डाटा बैकअप और डाटा सिंक, फ़ाइलें स्टोर करने और अपडेट करने के अलग-अलग तरीके हैं, जो क्लाउड स्टोरेज के चलन के साथ लोकप्रिय हुए हैं। किसी एक का इस्तेमाल कब करना है, ये जानना आपके क्लाउड स्टोरेज को असरदार तरीके से इस्तेमाल करने का एक हिस्सा है।

संक्षेप में, बैकअप किसी फ़ाइल की एक कॉपी होती है, जिसे आप ज़रूरत पड़ने पे वापस पाने के लिए स्टोर करते हैं, जबकि सिंक में एक फ़ाइल दो या उससे ज़्यादा स्थानों पे होती है, जहां एक कॉपी में किए गए बदलाव बाकी सब में दिखते हैं। इस वजह से, इनके इस्तेमाल भी बिल्कुल अलग-अलग होते हैं।

डाटा बैकअप क्या है?

डाटा बैकअप का आइडिया आसान है। आप कंप्यूटर या मोबाइल डिवाइस पे किसी ज़रूरी फ़ाइल की कॉपी बनाते हैं और उसे किसी सुरक्षित और सुलभ जगह स्टोर कर देते हैं। आपके पास ओरिजिनल कॉपी वैसे ही रहती है, लेकिन नई कॉपी किसी सुरक्षित जगह पे रहती है — किसी दूसरे डिवाइस पे, एक्सटर्नल हार्ड ड्राइव पे, या सबसे बढ़कर, सुरक्षित क्लाउड स्टोरेज खाते में।

ऐसा करने के कई कारण हैं, लेकिन मुख्य कारण है अपनी फ़ाइलों या उनके किसी वर्ज़न की सुरक्षा। एक अच्छा उदाहरण है — अगर आपने कोई वीडियो बनाया या कोई टेक्स्ट डॉक्यूमेंट लिखा और आप एडिटिंग के दौरान कुछ गड़बड़ होने की स्थिति में ओरिजिनल वर्ज़न सुरक्षित रखना चाहते हैं।

बैकअप बनाने का एक और ज़रूरी कारण है फ़ाइलों की सुरक्षा, अगर उनके मौजूद डिवाइस में कुछ गड़बड़ हो जाए। उदाहरण के लिए, आप शायद अपनी फ़ोटो का बैकअप इसलिए लेना चाहेंगे ताकि अगर आपका फ़ोन चोरी हो जाए, टूट जाए, या खो जाए, तो तस्वीरें न खोएं। जब ऐसा होता है, तो आपकी तस्वीरें भी फ़ोन के साथ चली जाती हैं — जब तक आपके पास बैकअप न हों।

आखिर में, बैकअप बस स्टोरेज का दूसरा नाम है। एक बार कॉपी बनाकर उसे अपने क्लाउड स्टोरेज पे भेजने के बाद, आप ओरिजिनल को मिटा दें ताकि अपने लैपटॉप, स्मार्टफ़ोन, या किसी और डिवाइस पे जगह खाली हो। भले ही आप शायद ऐसा रोज़ इस्तेमाल होने वाली फ़ाइलों के साथ न करें, पुराने प्रोजेक्ट (स्कूल की रिपोर्ट, ऑफिस प्रेजेंटेशन, वग़ैरह) आप इस तरह आसानी से संग्रह में रख सकते हैं।

ज़्यादातर मामलों में, आप बैकअप खुद संभाल सकते हैं। जब भी आपके पास कुछ ऐसा हो जो खोने का जोखिम नहीं उठाना चाहिए, बस उस फ़ाइल को मैन्युअल रूप से कॉपी करें और अपनी पसंदीदा स्टोरेज पे ले जाएं। बेशक, ऐसा तय अंतराल पे करना बेहतर है ⸺ हम हर महीने की सिफ़ारिश करते हैं ⸺ और कुछ खास सॉफ्टवेयर आपके लिए बैकअप शेड्यूल भी कर सकते हैं।

डाटा सिंक क्या है?

डाटा सिंक अलग है। बैकअप तय अंतराल पे काम करते हैं और कॉपी बनाते हैं, जबकि सिंक (synchronization का संक्षिप्त रूप) किसी फ़ाइल का एक ही वर्ज़न कई डिवाइसों पे दोहराता है। किसी एक डिवाइस पे किसी फ़ाइल में किए गए बदलाव, लगभग तुरंत बाकी सभी डिवाइसों के सभी वर्ज़न में फैल जाते हैं।

उदाहरण के लिए, अगर आप Proton Drive इस्तेमाल करते हैं, तो अपनी हार्ड ड्राइव पे हमारे Windows ऐप का इस्तेमाल करके सिंक किए गए फोल्डर बना सकते हैं। जैसे ही आप किसी फ़ाइल को इन फोल्डरों में से किसी एक में डालेंगे, उस फ़ाइल का नया सिंक किया वर्ज़न क्लाउड में और अपने दूसरे डिवाइसों की Proton Drive ऐप में दिखेगा (अगर इंस्टॉल किया है)। जब आप उस फ़ाइल में बदलाव करेंगे, जैसे किसी डॉक्यूमेंट में टेक्स्ट जोड़ना या किसी इमेज में फेरबदल, तो नया वर्ज़न इन सभी डिवाइसों पे पुराने वर्ज़न को ओवरराइट कर देगा।

ये अपनी सभी फ़ाइलों को अपडेट रखने का शानदार तरीका है, खासकर उन लोगों के लिए जो कई डिवाइसों पे काम करते हैं। आप अपने फ़ोन से कोई तस्वीर ले सकते हैं, उसे अपने लैपटॉप पे बदल सकते हैं, और कुछ भी कॉपी किए बिना या कोई फ़ाइल ट्रांसफर किए बिना उसे अपने टैबलेट पे देख सकते हैं।

सिंक से कई लोगों के साथ मिलकर काम करना भी आसान हो जाता है — चाहे आपकी नौकरी, यूनिवर्सिटी, या स्कूल में। अगर आप सिंक सही तरीके से सेट करें, तो लोगों के एक ग्रुप के साथ किसी एक डॉक्यूमेंट पे काम कर सकते हैं और जब तक सब इंटरनेट से कनेक्ट हैं, एक-दूसरे के बदलावों को आसानी से ट्रैक कर सकते हैं।

एकमात्र नुकसान ये है कि अगर सावधानी न बरतें, तो सिंक आपकी स्टोरेज स्पेस ले सकता है। अगर आप किसी इमेज या वीडियो को ऐसे बदलें कि उसका साइज़ बढ़ जाए, तो वो सभी सिंक किए गए डिवाइसों पे ज़्यादा जगह लेगी। अगर आपकी हार्ड ड्राइव में स्टोरेज स्पेस सीमित है, तो ये समस्या हो सकती है।

सिंक बनाम बैकअप का इस्तेमाल कब करें?

भले ही डाटा बैकअप और डाटा सिंक पहली नज़र में मिलते-जुलते लगें, इनके इस्तेमाल अलग-अलग हैं। फ़ाइलों का बैकअप लें अगर आप उस फ़ाइल का कोई खास वर्ज़न सुरक्षित रखना चाहते हैं — या तो इसलिए कि आप उसे खोना नहीं चाहते, या इसलिए कि एडिटिंग शुरू करने से पहले आपके पास ओरिजिनल वर्ज़न होना चाहिए।

बैकअप के लिए सिंक लगभग बिल्कुल बेकार है। सिंक की गई फ़ाइलें हर बदलाव के साथ खुद अपडेट हो जाती हैं, जिससे वो फ़ाइलों के खास वर्ज़न सुरक्षित रखने के लिए ठीक नहीं होतीं। सिंक तब ज़रूरी होता है जब आप चाहें कि बदलाव कई फ़ाइल इंस्टेंस में रीयल टाइम में दिखें, या जब आप किसी फ़ाइल के सबसे अपडेट वर्ज़न के साथ काम करना चाहें।

अगर आप एक संग्रहकर्ता की तरह सोच रहे हैं और ये चाहते हैं कि किसी फ़ाइल को कुछ न हो, तो उसका बैकअप लें। अगर आप कई लोगों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं या कई डिवाइसों पे काम कर रहे हैं (या दोनों), तो अपनी फ़ाइलों को सिंक करें।

Proton Drive दोनों काम कर सकता है, और बैकअप के साथ-साथ सिंक के लिए भी स्थिर स्टोरेज देता है। आप खास फ़ाइलों के लिए सिंक चालू और बंद भी कर सकते हैं, यानी आप तय करते हैं कि आपके सिंक किए गए फोल्डर कितनी जगह लेंगे। नतीजा एक ऐसी क्लाउड स्टोरेज सर्विस है जो आपको सिंक और बैकअप के बीच तुरंत स्विच करने देती है।

लेकिन Proton Drive इस्तेमाल करने का सबसे बड़ा फ़ायदा बेहतर सुरक्षा और निजता है। ज़्यादातर प्रोवाइडरों के उलट, Proton को शुरू से ही सबसे पहले निजता को ध्यान में रखकर बनाया गया था। आपकी सभी फ़ाइलें शुरु-से-अंत तक एन्क्रिप्शन के साथ स्टोर किए जाते हैं, यानी चाहने पर भी हम आपकी फ़ाइलों की सामग्री या ज़्यादातर मेटाडाटा नहीं देख सकते। साथ ही, Proton Drive के Docs के साथ, आप दूसरों के साथ रीयल टाइम में डॉक्यूमेंट बदल सकते हैं — उतनी ही निजता के साथ। Google Drive या Google Docs के उलट, हमारा बिज़नेस मॉडल आपकी निजता की सुरक्षा पे आधारित है, न कि मुनाफ़े के लिए आपके डाटा का इस्तेमाल करने पे।

अगर आप बैकअप, सिंक, और अपने डाटा पे दोबारा नियंत्रण पाने में रुचि रखते हैं, तो Proton Drive 5 जीबी स्टोरेज मुफ़्त देता है। साइनअप करके, आप इंटरनेट को सबके लिए ज़्यादा सुरक्षित और निजी बनाने के हमारे मिशन का समर्थन करेंगे।