्रेलिया(नई विंडो) और कनाडा(नई विंडो) शामिल हैं, UK के रास्ते पे चलती दिख रही हैं।

Google ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता के जवाब में ऐलान(नई विंडो) किया है कि वो AI मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करके व्यूअर की उम्र का अंदाज़ा लगाने का प्लैन बना रहा है, जिसकी बुनियाद ज़्यादातर ये होगी कि वो कौन से वीडियो देखते हैं। वो कितने लंबे समय से सेवा इस्तेमाल कर रहे हैं, ये भी एक फैक्टर होगा।

अगर आपकी निजी देखने की आदतों के इस विस्तृत विश्लेषण के आधार पर Google को लगता है कि आप 18 से कम उम्र के हैं, तो वो पर्सनलाइज़्ड विज्ञापन अक्षम कर देगा और रिकमेंडेशन पे और कुछ कंटेंट को बार-बार देखने की क्षमता पर उम्र के हिसाब से कुछ सीमाएं लगाएगा।

अगर आपको गलती से नाबालिग फ्लैग किया जाता है, तो आपको Google को अपने क्रेडिट कार्ड की जानकारी या सरकारी ID देकर अपनी उम्र सत्यापित करनी होगी। हालांकि अमेरिका में इसका रोलआउट बहुत सतर्क रहा है, लेकिन “हमने ये तरीका दूसरे मार्केट में कुछ समय से इस्तेमाल किया है, जहां ये अच्छी तरह काम कर रहा है”।

ये क्यों ज़रूरी है

माता-पिता के लिए ये सिर्फ $10 मिलियन के जुर्माने की बात नहीं है, बल्कि इसकी बात ये है कि क्या आप Disney या Google जैसी कंपनियों पर भरोसा कर सकते हैं कि वो आपके बच्चों की सुरक्षा करेंगी और कानून का पालन करेंगी। ऐसे मामले दिखाते हैं कि बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षित रखने की कोशिश में माता-पिता को कितनी मुश्किल लड़ाई का सामना करना पड़ता है।

Disney के लिए $10 मिलियन का जुर्माना मामूली फटकार भर है, लेकिन ये समझौता दिखाता है कि ऑनलाइन बच्चों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय बहस अमेरिका के रेगुलेटरी माहौल को आकार दे रही है।

कई राज्यों(नई विंडो) ने अब उम्र सत्यापन कानून पेश किए हैं, और जून 2025 में Supreme Court ने Texas के एक ऑनलाइन उम्र सत्यापन कानून को बरकरार रखा(नई विंडो) है। संघीय स्तर पर ऐसे कानून की मांग की वजह से Congress में Kids Online Safety Act(नई विंडो) (KOSA) को दोबारा पेश किया गया, जो एक विवादास्पद बिल है (इसे दोनों पार्टियों की तरफ से सहायता और विरोध दोनों मिले) और 2024 में पास नहीं हो पाया था। उम्र सत्यापन के दूसरे कानून (जैसे App Store Accountability Act(नई विंडो)) भी ज़ोर पकड़ रहे हैं।