आपने सुना होगा कि AI की मदद से ज़्यादा काम तेज़ी से हो सकता है। लेकिन शुरुआत कहां से करें?

यह तय करने के लिए कि क्या ऑटोमेट करना है, ऐसे कामों की पहचान करनी होगी जो बार-बार होते हैं, तय नियमों पर चलते हैं और जिन्हें जांचना आसान है। फिर एक ऐसा वर्कफ्लो सेटअप करना होगा जो लगातार निगरानी के बिना चल सके, लेकिन नाकामियों को उनसे परेशानी पैदा होने से पहले फ्लैग कर दे। और आखिर में, जहां एक गलती को पहले जैसा करना महंगा पड़ सकता है, वहां इंसानी फैसले के लिए पर्याप्त जगह छोड़नी होगी।

अगर आप हमारी वेबसाइट पर हैं, तो वर्कफ्लो ऑटोमेशन के प्राइवेसी और सुरक्षा पहलुओं पर भी गौर करने की ज़रूरत होगी। यह जानना ज़रूरी है कि आपके बिज़नेस और क्लाइंट डेटा कहां जाता है, उसे कौन एक्सेस कर सकता है और उसका इस्तेमाल कैसे होगा।

इस गाइड में हम इन सभी फैसलों पर एक-एक कदम चलकर बात करेंगे, ताकि ऑटोमेशन के लिए अच्छे कामों की पहचान हो सके और एक ऐसा पायलट चलाया जा सके जो आपकी टीम का कीमती समय बचाए।

वर्कफ्लो ऑटोमेशन से जुड़े आपके हर सवाल का जवाब हम देंगे, जिनमें ये शामिल हैं:

  • वर्कफ्लो ऑटोमेशन क्या है
  • ऐसे कामों की पहचान कैसे करें जिन्हें ऑटोमेट करना आसान है
  • किसी भी ऑटोमेशन को फाइनल करने से पहले उसे कैसे परखें
  • ऑटोमेशन वर्कफ्लो का सीक्वेंस कैसे प्लान करें
  • अपने ऑटोमेशन वर्कफ्लो में इंसानी फैसले के लिए जगह कैसे छोड़ें
  • ऐसा ऑटोमेशन सॉफ्टवेयर कैसे चुनें जो आपके डेटा की सुरक्षा करे
  • अपने वर्कफ्लो ऑटोमेशन को कैसे टेस्ट करें

वर्कफ्लो ऑटोमेशन क्या है?

वर्कफ्लो ऑटोमेशन में Zapier, Microsoft Power Automate और Jira जैसे सॉफ्टवेयर इस्तेमाल होते हैं, जो ऐसे कदम पूरे करते हैं जो वरना हाथ से किए जाते। रोज़मर्रा के काम में इसका मतलब अक्सर सीधे नियमों का पालन होता है, जैसे डेडलाइन निकलने पर रिमाइंडर भेजना या मंज़ूर की गई रिपोर्ट को सही फोल्डर में अपलोड करना। अगले सेक्शन में हम दिखाएंगे कि बिज़नेस हर डिपार्टमेंट में काम कैसे ऑटोमेट कर रहे हैं, कस्टमर पूछताछ से लेकर मार्केटिंग रिपोर्ट तक।

AI वर्कफ्लो ऑटोमेशन में जानकारी समझने, कॉन्टेंट बनाने या वर्कफ्लो के भीतर अगला कदम चुनने के लिए लार्ज लैंग्वेज मॉडल इस्तेमाल होते हैं। लार्ज लैंग्वेज मॉडल कैलेंडर या फाइल स्टोरेज सर्विस जैसे कनेक्टेड सॉफ्टवेयर के साथ काम कर सकते हैं और उन्हें दी गई परमिशन के दायरे में कार्रवाई कर सकते हैं।

उपलब्ध कनेक्टेड टूल्स के हिसाब से, बिज़नेस के लिए AI असिस्टेंट पूरे वर्कफ्लो को शुरू से आखिर तक मैनेज कर सकता है या अलग-अलग कदम हैंडल कर सकता है। जैसे, Lumo की मदद से अपनी टीम के साप्ताहिक प्रगति नोट्स से प्रोजेक्ट अपडेट तैयार किया जा सकता है।

वर्कफ्लो ऑटोमेशन के फायदे और उदाहरण

वर्कफ्लोऑटोमेशन का उदाहरणव्यावहारिक फायदा
कस्टमर पूछताछआने वाली रिक्वेस्ट को कन्फर्म करना और उन्हें सही टीम तक पहुंचानातेज़ जवाब: ऑफिस के समय के बाहर भी कस्टमर्स को कन्फर्मेशन मिल जाता है और रिक्वेस्ट सही लोगों तक जल्दी पहुंचती हैं
इनवॉइस प्रोसेसिंगइनवॉइस की जानकारी अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर में ट्रांसफर करना और छूटे हुए फील्ड या संभावित डुप्लिकेट फ्लैग करनाप्रोसेसिंग लागत कम और गड़बड़ियां कम: जानकारी दर्ज करने और ट्रांसक्रिप्शन की गलतियां सुधारने में कम समय लगता है
नए कर्मचारी की ऑनबोर्डिंगसेटअप टास्क बनाना, वेलकम जानकारी भेजना और साथियों का इनपुट ज़रूरी होने पर उन्हें सूचित करनाबेहतर एकरूपता: हर नई भर्ती को ज़रूरी कदम मिल जाते हैं, बिना किसी पर इस भरोसे के कि वह हर जानकारी याद रखे
सेल्स हैंडऑफडील पूरी मार्क होने पर ऑनबोर्डिंग टास्क बनाना और अकाउंट टीम को सूचित करनाबेहतर तालमेल: टीमों को पता रहता है कि काम उनके लिए कब तैयार है और अगला कदम किसकी ज़िम्मेदारी है
इन्वेंटरी अपडेटसिस्टम्स के बीच स्टॉक के आंकड़े ट्रांसफर करना और तय सीमा से नीचे वाले आइटम फ्लैग करनाज़्यादा क्षमता: प्रोडक्ट और ऑर्डर बढ़ने पर भी हाथ से स्टॉक जांचने की ज़रूरत कम हो जाती है
मार्केटिंग रिपोर्टकैंपेन के मेट्रिक्स जमा करना और एक स्टैंडर्ड रिपोर्ट तैयार करनाविश्लेषण के लिए ज़्यादा समय: टीम आंकड़े जोड़ने में कम और क्या बदलना है यह तय करने में ज़्यादा समय देती है

ऑटोमेट करने में आसान कामों की पहचान कैसे करें

किसी काम को ऑटोमेट करने से पहले सोचें कि क्या उसे करने की ज़रूरत अब भी है। ऐसी रिपोर्ट जिसे कोई इस्तेमाल नहीं करता, उसे ऑटोमेट करने से बेहतर है कि बंद कर दिया जाए। इसके बाद, जिन कामों को रखने का फैसला किया है, उनमें ऐसे टास्क देखें जिनमें ये गुण मौजूद हों:

  • ये बार-बार होते हैं: टास्क रोज़, हर हफ्ते या हर नई रिक्वेस्ट के साथ आता है, इसलिए बचा हुआ समय जुड़ता जाता है।
  • हर बार एक ही कदम दोहराते हैं: इस प्रोसेस को कुछ नियमों के रूप में लिखा जा सकता है, बिना ज़्यादा अपवादों की ज़रूरत के।
  • जानकारी एक तय फॉर्मैट में आती है: फॉर्म, स्प्रेडशीट और स्टैंडर्ड डॉक्युमेंट्स को ऑटोमेट करना खुले रूप वाली रिक्वेस्ट से आसान होता है।
  • गलतियां आसानी से पकड़ में आती हैं: छूटा हुआ फील्ड या गलत फाइल की गई डॉक्युमेंट जल्दी पकड़ में आ जाती है और ठीक हो जाती है।

ऐसे कामों को पहचानने के लिए देखें कि काम कहां धीमा पड़ता है या गड़बड़ होता है। आम संकेतों में शामिल हैं: जानकारी हाथ से एक जगह से दूसरी जगह कॉपी करना, साथियों का इंतज़ार करना कि कोई काम आगे बढ़ाए, और एक ही गड़बड़ियां बार-बार ठीक करना। ऐसे टास्क अक्सर ऑटोमेशन के लिए अच्छे होते हैं, जैसे:

  • ऐप्स या स्प्रेडशीट के बीच जानकारी कॉपी करना
  • स्टैंडर्ड रिमाइंडर और कन्फर्मेशन भेजना
  • ज़रूरी फील्ड भरे हैं या नहीं, यह जांचना
  • एक ही सोर्स से रिपोर्ट तैयार करना
  • फाइलों को तय फोल्डरों में डालना

अब जब उन टास्क की पहचान हो चुकी है जिन्हें ऑटोमेट किया जा सकता है, तो यह देखने का समय है कि हर टास्क मेहनत के लायक है या नहीं।

किसी भी ऑटोमेशन को अपनाने से पहले उसे कैसे परखें

हर ऑटोमेशन को सेटअप करने, जांचने और बनाए रखने में समय लगता है, इसलिए किसी भी टास्क को अपनाने से पहले उसे इन पांच जांचों से गुज़ारें:

  • कम्पैटिबिलिटी: कन्फर्म करें कि जिस सॉफ्टवेयर पर विचार किया जा रहा है, वह उन ऐप्स के साथ जानकारी का आदान-प्रदान कर सकता है जो पहले से इस्तेमाल में हैं। अगर यह उस जगह कनेक्ट नहीं हो पाता जहां डेटा मौजूद है, तो किसी को उसे हाथ से शिफ्ट करना पड़ेगा, जिससे मकसद ही खत्म हो जाता है।
  • ज़िम्मेदारी: ऑटोमेशन सेटअप करने और उसे चलाते रहने के लिए एक व्यक्ति तय करें। जब कोई प्रोसेस बदलता है या कोई स्टेप असफल होता है, तो टीम को पता होना चाहिए कि किससे संपर्क करना है।
  • तकनीकी सहायता: पता करें कि वह व्यक्ति सेटअप अकेले मैनेज कर सकता है या उसे IT या किसी बाहरी प्रोवाइडर की मदद चाहिए होगी। इस समय और लागत को शुरू से ही अपने प्लान में शामिल करें।
  • मौजूदा काम का बोझ: जो लोग यह काम करते हैं, उनसे पूछें कि हर टास्क में कितना समय लगता है, कितनी बार गलतियां ठीक करनी पड़ती हैं और अप्रूवल के इंतज़ार में कितना समय बर्बाद होता है।
  • बचा हुआ समय: इन आंकड़ों के आधार पर तुलना करें कि ऑटोमेशन से कितना समय बच सकता है और उसे सेटअप करने, रिव्यू करने व बनाए रखने में कितना समय लगता है, साथ ही सदस्यता की लागत भी। जैसे, तीन घंटे का सेटअप जो हर महीने के दो घंटे के टास्क को 30 मिनट के रिव्यू में बदल देता है, दो महीने में ही अपनी लागत निकाल लेता है।

ऑटोमेशन वर्कफ़्लो का क्रम कैसे प्लान करें

जब यह साफ प्लान हो कि काम शुरू से आखिर तक कैसे आगे बढ़ना चाहिए, तो ऑटोमेशन सेटअप करना और जांचना आसान हो जाता है।

प्रोसेस को एक सादे फ्लोचार्ट की तरह बनाएं और इन बिंदुओं पर काम करें:

  • शुरुआत और अंत के बिंदु: तय करें कि वर्कफ़्लो कब शुरू होता है, जैसे कोई फॉर्म जमा होना या ईमेल आना, और किसे पूरा माना जाएगा।
  • हर कदम सही क्रम में: दोनों के बीच के हर स्टेप की सूची बनाएं और लिखें कि हर स्टेप को कौन-सी जानकारी चाहिए और वह अगले स्टेप को क्या भेजता है।
  • फैसले के बिंदु: जहां भी काम एक से ज़्यादा तरीकों से आगे बढ़ सकता है, नियम को हां-या-ना वाले सवाल की तरह लिखें। “क्या रकम मौजूद और पढ़ने लायक है?” — यह सॉफ्टवेयर जांच सकता है। “क्या क्लेम सही लगता है?” — यह नहीं।
  • कुछ गड़बड़ होने पर क्या होता है: हर “ना” के लिए तय करें कि काम आगे कहां जाएगा, किसे सूचित किया जाएगा और समस्या ठीक होने पर वह वर्कफ़्लो में कहां फिर से जुड़ेगा।
  • अप्रूवल: ऐसे हर स्टेप को मार्क करें जहां वर्कफ़्लो को आगे बढ़ने से पहले रुककर किसी व्यक्ति का इंतज़ार करना चाहिए। अगले सेक्शन में बताया गया है कि किन स्टेप्स के लिए अप्रूवल चाहिए।

जैसे, कर्मचारियों द्वारा खरीद की रीसिप्ट के साथ जमा किए गए खर्च के क्लेम प्रोसेस करने के लिए डॉक्युमेंट वर्कफ़्लो ऑटोमेशन इस्तेमाल किया जा सकता है। नीचे दिया गया प्लान दिखाता है कि सॉफ्टवेयर हर रीसिप्ट कैसे पढ़ता है, गायब जानकारी को कैसे हैंडल करता है और अप्रूवल के लिए पूरा क्लेम कैसे भेजता है।

अपने ऑटोमेशन वर्कफ़्लो में इंसानी फैसले के लिए जगह कैसे रखें

अगर चिंता है कि ऑटोमेशन कोई ऐसी गलती कर देगा जिसे कोई पकड़ नहीं पाएगा, तो इसका हल उससे बचना नहीं है। हल यह है कि पहले से तय कर लें कि किन स्टेप्स की जांच किसी व्यक्ति को करनी है।

शुरुआत इससे करें कि नतीजे का इस्तेमाल कैसे होगा और गलत होने पर क्या होगा। गलत इंटरनल लेबल आमतौर पर बदलना आसान होता है, लेकिन क्लाइंट को भेजी गई गलत कीमत उनकी उम्मीदें पहले ही तय कर चुकी हो सकती है।

अगर किसी स्टेप पर रिव्यू चाहिए, तो रिव्यू करने वाले को मूल जानकारी का एक्सेस दें और एक साफ फैसला दें। जो स्टेप्स अपने आप चलते हैं, उनके लिए सुनिश्चित करें कि सॉफ्टवेयर ज़रूरी अप्रूवल का इंतज़ार करता है, क्या हुआ इसका रिकॉर्ड रखता है और स्टेप असफल होने पर ज़िम्मेदार व्यक्ति को अलर्ट करता है।

हर स्टेप के लिए चुनें कि उसे ऑटोमेट करना है, सॉफ्टवेयर से काम तैयार कराकर किसी से रिव्यू कराना है, या उसे मैन्युअल रखना है।

तरीकाकब फिट बैठता हैउदाहरण
ऑटोमेट करेंसाफ नियम, तय इनपुट और ऐसी गड़बड़ियां जिन्हें पकड़ना और ठीक करना आसान होभरे हुए फॉर्म से टास्क बनाएं
मदद करें और रिव्यू करेंसॉफ्टवेयर तैयारी का समय घटाता है, लेकिन इस्तेमाल से पहले नतीजे की जांच ज़रूरी हैमीटिंग नोट्स का सारांश बनाएं या क्लाइंट अपडेट का ड्राफ्ट तैयार करें
फैसला मैन्युअल रखेंयह स्टेप बातचीत, सहानुभूति, आपस में टकराते सबूत या नीति में अपवाद पर निर्भर करता हैनाराज़ क्लाइंट के लिए मुआवजे पर सहमति बनाएं

ऐसा ऑटोमेशन सॉफ्टवेयर कैसे चुनें जो आपके डेटा की सुरक्षा करे

बिज़नेस या क्लाइंट की जानकारी, और खास तौर पर व्यक्तिगत रूप से पहचानी जा सकने वाली जानकारी, किसी ऑटोमेशन टूल पर अपलोड करने से पहले जांचें कि उसके पीछे की कंपनी आपके डेटा को कैसे हैंडल करती है।

एक बार जानकारी शेयर हो जाने के बाद, नतीजे को रिव्यू या रिजेक्ट करने से यह तथ्य नहीं बदलेगा कि प्रोवाइडर के पास पहले ही आपकी जानकारी मौजूद है। जैसे, खर्च की रीसिप्ट से कर्मचारियों की यात्रा या क्लाइंट के साथ संबंधों का पता चल सकता है।

जिस भी सेवा पर विचार किया जा रहा है, उसके लिए पता करें:

  • क्या शेयर करना ज़रूरी है: उसे कौन-सी जानकारी, फाइल या बातचीत चाहिए और क्या छोड़ा जा सकता है।
  • जानकारी का इस्तेमाल कैसे होता है: क्या प्रोवाइडर आपकी जानकारी का इस्तेमाल टास्क पूरा करने के अलावा भी करता है। AI सेवाओं के लिए जांचें कि अपलोड और जनरेट किया गया कंटेंट मॉडल ट्रेन करने में इस्तेमाल होता है या नहीं।
  • इसे कौन एक्सेस कर सकता है: आपकी टीम के लोग, प्रोवाइडर और इसे प्रोसेस करने से जुड़ी अन्य कंपनियां। ध्यान दें: आपके डेटा पर AI ट्रेन न करने का वादा यह साबित नहीं करता कि प्रोवाइडर आपकी स्टोर की गई जानकारी पढ़ सकता है या नहीं।
  • क्या स्टोर होता है: क्या सेवा फाइलें, बातचीत या प्रोसेसिंग लॉग रखती है, उन्हें कितने समय तक रखा जाता है और क्या मिटाया जा सकता है। यह सारी जानकारी हर एप्लीकेशन की डेटा रिटेंशन नीति में मिलेगी।
  • इसकी सुरक्षा कैसे होती है: एन्क्रिप्शन किस चीज़ को कवर करता है और क्या प्रोवाइडर के पास स्टोर की गई जानकारी पढ़ने के लिए ज़रूरी चाबियां मौजूद हैं। एन्क्रिप्ट किए गए स्टोरेज से किसी फाइल को दूसरी सेवा में कॉपी करने पर वह भी उस सेवा की सुरक्षा और प्रक्रियाओं के दायरे में आ जाती है।

अपने वर्कफ़्लो ऑटोमेशन को कैसे टेस्ट करें

पहले ऑटोमेशन को एक छोटे पायलट की तरह चलाने से टीम को समस्याएं पहले ही मिल जाती हैं, इससे पहले कि उस पर और काम निर्भर होने लगे।

  1. कम जोखिम वाला टास्क चुनें: ऐसा काम चुनें जो दोहराव वाला हो, जिसमें प्राइवेट या गोपनीय जानकारी शामिल न हो और जिसके नतीजे जांचने में आसान हों।
  2. एक व्यक्ति को ज़िम्मेदार बनाएं: सुनिश्चित करें कि सहकर्मियों को पता हो कि वर्कफ़्लो को कौन पॉज़ कर सकता है, विफलताओं की जांच कौन करेगा और प्रोसेस बदलने पर उसे कौन अपडेट करेगा।
  3. काम करने वालों को जानकारी दें: समझाएं कि कौन-से स्टेप्स अब अपने आप होते हैं, क्या अब भी उनकी ज़िम्मेदारी है और समस्या की जानकारी कैसे देनी है।
  4. सिर्फ आसान केस ही नहीं, मुश्किल केस भी टेस्ट करें: आम केसों के साथ-साथ अधूरे सबमिशन, डुप्लीकेट और असफल ट्रांसफर भी चलाएं। जांचें कि वर्कफ़्लो अप्रूवल का इंतज़ार करता है और समस्याएं सही व्यक्ति तक भेजता है।
  5. नतीजे मापें: इसमें लगने वाली मेहनत की तुलना मूल प्रोसेस से करें, जिसमें नतीजों को रिव्यू करने, गलतियां सुधारने और ऑटोमेशन बनाए रखने में लगा समय भी शामिल है।
  6. बढ़ाएं सिर्फ तब जब यह टिक पाए: अगर पायलट से कुल मिलाकर काम कम होता है और कहीं और अतिरिक्त काम बनाए बिना क्वालिटी बनी रहती है, तो इसे और टास्क तक बढ़ाया जा सकता है।

ऐसा बिज़नेस AI असिस्टेंट चुनें जो प्राइवेट हो

Lumo एक बिज़नेस AI असिस्टेंट है जो सारांश, तुलना और ड्राफ्ट में मदद करता है, और डिफॉल्ट रूप से आपकी बातचीत का इस्तेमाल मॉडल ट्रेन करने के लिए नहीं करता। सेव की गई बातचीत का इतिहास ज़ीरो-एक्सेस एन्क्रिप्शन से सुरक्षित रहता है, इसलिए इसे Proton भी नहीं पढ़ सकता। उचित मानवीय समीक्षा के साथ, ये सुरक्षाएं टीमों को बिज़नेस जानकारी वाली AI सहायता के लिए एक प्राइवेट माहौल देती हैं।

प्राइवेसी को बाकी वर्कफ्लो में भी बनी रहना चाहिए। सारांश या ड्राफ्ट तैयार करने के बाद, कोई तकनीकी सहकर्मी या IT प्रोवाइडर Proton Drive CLI for Business की मदद से कमांड लाइन से फाइल वर्कफ्लो ऑटोमेट कर सकता है और फाइल अपलोड, डाउनलोड और मैनेजमेंट को स्क्रिप्ट कर सकता है।

ऑटोमेशन से आपकी टीम को ज़्यादा क्षमता मिलनी चाहिए, और उसे सौंपी गई जानकारी की गोपनीयता भी बनी रहनी चाहिए।